CAB: पूर्वोत्तर के चार राज्य में करीब 80 फीसदी लोगों ने बिल का विरोध किया है

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नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में सुलगते असम और पूर्वोत्तर सहित पूरे देश में चल रहे विरोध के बीच गुरुवार देर रात राष्ट्रपति की ओर से इसे मंजूरी मिलने के बाद यह विधेयक कानून में बदल गया. राज्यसभा में विधेयक के पक्ष में 125 जबकि विपक्ष में 105 वोट पड़े थे. इस बीच सीएसडीएस ने इस विधेयक पर पूर्वोत्तर के चार राज्य असम, मणिपुर, मेघालय और नागालैंड में बीते अप्रैल में किये गये एक सर्वे का परिणाम जारी किया है, जिसमें दो ही सवाल थे- कितने लोग इसके पक्ष में हैं और कितने लोग इसके खिलाफ ? जिसमें करीब 80 फीसदी लोगों ने इस बिल का विरोध किया है. 

सर्वे के अनुसार:

असम में 23 फीसदी लोग इसके पक्ष में है , जबकि 70 फीसदी लोगों ने इस बिल का विरोध किया है. वहीं मणिपुर में 88 फीसदी लोगों ने इस विधेयक के खिलाफ मतदान किया है और केवल 9 फीसदी लोगों ने समर्थन किया है.

मेघालय में 74 फीसदी लोगों ने इस बिल का विरोध किया है 18 फीसदी लोगों ने समर्थन किया है. वहीं नागालैंड में 89 प्रतिशत लोगों ने इस विधेयक का विरोध किया है, केवल 9 फीसदी लोगों ने समर्थन किया है.

इतना विरोध के बाद भी इस विवादस्पद विधेयक को संसद में पारित करा कर कानून में तब्दील कर दिया गया है.

इधर आज दिल्ली के जंतर मंतर पर इस नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ अनिश्चितकालीन अनशन शुरू हो गया है.
वाम दल भी 19 दिसम्बर से इस कानून के खिलाफ आन्दोलन करने का एलान किया है.

अलीगढ, और जामिया यूनिवर्सिटी में कई दिनों से विरोध प्रदर्शन चल रहा है.

इधर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में इस विधेयक को चुनौती दी है. इससे पहले इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के चार सांसदों ने सुप्रीम कोर्ट में इस बिल के खिलाफ पहली याचिका दायर कर कहा है कि धर्म के आधार पर वर्गीकरण की संविधान इजाजत नहीं देता. ये बिल संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है, इसलिए इस विधेयक को रद्द किया जाए.

जन अधिकार पार्टी ने भी इस बिल को चुनौती दी है.

इस बिल के विरोध प्रदर्शन के दौरान असम में पुलिस की गोली से अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी हैं .


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