‘सरदार खालिस्तानी, हम पाकिस्तानी, क्या सिर्फ बीजेपी हिंदुस्तानी’: महबूबा मुफ्ती

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जम्मू कश्मीर की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर से केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए तीखा हमला बोला है। मुफ्ती ने केंद्र की भाजपा सरकार पर हिंदू और मुसलमानों को आपस में बाटने का आरोप लगाया और कहा कि केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर को सिर्फ प्रयोगशाला बना रखा है। उन्होंने कहा कि अब सरदार खालिस्तानी हो गए हैं, हम पाकिस्तानी हो गए हैं, यहां सिर्फ बीजेपी ही हिंदुस्तानी रह गई है।

केवल हिंदू और मुसलमानों के बीच बंटवारा कर रही है BJP..

महबूबा मुफ्ती ने जवाहर लाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र करते हुए कहा कि नेहरू और वाजपेयी जैसे नेताओं के पास जम्मू-कश्मीर के लिए एक विजन था। आगे उन्होंने बीजेपी पर हमला करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार जम्मू कश्मीर का भला करने में हर तरह से नाकाम रही है। मुफ्ती ने केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अब सरदारों को खालिस्तानी कहा जा रहा है। हमें पाकिस्तानी कहा जा रहा है। तो क्या भारतीय जनता पार्टी हिंदुस्तानी रह गई है? पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केवल हिंदुओं और मुसलमानों के बीच बंटवारा कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बैठे लोग जम्मू-कश्मीर का उपायों केवल प्रयोगशाला की तरह कर रहे हैं। केंद्र सरकार यहां सिर्फ प्रयोग ही कर रही है।

मुफ्ती ने ‘परिसीमन प्रक्रिया’ पर उठाए सवाल..

आपको बता दें, कि जम्मू कश्मीर को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 जून को एक अहम बैठक की थी। इस बैठक में कहा गया था कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए चुनाव का होना जरूरी है और अगर चुनाव होना है तो उसके लिए ‘परिसीमन प्रक्रिया’ का जल्द पूरा होना ज्यादा जरूरी है। अब मुफ्ती ने राज्य में चल रही परिसीमन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और कहा कि केंद्र सरकार सिर्फ नाम बदल रही है। उन्होंने सिर्फ शहीदों के नाम पर स्कूलों का नाम रखा है, लेकिन नाम बदलने से बच्चों को रोज़गार नहीं मिलेगा। मुफ्ती ने कहा कि केंद्र सरकार तालिबान की बात कर रही है। वह अफगानिस्तान के बारे में बात कर रही है, लेकिन उसके पास किसानों या बेरोज़गारो के बारे में बात करने के लिए पर्याप्त समय नहीं है।

परिसीमन क्या है?

परिसीमन का सामान्य अर्थ किसी राज्य/संघ राज्य में विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए निर्वाचन क्षेत्र का निर्धारण करना है। इस प्रक्रिया में लोकसभा या विधान सभा की सीटों की सीमाओं को फिर से निर्धारित किया जाता है। आसान शब्दों में कहें तो जनसंख्या के बदलते स्वरूप को देखते हुए परिसीमन लोगों के प्रतिनिधि को पुनर्गठित करने की एक प्रक्रिया है। परिसीमन चुनाव प्रक्रिया को और अधिक लोकतांत्रिक बनाने का एक तरीका है। समय के साथ जनसंख्या परिवर्तन के बावजूद सभी नागरिकों के लिए समान प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किया जाता है। अनुसूचित वर्ग के लोगों के हितों की रक्षा के लिए आरक्षित सीटों का निर्धारण भी परिसीमन की प्रक्रिया द्वारा किया जाता है।

दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 जून को जम्मू और कश्मीर के राजनैतिक दलों के दिग्गज नेताओं के साथ जो अहम बैठक की थी, उससे इस बात की चर्चाएं शुरू हो गई थीं कि जम्मू और कश्मीर में पहले परिसीमन की प्रक्रिया होगी, फिर चुनाव कराए जाएंगे। चुनाव के बाद जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया जा सकता है। मुफ्ती ने राज्य में चल रही इसी परिसीमन प्रक्रिया पर सवाल उठाए और कहा कि केंद्र सरकार सिर्फ नाम बदल रही है।

 


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