हरियाणा सरकार, किसानों को फायदा पहुंचाना चाहती है कि निजी बैंकों को?

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सरकारी बैंकों और उनके भविष्य का दावा करने वाली केंद्र की सरकार में नेतृत्वकारी पार्टी की ही हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने किसानों को मदद पहुंचाने के अपने पहले ही कदम में, शक के ऐसे गुबार उड़ा दिए हैं – जिनके छंटने तक न जाने क्या हो चुका होगा। इस रबी ख़रीद सीजन में हरियाणा सरकार ने आढ़तियों के माध्यम से किसानों को अदायगी करने के लिए सभी सरकारी बैंकों को किनारे हटाते हुए, आढ़तियों को प्राइवेट बैंकों में खाता खुलवाने का निर्देश दिया है। ये आदेश अपने आप में शक़ के पूरी तरह क़ाबिल है और इसके बाद किसान संगठनों और विपक्षी दलों ने हरियाणा सरकार के इस फ़ैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ये सवाल भी समझेंगे लेकिन पहले ये समझ लेते हैं कि इस चिट्ठी में क्या लिखा है। हरियाणा के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता विभाग की तरफ़ से जारी एक पत्र में बताया गया है कि इस बार आढ़तियों को फ़सल अदायगी सीधा बैंक अकाउंट में की जाएगी और सरकार ने उसके लिए सात बैंक चुने हैं, जिनमें कोई भी सरकारी बैंक नहीं है। ये एच.डी.एफसी, आई.सी.आई.सी.आई., कोटक महिंद्रा, इंडसइंड, एस बैंक, आई.डी.बी.आई. और स्टैण्डर्ड चार्टर्ड  बैंक हैं।

बंद होने की क़गार पर खड़ा, यस बैंक भी  उन 7 बैंकों में से एक है, जिनमें हरियाणा सरकार किसानों को मदद के लिए ख़ाता खुलवाने को कह रही है।

खाता खुलवाकर, कैश लिमिट मंजूर करवाने में समय लग सकता है 

हरियाणा के मुख्मंत्री मनोहर लाल खट्टर

दरअसल इस बात पर हैरानी और फिर शक़ होना चाहिए कि विभाग द्वारा लिखे पत्र में एक भी सरकारी बैंक नहीं है। साथ ही जिस यस बैंक का नाम दिया गया है वो पहले से ही अस्तित्व के संकट से जूझ रहा है। फ़िर भी यस बैंक का इस लिस्ट में होना, हरियाणा सरकार की मंशा पर और भी कई सवाल खड़े करता है। सरकार द्वारा खाता खुलवाने की समय सीमा 20 अप्रैल तक है। सरकार की तरफ़ से कहा गया है कि इन सात बैंकों में से किसी एक में ही खाता खुलवाना अनिवार्य है। जबकि सभी आढ़तियों के पहले से ही बैंकों में खाते हैं और कैश लिमिट भी मंजूर है। 13 अप्रैल को आढ़तियों और सरकार के बीच सहमति होने बाद 16 अप्रैल को प्राइवेट बैंकों में खाता खुलवाने के फ़ैसले से आढ़तियों को समझ नहीं आ रहा है कि देश में चल रहे लॉकडाउन की वजह से वो खाता खुलवाने के साथ ही कैश लिमिट कब तक मंजूर करवा पाएंगे? बता दें कि हरियाणा सरकार की आढ़तियों से बात हुई थी कि खरीद एजेंसियों से रकम आने के बाद किसान द्वारा उससे ली गयी राशि या ऋण की रकम काट कर बची हुई राशि 3 दिन के भीतर किसानों के खाते में भेजनी होगी। साथ ही आढ़ती निर्धारित फार्म में किसानों से सहमित लेकर ही रकम काट सकेंगे। आढ़तियों द्वारा ये फार्म संबंधित मंडी सचिव को जमा करना होगा। आढ़ती एसोसिएशन हरियाणा की तरफ़ से कहा गया है कि आढ़तियों के साथ सहमति होने के बाद भी समझौते से पीछे हटना ठीक नहीं है। सरकार की वजह से हम गेंहू सीजन का बहिष्कार करके हड़ताल करने को मजबूर होंगे।

कांग्रेस और भारतीय किसान यूनियन हरियाणा ने जताया विरोध

हरियाणा सरकार के इस फ़ैसले पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकार ने डूबते हुए यस बैंक को इस सूची में शामिल किया है। इसके पीछे क्या कारण है? आढ़तियों की सरकारी व दूसरे बैंकों में सालों से चल रहे खातों में बैंक लिमिट्स हैं। अब उन खातों का क्या होगा और नए खातों में बैंक लिमिट कैसे मिल पाएगी। सरकार को अपना यह फैसला तुरंत वापस लेना चाहिए। इसी तरह भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के प्रवक्ता राकेश बैंस का कहना है कि सरकार द्वारा निजी बैंकों का चयन किया गया है। प्रदेश में बहुत ऐसे कस्बें हैं जहाँ इन बैंकों की शाखाएं नहीं हैं। इससे किसानों और आढ़तियों को परेशानी होगी। सरकार को पीएनबी या एसबीआई जैसे बैंकों के साथ अनुबंध करना चाहिए था।

इसी तरह किसान बीमा योजना के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियां चुनी गयीं थीं। ये योजना किसानों को लाभ कम और आर्थिक व् मानसिक नुकसान अधिक पहुंचा रहीं थीं। किसानों से पूछे बिना ही कई बार किसानों के पैसे कट जाने के साथ ही क्लेम लेने के लिए भी किसानों को प्रदर्शन तक करना पड़ा।

किसान के लिए, सरकारी की जगह प्राइवेट बैंक?

