लखीमपुर: 32 सवालों के चक्रव्यूह में फंसा आशीष…नहीं दे पाया यह जवाब, गिरफ्तारी की पूरी कहानी!

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लखीमपुर खीरी के तिकुनिया हिंसा मामले में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा को शनिवार रात 10:50 बजे 12 घंटे की पूछताछ के बाद आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया। सरकार द्वारा गठित विशेष पर्यवेक्षण समिति के डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल ने पुलिस लाइन स्थित अपराध शाखा कार्यालय के बाहर आकर गिरफ्तारी की पुष्टि की। शुक्रवार को पेश न होने के बाद दूसरा नोटिस चस्पा कर शनिवार सुबह 11:00 बजे उसे बुलाया गया था। शनिवार की सुबह 10.40 बजे मंत्री पुत्र आशीष मिश्रा अपराध शाखा कार्यालय के सामने पेश हुआ। उधर, उसके समर्थक पिता के संसदीय कार्यालय के नीचे मौजूद थे और नारेबाज़ी कर रहे थे।

ऐसे हुई क्राइम ब्रांच में आशीष की एंट्री..

आशीष मिश्रा के साथ लखीमपुर सदर विधायक योगेश वर्मा, अजय मिश्रा टेनी के प्रतिनिधि अरविंद सिंह संजय और जितेंद्र सिंह जीतू पुलिस लाइन कार्यालय पहुंचे। डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल पहले से ही कार्यालय में मौजूद थे। क्राइम ब्रांच ऑफिस के बाहर खड़े मीडिया ने आशीष को देखा और उसका रिएक्शन लेने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस आशीष को लेकर क्राइम ब्रांच ऑफिस की ओर बढ़ गई। अपराध शाखा कार्यालय के अंदर से बैग देकर पिता मंत्री टेनी के प्रतिनिधि अरविंद सिंह संजय बाहर निकाल गए।

इस अफसरों ने भी की पूछताछ…

आशीष मिश्रा के हाज़िर होने के बाद एसपी विजय धूल, एडिशनल एसपी अरुण कुमार सिंह मौके पर पहुंचे। इसके अलावा पुलिस विशेष जांच समिति के सदस्य पीएसी जनरल सुनील सिंह, सीओ गोला संजय नाथ तिवारी आदि भी अपराध शाखा कार्यालय के अंदर गए। इसके बाद दरवाज़ा बंद कर पूछताछ शुरू हुई। आशीष मिश्रा से हो रही पूछताछ कई राउंड तक चली।

32 सवालों से घिरा मंत्री का आरोपी बेटा आशीष..

सूत्रों की मानें तो आशीष मिश्रा से बंद कमरे के अंदर करीब 32 सवाल पूछे गए। पूछताछ के दौरान आशीष मिश्रा बार-बार इस बात का सबूत दे रहा था कि वह मौके पर नहीं था। इस बात को साबित करने के लिए उसने कई वीडियो और शपथ पत्र प्रस्तुत किए। इसके बाद पुलिस की ओर से सवालों का चक्रव्यूह बढ़ गया। डीआईजी और पुलिस जांच कमेटी ने आशीष मिश्रा से हर वह सवाल पूछा, जिसका जवाब पुलिस तलाश रही थी। कई चरणों में चार-चार अधिकारियों ने आशीष से क्रॉस प्रश्न किये। l

दोपहर 2:36 से 3:30 तक कहां थे? नही दे पाया मंत्री पुत्र जवाब..

टीम में शामिल पुलिस अधिकारियों ने आशीष से तीखे सवाल किए, जांच टीम ने पूछा कि घटना के वक्त कहां थे? रूट डायवर्ट होने की सूचना के बावजूद उसी रास्ते पर क्यों गए? उस दिन मौके पर गए वाहनों में और कौन-कौन मौजूद था? उसे घटना के बारे में कब पता चला? इस घटना में कितने लोग मारे गए और उसे इस बारे में कब और कैसे पता चला? इस दौरान आशीष मिश्रा ने घटना वाले दिन अपने बनवीरपुर होने का तर्क दिया।

सूत्रों के मुताबिक, जब जांच टीम ने पूछा कि घटना वाले दिन वह 2:36 से 3:30 के बीच कहां थे, तो वह स्पष्ट जवाब नहीं दे पाया।पुलिस पूछताछ में सबसे अहम बात यह रही कि घटना के वक्त आशीष कहां था। आशीष की ओर से कई वीडियो सबूत दिए गए, लेकिन वह घटना के वक्त कहीं और होने का सबूत नहीं दे सके। घटना वाले दिन दोपहर 2:36 से 3:30 बजे तक कोई लोकेशन नहीं मिल पाई। पुलिस ने हर एंगल से पूछताछ की, जिसको लेकर तमाम सवाल और आशंका सामने आ रहे थे।

थार के बारे में पूछताछ तो आशीष का यह रहा जवाब…

सूत्र के मुताबिक, आशीष हर सवाल के जवाब में सिर्फ यह साबित करने की कोशिश कर रहा था कि वह घटना वाली जगह पर मौजूद नहीं था। पुलिस जांच दल ने उससे उसकी कार थार के बारे में भी पूछताछ की। आशीष मिश्रा ने यह साबित करने की कोशिश की कि वह उनकी कार में मौजूद नहीं था। उन्होंने कुछ लोगों के बारे में बताया जो कारों के काफिले के साथ उनके गांव से निकले थे। ये लोग उपमुख्यमंत्री की अगवानी करने जा रहे थे तभी यह घटना हो गई।

आशीष को इस कारण किया गया गिरफ्तार..

पूछताछ के बाद रात करीब 11 बजे आशीष को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद क्राइम ब्रांच कार्यालय में ही करीब एक घंटे तक मेडिकल जांच कराने के बाद रात 12 बजे के बाद सीजेएम को दीक्षा भारती की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने आशीष को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। डीआईजी उपेंद्र अग्रवाल के मुताबिक, आशीष को जांच में सहयोग नहीं करने और सही जवाब नहीं देने के कारण गिरफ्तार किया गया है। वहीं, पुलिस कस्टडी की मांग वाली अर्जी पर सोमवार को सुनवाई होगी।


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