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बापू के पुतले को गोली मारकर जश्न मनाया हिंदू महासभा ने,गोडसे की जय-जयकार!

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गाँधी के हत्यारे इतने निर्भय कभी नहीं थे, जितने मोदी-योगी राज में नज़र आ रहे हैं। आज राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि है। पूरा देश ‘शहीद दिवस’ मना रहा है। पर अलीगढ़ में हिंदू महासभा ने महात्मा गाँधी के पुतले को नकली पिस्तौल से हत्या की और मिठाई बाँटी। आज़ाद भारत के प्रथम आतंकवादी हत्यारे नाथूराम गोडसे की प्रतिमा पर माला-फूल तो चढ़ाया ही गया। देश का ‘शहीद दिवस’ हिंदू महासभा का ‘शौर्य दिवस’ था।

सोशल मीडिया में वायरल तस्वीर में हिंदू महासभा की नेता पूजा शकुन पाँडेय बापू के पुतले को नकली पिस्तौल से गोली मारती नज़र आ रही हैं। ख़बरों के मुताबिक इस कार्यक्रम को बाक़ायदा रंगीन बनाया गया। जब गाँधी के पुतले को गोली लगी तो सीने से लाल रंग भी निकला। यह बताता है कि इन लोगों में गाँधी के प्रति कितना ज़हर भरा हुआ है।

इस मौक़े पर पूजा शकुन पांडेय ने कहा कि गोडसे भगवान कृष्ण के अवतार थे। अगर गाँधी जीवित रहते तो भारत का एक और विभाजन होता।

इस कार्यक्रम का एक वीडियो इकोनामिक टाइम्स ने भी ट्विटर पर डाला है-

वैसे, हिंदू महासभा की राष्ट्रीय महासचिव कही जा रही हैं पूजा शकुन पांडेय वही हैं जिन्होंने पिछली बकरीद पर बकरा काटने के खिलाफ़ अभियान चलाया था। उनके दिल में करुणा का ऐसा लावा फूटा था कि इको फ्रैंडली बकरीद मनाने का आह्वान कर रही थीं। पर गाँधी की हैसियत उनकी नज़र में शायद बकरे जितनी भी नहीं है।

वैसे, जब गाँधी जी की हत्या हुई थी तब भी आरएसएस और हिंदू महासभा के लोगों ने मिठाई बाँटकर जश्न मनाया था। सरदार पटेल ने इस संबंध में लिखा भी था। लेकिन कार्रवाई के डर से और गाँधी की शहादत से बने माहौल के बाद ये संगठन चुप हो गए। आरएसएस ने तो गाँधी को प्रात:स्मरणीय बता दिया। आज भी प्रधानमंत्री मोदी दुनिया भर में गाँधी की माला जपते रहते हैं। लेकिन उनके राज में हिंदू महासभा के लोग खुलेआम गोडसे का महिमामंडन करते हुए गाँधी के ख़िलाफ़ विषवमन करते हैं। उन्हें पता है कि मोदी-योगी राज में उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं होगी। आख़िर मोदी जी, हिंदू महासभा के सिद्धांतकार और महात्मा गाँधी की हत्या की योजना बनाने वाले विनायक दामोदर सावरकर के अनुयायी हैं यौर योगी आदित्यनाथ जिस मठ के महंत हैं, वहीं से गांधी के हत्यारों को पिस्तौल मुहैया कराई गई थी। महंत दिग्विजयनाथ भी आरोपियों में थे।

ये हैं मोदीयुग के ‘राष्ट्रभक्त’। बाक़ी ‘देशद्रोही’ सब जेएनयू में बसते हैं जो हत्यारों से हर मोर्चे पर भिड़ते हैं।

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