बिना आधार गुंडा एक्ट के तहत नोटिस भेजने पर हाईकोर्ट नाराज़, कहा- यह अफ़सरों का शरारती कदम..

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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुंडा एक्ट की कार्यवाही में अधिकारियों की मनमानी पर कड़ी नाराजगी जताई है। मनला  वैवाहिक विवाद में दर्ज मामले में आरोपी को गुंडा एक्ट के तहत नोटिस जारी करने करने का है। जिसपर अदालत ने इस तरह की कार्यवाही की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए राज्य सरकार से जवाब मांगा है।

पूरा मामला…

दरअसल, जस्टिस एसपी केसरवानी और जस्टिस पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ सोनभद्र के शिव प्रसाद गुप्ता की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में अपर जिला अधिकारी सोनभद्र द्वारा याचिकाकर्ता को जारी गुंडा एक्ट की धारा 2(बी) के नोटिस को चुनौती दी गई थी।  यह पूरा मामला वैवाहिक विवाद में दर्ज केस में आरोपी को गुंडा एक्ट के तहत नोटिस जारी करने का है इसपर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि बिना किसी आधार के गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई का नोटिस जारी करना अधिकारियों का प्रथम दृष्टया शरारती कदम है।

आरोपी पर पत्नी ने दहेज प्रताड़ना का केस कराया था..

बता दें की याचिकाकर्ता के खिलाफ उसकी पत्नी ने दहेज प्रताड़ना, मारपीट व धमकी देने का मामला दर्ज कराया है।  लेकिन इस मामले को आधार बनाते हुए जिला प्रशासन सोनभद्र ने याचिकाकर्ता को गुंडा एक्ट के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस गुंडा एक्ट धारा के नोटिस तो ही चुनौती दी गई। पीठ ने कहा कि नोटिस में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जो गुंडा एक्ट की धारा 2बी के तहत मामला बनाता हो। ऐसा प्रतीत होता है कि नोटिस बिना अधिकार-क्षेत्र (Jurisdiction)  के जारी किया गया है।

अधिकारियों ने वैवाहिक विवादों में भी अब गुंडा एक्ट लगाना किया शुरू: HC

हाई कोर्ट ने मामले पर नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा कि अब अधिकारियों ने वैवाहिक विवादों में भी गुंडा एक्ट के तहत नोटिस जारी करना शुरू कर दिया है। आगे पीठ ने कहा की यह प्रथम दृष्टया अधिकारियों का एक शरारती कदम है। इसी तरह के एक अन्य मामले में भी जब कोर्ट ने कारण बताओ नोटिस जारी किया तो अधिकारियों ने मामला वापस ले लिया। अदालत ने राज्य सरकार को इस मामले में उठाए गए कदमों के ब्योरे के साथ एक हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है और कार्यवाही की पुनरावृत्ति को रोक लगाने के लिए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। इस मामले पर अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी।

क्या होता है गुंडा एक्ट?

गुंडा एक्ट के तहत विधेयक में मानव तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, गोहत्या, बंधुआ मजदूरी और पशु तस्करी पर कड़ाई से रोक लगाने का प्रावधान है। इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति जाली नोट, नकली दवाओं का व्यापार, अवैध हथियारों का निर्माण और व्यापार, अवैध खनन जैसे अपराधों को अंजाम देता है तो इसमें गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।


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