संसद में प्रवेश पर रोक के खिलाफ पत्रकारों ने प्रेस क्लब से संसद तक निकाला मार्च! 

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संसद सत्र के दौरान पत्रकारों के प्रवेश पर रोक के खिलाफ सरकार पर पत्रकारों का गुस्सा फूटा रहा है। आज देश के प्रसिद्ध संपादकों, सैकड़ों पत्रकारों और फोटो जर्नलिस्टों ने प्रेस क्लब से संसद भवन तक सरकार के तानाशाही रवैये के खिलाफ मार्च निकाला। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी के बाद आज पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने भी पत्रकारों का समर्थन किया है। उन्होंने इस बारे में राष्ट्रपति को पत्र भी लिखा और संसद में मीडिया की एंट्री से बैन हटाने की मांग की है। पत्रकारों ने मांग की है कि स्थायी पास वाले पत्रकारों को संसद परिसर और राज्यसभा और लोकसभा की प्रेस दीर्घाओं में प्रवेश करने की अनुमति दी जानी चाहिए ताकि वे सदन की कार्यवाही को पहले की तरह नियमित रूप से कवर कर सकें।

किसान आंदोलन जैसे पत्रकारों का आंदोलन शुरू करने का आह्वान..

मार्च से पहले पत्रकारों ने प्रेस क्लब के अंदर एक सम्मेलन भी किया, जिसमें प्रेस एसोसिएशन के अध्यक्ष जयशंकर गुप्ता, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के महासचिव संजय कपूर, वरिष्ठ पत्रकार सतीश जैकब, राजदीप सरदेसाई, आशुतोष, अध्यक्ष प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, उमाकांत लखेड़ा, महासचिव विनय कुमार, भारतीय महिला प्रेस कोर की विनीता पांडे, दिल्ली पत्रकार संघ के एसके पांडेय ने सरकार के इस रवैये की तीखी आलोचना की और किसान आंदोलन जैसे पत्रकारों का आंदोलन शुरू करने का आह्वान किया।

सरकार ने प्रतिबंध लगाया ताकि सरकार विरोधी  खबरें न आए..

दरअसल, सरकार ने कोविड नियमों का हवाला देते हुए पत्रकारों के संसद में प्रवेश पर रोक लगा दी है। इसपर वक्ताओं ने कहा कि संसद में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक इसलिए लगाई जा रही है, ताकि विपक्ष की खबर न आए और सिर्फ सरकारी खबरें आए। पत्रकारों ने कहा है कि जुलाई में लोकसभा अध्यक्ष ने तय किया था कि संसद में स्थायी पास धारकों को कवर करने के लिए पत्रकार पहले की तरह लंबे यात्री बनेंगे, उस निर्णय को लागू किया जाना चाहिए। वहीं, संसद के सेंट्रल हॉल के ‘पास’ बनने पर लगी रोक को हटाते हुए पहले की तरह नए पास बनाए जाएं।

सिनेमा हॉल, रेस्टोरेंट, मॉल खोले हैं पत्रकारों पर पाबंदी क्यों?

वक्ताओं का कहना है कि सरकार ने सेंट्रल हॉल का पास बंद कर दिया ताकि पत्रकार सांसदों और नेताओं से न मिल सकें और सरकार विरोधी खबरें कवर न कर सकें। पत्रकारों को पहले की तरह संसद में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है, जबकि सांसद और संसद के कर्मचारी आ रहे हैं। एक तरफ सरकार ने सिनेमा हॉल, रेस्टोरेंट, मॉल खोले हैं तो दूसरी तरफ पत्रकारों पर पाबंदी क्यों? अगर चुनिंदा पत्रकार कोरोना टेस्ट करवाकर जा रहे हैं तो सभी क्यों नहीं जा सकते।

संसद में प्रवेश की लड़ाई नहीं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व लोकतंत्र की लड़ाई..

बता दें कि सरकार पहले ही PTI, UNI की सेवा बंद कर चुकी है। यह केवल आधिकारिक समाचार चाहती है। इसलिए पत्रकारों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इतना ही नहीं, प्रेस सूचना कार्यालय द्वारा पत्रकारों के कार्ड का नवीनीकरण नहीं किया जा रहा है। पत्रकारों का कहना है उनके प्रवेश पर प्रतिबंध के कारण उनकी नौकरी और सेवाएं भी प्रभावित होंगी। पत्रकारों ने कहा कि यह सिर्फ संसद में प्रवेश की लड़ाई नहीं है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र की लड़ाई है।


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