क्‍या ‘नरेंद्र मोदी’ IPC से ऊपर हैं कि सुसाइड नोट में नाम के बावजूद उनके खिलाफ FIR नहीं हुई?

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महाराष्‍ट्र के यवतमाल जिले में एक किसान ने मंगलवार को खुदकुशी कर ली और अपनी मौत का जिम्‍मेदार मरने से पहले नरेंद्र मोदी सरकार को ठहरा दिया। अपने सुसाइड नोट में किसान ने कज्र का जिक्र करते हुए लिखा है, ”मैं कर्ज के बोझ से खुदकुशी कर रहा हूं और नरेंद्र मोदी की सरकार मेरी मौत की जिम्‍मेदार है।”

पचास साल के किसान शंकर भाउराव चयारे ने यवतमाल के घंटनजी तालुका के राजूवाड़ी गांव में कीटनाशक खाकर खुदकुशी कर ली। शंकर के तीन बेटियां हैं। पहले शंकर ने लटक कर मरने की कोशिश की। उसमें नाकाम रहने पर उन्‍होंने कीटनाशक खा लिया। उन्‍हें सरकारी अस्‍पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्‍टरों ने दोपहर डेढ़ बजे उन्‍हें मृत घोषित कर दिया।

मृत किसान का सुसाइड नोट जिसमें उसने नरेंद्र मोदी को ख़ुदकुशी की वजह बताया है

इससे पहले भी यवतमाल में पिछले साल प्रकाश मंगांवकर नामक किसान ने खुदकुशी करने से पहले एक पत्‍ते पर लिखा था ”मोदी सरकार” और दूसरे पर लिखा था ”कर्ज से खुदकुशी”। दोनों पत्‍ते उनकी लाश के बगल में पाए गए थे।

ये पहला मामला है कि कोई किसासन अपने सुसाइड नोट में बाकायदे मोदी सरकार को मौत का कारण बताकर मरा है। उनकी मौत के बाद गांववालों ने स्‍थानीय थाने को घेरकर नरेंद्र मोदी के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने की मांग की और लाश का पंचनामा कराने से इनकार कर दिया जब तक कि मुकदमा दर्ज नहीं हो जाता।

थाने में जुटे परिजन और किसान

आम तौर से सुसाइड नोट में अगर मौत के लिए उकसाने वाले का नाम लिखा होता है तो उसके खिलाफ मुकदमा कायम किया जाता है, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय शंकर की बेटी से उसने एक औपचारिक शिकायत ले ली जिसमें नरेंद्र मोदी के खिलाफ आइपीसी के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।


साभार twocircles.net

 

 

 


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