प्रशांत के समर्थन में देश भर में चलेगा ‘एक रुपया’ आंदोलन !

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प्रशांत भूषण को एक रुपये जुर्माने की ख़बर आने के तुरंत बाद ट्विटर पर यह मुद्दा तेज़ी से वायरल होने लगा। हजारों लोगों ने #Re1 ट्वीट करना शुरू कर दिया। इसे प्रशांत भूषण की नैतिक जीत कहा जाने लगा। लोगों ने लिखा कि सच की गूँज इतनी भारी पड़ी की सुप्रीम कोर्ट सज़ा के नाम पर केवल खानापूरी कर पाया। प्रशांत भूषण के सहयोगी और स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि यह सच और देश की नैतिकता का इम्तहान था। पूरे देश में एक रुपये को लेकर राष्ट्रीय आंदोलन चलाया जायेगा।

बहरहाल, सवाल ये भी उठ रहा है कि अगर प्रशांत भूषण जुर्माना न भरेंगे तो क्या होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर प्रशांत भूषण जुर्माना नहीं भरते तो उन्हें तीन महीने की क़ैद होगी और तीन साल तक वक़ालत करने पर भी रोक रहेगी। लेकिन अगर उन्हें तीन महीने की जेल होगी तो वे वैसे भी प्रैक्टिस नहीं कर पायेंगे। तो क्या जेल से निकलने के बाद तीन साल तक उनके प्रैक्टिस करने पर रोक रहेगी? या फिर दोनों को साथ ही माना जायेगा?

इस बीच जेएनयू के प्रोफेसर और स्वराज अभियान के नेता प्रो.आनंद कुमार ने कहा कि यह देश के लिए बेहद गर्व का क्षण है। प्रशांत भूषण की आवाज़ से पूरे देश ने आवाज़ मिलायी है। अहंकारी सत्ताधारियों का पलड़ा झुका दिया गया। उन्होंने कहा कि तिलक, भगत सिंह, गाँधी को भी अदालतों ने सज़ा सुनायी थी, लेकिन स्याही सूखते ही लोग उसको भूल गये। देश बदल गया। उन्होंने कहा कि ऐसी टकसाल अभी बनी ही नहीं जो वह ऐसा एक रुपये का सिक्का ढाल सके जो प्रशांत भूषण की सज़ा का भुगतान कर सके। प्रो.आनंद कुमार ने कहा कि तमाम तानाशाह इतिहास के कूड़ेदान में मिलते हैं, मौजूदा सत्ता का भी वही हश्र होगा।

बहरहाल, अब प्रशांत भूषण के आगे के कद़म पर क़यास लगाये जा रहे हैं। कुछ लोगों का मानना है कि प्रशांत भूषण को बड़ी राहत मिली है और वे एक रुपये जमा करके मामला रफ़ा दफ़ा कर सकते हैं। लेकिन जिस तरीक़े से ‘स्वराज अभियान’ ने एक रुपये की प्रतीकात्मक सज़ा को आंदोलन में बदलने का फ़ैसला किया है, उससे लगता है कि मामला इतना आसान नहीं है। इतिहास की  समझ रखने वालों का कहना है कि अगर इस व़क्त प्रशांत जुर्माना न भर कर जेल चले जायें तो देश की चेतना झकझोर उठेगी। उन तमाम सवालों पर चर्चा तेज़ हो जाएगी जिस पर प्रशांत भूषण ने देश को आवाज़ दी है। भगत सिंह तो क्रांति के विचार को प्रचारित करने के लिए फाँसी तक चढ़ गये थे। उन्होंने असेंबली में बम फेंकने के बाद ख़ुद को पुलिस के हवाले इसीलिए किया था ताकि अदालत में अपनी बात रखने का उन्हें मौका मिले और देश उनके क्रांतिकारी विचारों को जान सके।

देखना है कि इतिहास के इस मोड़ पर प्रशांत किस राह को चुनते हैं।

प्रशांत की सज़ा के बारे में विस्तार से जानने के लिए नीचे के लिंक पर चटका लगायें–

‘सत्यवीर’ प्रशांत भूषण पर 1 रुपये का ‘सुप्रीम’ जुर्माना, न दिया तो तीन महीने जेल!

 



 


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