लखनऊः कहने को स्मार्ट सिटी, साल भर से ट्रैफिक पुलिस के पास लंबित हैं 7 लाख चालान!

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उत्तर प्रदेश को स्मार्ट सिटी बनाने के मुख्यमंत्री ने बड़े-बड़े दावे किए। यूपी को स्मार्ट सिटी बनने की रेस में नंबर वन का अवॉर्ड भी मिल चुका है, जिसके लिए रोड पर नंबर वन के बड़े-बड़े पोस्टर लगा कर यूपी सरकार ने खूब वहवाई लूटनी चाही। लेकिन यूपी स्मार्ट सिटी सिर्फ कागज़ों और पोस्टरों पर ही है। हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। राजधानी लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए सरकार करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा चुकी है और बहा रही है। लेकिन लखनऊ का ट्रैफिक सिस्टम बदहाली का शिकार है। स्मार्ट सिटी बन रही राजधानी का आलम यह है कि पिछले 1 साल से लखनऊ ट्रैफिक पुलिस के पास करीब 7 लाख चालान पेंडिंग पढ़े हैं।

राजधानी के ट्रैफिक सिस्टम की बदहाली का यह हाल है की कहीं गलत पता या गलत मोबाइल नंबर के कारण वाहन मालिक के घर चालान नहीं पहुंच रहे हैं, तो कई कारों में हेलमेट नहीं पहनने पर तो कई बाइक सवारों का सीट बेल्ट नहीं लगाने के चालान हो रहे है। इस सब का कारण केवल बदहाल व्यवस्था है।

ई-चालान में फोटो डीसीएम का लेकिन नंबर ट्रैक्टर का..

आज तक की रिपोर्ट के अनुसार, मोहनलालगंज के सिसेंडी में रहने वाले दिलराज सिंह के पास लखनऊ कमिश्नरेट के यातायात मुख्यालय से 7500 रुपए का चालान पहुंचा। लेकिन हद तो तब पार हो गई जब चालान पर तो डीसीएम-ट्रक की फोटो लगी थी और फोटो पर डीसीएम ट्रक नंबर यूपी 32 CZ 9221 लिखा हुआ था। लेकिन चालान पर दिलराज सिंह का ट्रैक्टर नंबर यूपी 32 CN 9221 लिखा हुआ था। यानी ई-चालान में फोटो डीसीएम का था लेकिन नंबर ट्रैक्टर का था।

कार में हेलमेट न लगाने का भेजा गया ई-चालान..

अब तो राजधानी में ट्रैफिक पुलिस ने कार में हेलमेट न पहनने का भी चलन भेजना शुरू कर दिया। लखनऊ के वजीरगंज गोलागंज के रहने वाले इरफान अली इसी का शिकार हुए। 11 अप्रैल 2021 को इरफान अली की कार UP 32 BH 3707 पर हेलमेट नहीं पहनने का चालान काटा था। इसी तरह की घटना के शिकार 2 साल पहले इंदिरा नगर के सेक्टर-11 में रहने वाले दीपक महाजन के पास उनकी कार UP 32 KX 9092 पर दोपहिया वाहन लिख हेलमेट नहीं पहनने पर 500 रुपए का चालान भेजा गया।

 कुछ महीनों के चालान का निपटारा, पर 7 लाख चालान अभी भी बाकी…

वहीं, अप्रैल 2020 से अगस्त 2021 तक 6 लाख 80,000 चालान ऐसे हैं जो नहीं भेजे जा सके थे। पिछले जून तक यह संख्या 8 लाख थी। लेकिन जुलाई में हुई लोक अदालत में 2021 के अप्रैल-मई-जून के चालान का निपटारा कर दिया गया, लेकिन अभी भी करीब 7 लाख चालान लंबित हैं। जो की काफी बड़ी संख्या है और इसमें भी न जाने कितने लोगो को ऐसे ही उल्टे चालान भेजे जायेंगे।

गलत चालान भेजने का सबसे बड़ा कारण क्या?

ई-चालान के बहुत सारे ऐसे अजीब मामले सामने आते हैं। किसी के पास बाइक पर सीट बेल्ट नहीं पहनने का चालान पहुंच रहा है, तो किसी के पास कार में हेलमेट नहीं पहनने पर चालान भेजा जा रहा। पिछले 2 साल में लखनऊ में तमाम ऐसे कई लोगों ई-चालान के जंजाल में फसे है और दिक्कतें झेल रहे हैं। ऐसा होने का कारण यह है की ट्रैफिक पुलिस के साथ-साथ स्थानीय पुलिस भी चालान करती है। एक साथ कई वाहनों की फोटो खींच ली जाती है और उस फोटो को अपलोड करने में त्रुटि के कारण ऐसी शिकायतें सामने आती हैं।

गलतियां कब और कैसे सुधरेंगी?

ऐसी शिकायतें सामने आने पर तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है जिसमें डीसीपी ट्रैफिक, ट्रैफिक इंस्पेक्टर ई-चालान और एसीपी ई-चालान सदस्य हैं। हालांकि, शिकायत मिलने पर उस चालान को कैंसिल कर दिया जाता है। लेकिन सवाल यह है की यह गलतियां कब और कैसे सुधरेंगी? कब तक लोगो को परेशान होना पड़ेगा और चालान सही करने के लिए ऑफिसों के चक्कर काटने पड़ेंगे? इस बात को भी नज़र अंदाज़ नही किया जा सकता की 7 लाख के करीब चालान अभी भी लंबित हैं।

एक माह में करीब 70 से 80 गलत हुए चालान को किया गया कैंसिल..

आज तक ने डीसीपी ट्रैफिक रईस अख्तर ने बताया कि उन्होंने बताया कि एक माह में करीब 70 से 80 ऐसे गलत तरीके से हुए चालान को कैंसिल किया जाता है। 12 अगस्त को ऐसे 35 चालान रद्द किए गए और 31 अगस्त को 18 चालान रद्द किए गए। पुलिस लाइन में प्रतिदिन सिर्फ 9 पुलिसकर्मी ही कंप्यूटर पर 1200 ई-चालान काट रहे हैं। ऐसे में पेंडेंसी बढ़ाना लाज़मी है। इसी कारण 7 लाख ई-चालान लोगों के घरों तक अभी भी नहीं पहुंच पाए हैं।

 


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