आइए समझते हैं कि हरियाणा सरकार ने जिन बैंकों में आढ़तियों को ख़ाते खुलवाने का निर्देश दिया है, वे कौन से बैंक हैं।

एचडीएफसी बैंक – एचडीएफसी ने हाल ही में डूबते हुए, यस बैंक को उबारने के लिए उसमें निवेश किया है। जनवरी, 2020 में ही रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने एचडीएफसी पर 39 करेंट अकाउंट्स की अवैध गतिविधियों को लेकर जुर्माना लगाया था। इसके अलावा दुबई के मशरेक़ बैंक और एल्टिको कैपिटल ने रिज़र्व बैंक के पास एचडीएफसी बैंक द्वारा एक्सटर्नल कॉमर्शियल बाइंग के ज़रिए हासिल किए गए फंड्स को लेकर, नियमों के उल्लंघन की शिकायत दर्ज कराई है। 

आईसीआईसीआई बैंक – अक्टूबर, 2018 में ही बैंक की लंबे समय से एमडी और सीईओ रही चंदा कोचर ने भ्रष्टाचार के आरोपों में इस्तीफ़ा दिया। जनवरी, 2019 में जांच की रिपोर्ट आई और उनको उनके पद से बर्खास्त किया गया। कोबरा पोस्ट के एक स्टिंग ऑपरेशन में आईसीआईसीआई बैंक के कर्मचारियों–अधिकारियों ने मनी लांडरिंग के खुलासे किए थे। इसके अलावा बैंक पर लोन रिकवरी के लिए अमानवीय बर्ताव के आरोप भी लगे हैं और बैंक को भारी हर्जाने भी देने पड़े हैं। 

कोटक महिंद्रा – भारतीय बैंकर उदय कोटक द्वारा स्थापित एक निजी बैंक, जिसने बाद में आईएनजी वैस्या बैंक का अधिग्रहण किया। आईएनजी वैस्या का मालिकाना हक़ रखने वाली डच बैंकिंग संस्था आईएनजी ने अपने ऊपर लगे मनी लांडरिंग के आरोपों के चलते, सितंबर 2018 में 775 मिलियन यूरो का हर्जाना दिया। 

इंडसइंड बैंक – दिलचस्प ये है कि इस बैंक का मालिक बोफोर्स मामले में भ्रष्टाचार के लिए चर्चा में आया, हिंदुजा समूह है। इस बैंक को भी लाइसेंस उदारीकरण के दौर में 1994 में मिला। इंडसइंड बैंक पर न केवल 2017 में आरबीआई ने 3 करोड़ का जुर्माना लगाया था, हाल ही में अप्रैल, 2020 में आए आंकड़ों के मुताबिक इस बैंक का डिपॉज़िटर आंकड़ा 7 फीसदी घट गया है। इसी हिंदुजा समूह का एक बैंक स्विस बैंक के तौर पर भी काम करता है। जिसका मुख्यालय स्विट्ज़लैंड में ही है – जिसे टैक्स हेवेन माना जाता है। 

यस बैंक – हाल ही में यस बैंक की वित्तीय अनियमितताओं और उसके बड़े लेनदारों के पैसा न चुकाने के चलते ये बैंक, बंद होने की क़गार पर है। इसके ख़ाताधारकों को बंद एटीएम और ब्रांचों के बाहर देखा गया। बैंक के भविष्य के बारे में कुछ भी ठीक से पता नहीं है। 

आई.डी.बी.आई. बैंक – 2019 में ही आरबीआई ने इस बैंक पर 2 करोड़ रुपए का जुर्माना, न केवल 2018 में सीबीआई ने बैंक से जुड़े कई लोगों पर फ्रॉड और घोटाले के केस दर्ज किए, बैंक की स्थिति इतनी खराब हो गई कि सरकार के निर्देश पर जीवन बीमा निगम ने इस बैंक में हज़ारों करोड़ का निवेश कर के, इसकी 51 फीसदी हिस्सेदारी हासिल कर ली। 

स्टैण्डर्ड चार्टर्ड  बैंक – ब्रिटिश मल्टीनेशनल बैंक, जिसे 9 अप्रैल, 2019 को सैंक्शन्ड प्रोग्राम्स वायलेशन के कारण ब्रिटिश और अमेरिकी सरकार को 1.1 बिलियन डॉलर का भुगतान करना पड़ा। 

हालांकि ये जानकारी देने का हमारा उद्देश्य किसी भी तरह सरकार या बैंकों की आगे की गतिविधि पर सवाल करना नहीं है, लेकिन हम ये सवाल ज़रूर करना चाहते हैं कि हरियाणा सरकार ने आने वाले आर्थिक संकट की निश्चितत को देखने और समझने के, निजी बैंकों के पिछले 5 साल के प्रदर्शन के और भविष्य में देशी इकॉनमी पर आने वाले ख़तरे के बावजूद, करोड़ों रुपए की ये रकम आखिर इन निजी बैंकों के ज़रिए ट्रांसफर करने का फैसला आख़िर क्यों लिया? इस के लिए नए ख़ाते खुलवाने तक की बेज़ा शर्त से संकोच नहीं किया और आख़िर इस कवायद का मकसद, किसानों को लाभ पहुंचाना है या फिर निजी बैंकों ?

आदर्श तिवारी के साथ मयंक सक्सेना की रिपोर्ट


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