हरिद्वार धर्म संसद: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र व उत्तराखंड सरकार को जारी किया नोटिस, 10 दिन बाद सुनवाई!

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हरिद्वार धर्म संसद में भड़काऊ भाषणों की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी किया है। साथ ही शीर्ष अदालत ने कहा कि वह मामले की सुनवाई 10 दिन बाद करेगी, क्योंकि ऐसे मामले पहले से ही लंबित हैं।

23 जनवरी को होने वाली धर्म संसद पर रोक लगाने की मांग..

दरअसल, पत्रकार कुर्बान अली और पटना हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस अंजना प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट में यह जनहित याचिका दायर की थी, जिस पर आज चीफ जस्टिस एनवी रमना और जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हेमा कोहली की बेंच ने सुनवाई की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल ने अलीगढ़ में 23 जनवरी को होने वाली धर्म संसद पर रोक लगाने की मांग की। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह इसके लिए राज्य सरकार को ज्ञापन दें।

बता दें कि कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा कि

इस तरह के अगले आयोजन की योजना अलीगढ़ में है। यदि जल्द कदम नहीं उठाए गए तो इन धर्म संसदों का आयोजन पूरे देश में किया जाएगा, ऊना में, डासना में। इससे पूरे देश का पर्यावरण प्रदूषित होगा। यह देश की प्रकृति के खिलाफ है, यह हिंसा को भड़काने वाला है।

10 दिन बाद होगी सुनवाई..

मामले की सुनवाई करते हुए SC की पीठ ने याचिकाकर्ताओं को भविष्य में धर्म संसद आयोजित करने के खिलाफ स्थानीय प्राधिकरण को प्रतिनिधित्व देने की अनुमति दी। वहीं, इस तरह के मामले पहले से ही लंबित होने का हवाला देते हुए कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई 10 दिन बाद करने को कहा है।

यह है मामला..

दरअसल, हाल ही में उत्तराखंड के हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में दिए गए भड़काऊ भाषण का एक वीडियो सामने आया था। इसके बाद से ही इस मामले को लेकर बवाल चल रहा है। धर्म संसद में मौजूद धर्मगुरुओं ने विवादित भाषण देते हुए कहा था कि धर्म की रक्षा के लिए हिंदुओं को हथियार उठाने की जरूरत है। साथ ही कहा गया था कि किसी भी सूरत में मुसलमान देश का प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहिए। इसके साथ ही मुस्लिम आबादी बढ़ने पर रोक और नरसंहार जैसी बातें कहीं गई थी।

 


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