दिल्ली के आंकड़ों में डरावनी वृद्धि, भारत चौथा सर्वाधिक कोरोना प्रभावित देश बना

मयंक सक्सेना मयंक सक्सेना
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11 जून, 2020 को दिल्ली में अब तक के सबसे बुरे हाल और सबसे ज़्यादा नए कोरोना संक्रमण मामलों – 1,877 के साथ – देश का कोरोना संक्रमण का आंकड़ा, लगातार दूसरे दिन 11,000 के पार पहुंच गया। नए कोरोना आंकड़ों के साथ अब भारत, यूके से भी ऊपर चला गया है और दुनिया में चौथा सर्वाधिक कोरोना प्रभावित देश बन गया है। 11 जून के आंकड़ों मे मुताबिक, देश में कुल 11,128 नए संक्रमण के मामले आए। हैरानी का सबब बने हुए, रिकवरी के मामले बढ़ते जा रहे हैं और 1,46,972 हो गए हैं और एक्टिव मामले केवल 1,42,795 रह गए हैं। इन पर हम आगे बात करेंगे, लेकिन पहले बात दिल्ली की…

दिल्ली के आंकड़ों में से कुछ डरावना झांक रहा है

देश की राजधानी दिल्ली के कोरोना संक्रमण के आंकड़े जिस तरह बढ़ रहे हैं, वो तो डराने वाला है ही। लेकिन इससे ज़्यादा भयावह तथ्य आपको इन आंकड़ों को गणित की भाषा में पढ़ने पर मिलेंगे। ये तथ्य ये बताते हैं कि दिल्ली में कोरोना के नए संक्रमण सिर्फ बढ़ नहीं रहे हैं, बल्कि उनकी तादाद में इज़ाफ़ा किसी नियत गति से नहीं हो रहा है। दिल्ली के आंकड़े बहुत तेज़ी से बढ़ रहे हैं और उसका प्रतिशत भी किसी नियत गणितीय सूत्र का पालन नहीं कर रहा है। 

इसको समझने के लिए हमको पिछले एक हफ्ते के दिल्ली के कोरोना संक्रमण के नए मामलों का अध्ययन करना पड़ेगा। पिछले 1 हफ्ते के ही दिल्ली के कोरोना मामलों को उठा लें, तो पहली बात तो ये समझ में आती है कि दिल्ली में कोरोना संक्रमण के जिन बुरे हालात की सरकार बात कर रही है – उसके हिसाब से दिल्ली में टेस्ट्स की संख्या काफी कम है। ये संख्या पिछले 1 सप्ताह में अधिकतम 5,464 टेस्ट्स की रही है – जो कि 10 जून को थे।

दिल्ली में पिछले 1 सप्ताह के टेस्ट् प्रति दिन

लेकिन ज़्यादा अजीब बात, टेस्ट्स की संख्या और नए संक्रमण की संख्या के किसी सीधे अनुपात में न होना भी है। ऐसा नहीं है कि दिल्ली में पिछले एक सप्ताह में टेस्ट्स के कम होने या अधिक होने के मुताबिक या उसके सीधे अनुपात में ही नए मामले भी बढ़े या घटे हों। पिछले 1 सप्ताह के डेटा के मुताबिक, दिल्ली में नए टेस्ट्स के डेटा से नए मामलों के डेटा का मिलान, बड़े हैरान करने वाले नतीजे दिखा रहा है।

दिल्ली में नए टेस्ट्स, नए मामले और उनका अंतर

उदाहरण के लिए हम अगर केवल 3 दिनों के आंकड़े उठाएं, जो कि 7 से 9 जून, 2020 तक के हैं – तो इस आंकड़े को ही समझ कर हम देख सकते हैं कि दिल्ली के आंकड़ों में क्या दिक्कत दिखती है। 7 जून को दिल्ली में 5,042 टेस्ट हुए और 1,282 नए मामले सामने आए। लेकिन ठीक अगले ही दिन, दिल्ली में 1,342 कम टेस्ट हुए – जबकि इन यानी कि केवल 3,700 मामलों में भी 1,007 मामले सामने आ गए। इसके अगले ही दिन, 5,464 टेस्ट होते हैं और नए मामले 1,366 हो जाते हैं। इसको टेस्ट्स की संख्या के घटने या बढ़ने की संख्या के हिसाब से देखेंगे तो ये साफ होगा कि टेस्ट्स के कम होने या ज़्यादा होने से, नए मामलों की संख्या के प्रतिशत में उसी अनुपात में कमी या बढ़ोत्तरी नहीं हो रही है।

दिल्ली में टेस्ट्स की संख्या और मामलों की संख्या का अनुपात

यानी कि दिल्ली में नए मामले, टेस्ट्स की संख्या के किसी तय अनुपात में नहीं मिल रहे हैं। इसका दो अर्थ हो सकते हैं – पहला ये कि जिन इलाकों से नए मामले आ रहे हैं, वहां संक्रमण अनियंत्रित स्थिति में है और दूसरा ये कि सिर्फ उन्हीं लोगों के टेस्ट किए जा रहे हैं, जिनके संक्रमण होने की संभावना सबसे अधिक हो। एक तीसरी स्थिति भी हो सकती है, लेकिन वह किसी कॉंसिपेरेसी थिअरी में मानी जाएगी और वो ये है कि पुराना डेटा, इस नए डेटा में एडजस्ट किया जा रहा हो। ये हम नहीं कह रहे कि ऐसा होगा, लेकिन दिल्ली के डेटा का विश्लेषण, ये ही बताता है कि सिर्फ तीन ही परिस्थितियां सबसे अधिक सामने आ रही हैं।

क्या दिल्ली में कोरोना के नए मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं?

हां, अगर दिल्ली सरकार के डेटा को सच मानें, तो ऐसा हो रहा है। पिछले 7 दिनों के आंकड़ों को ही देखें, तो पहले टेस्ट्स की संख्या पर्याप्त नहीं है। ऐसे में दिल्ली के नए मामलों की तुलना टेस्ट्स की संख्या से करें, तो इस पूरे सप्ताह के आंकड़े कभी भी टेस्ट्स की संख्या के 25 फीसदी से कम ही नहीं हुए। इस लिहाज से किसी भी राज्य में, कुल टेस्ट्स में मामलों का कुल प्रतिशत, इतना डराने वाला नहीं है।

तारीख टेस्ट नए मामले प्रतिशत
5 जून 5,187 1320 25.44823597
6 जून 5,180 1282 25.48262548
7 जून 5,042 1007 25.42641809
8 जून 3,700 1,366 27.21621622
9 जून 5,464 1,501 25
10 जून 5,077 1,877 29.56470357

(इस सारणी में जिस तारीख के टेस्ट्स हैं, नए मामले उसके एक दिन बाद के इस्तेमाल किए गए हैं – जो सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों पर आधारित है)

ऐसे में ज़ाहिर है कि दिल्ली के लिए कोरोना का असल कहर, अब शुरु होता दिख रहा है। हालांकि ये भी हो सकता है कि लंबे समय से संक्रमण का ये खेल चल रहा हो और कम टेस्ट्स और ट्रेसिंग के न होने के कारण – ये स्थिति आ गई हो। जो भी हो, इसमें सरकार और ख़ासकर दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री को ये जवाब देना होगा कि अगर दिल्ली कम्युनिटी संक्रमण की स्थिति से आगे जा चुका है, तो ये स्थिति आख़िर आने किसने दी और टेस्ट्स और ट्रेसिंग समय रहते क्यों नहीं की गई।


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