बूढ़े माँ-बाप का हवाला देकर ज़मानत पाई, फिर डींग हाँकने लगा सुदर्शन चैनल का मालिक !



भड़काऊ अंदाज़ और आग लगाऊ भाषा के लिए पहचाने जाने वाले चैनल सुदर्शन न्यूज़ के मालिक सुरेश चह्वाण को पिछले दिनों गिरफ्तार कर लिया गया। संभल के अमनपसंद लोगों ने सुदर्शन न्यूज़ के खिलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी और मामला राज्यसभा में भी उठा था। गिरफ्तारी के बाद सुरेश चह्वाण ने गिड़गिड़ाते हुए संभल कोर्ट में बूढ़े माँ-बाप का हवाला देते हुए ज़मानत की गुहार लगाई। जमानत मिल गई।

दिलचस्प तो यह है कि उसके बाद सुदर्शन न्यूज़ और खुद सुरेश चह्वाण बता रहे हैं कि पुलिस ने अपनी गलती मान ली है और वे अपनी शर्त पर रिहा होकर आए हैं।

युवा पत्रकार मो.अनस ने इस मसले पर व्यंग्य करते हुए फ़ेसबुक पर जो लिखा है, उसे नीचे पढ़ सकते हैं..

सुदर्शन न्यूज़ चैनल के मालिक तथा संपादक सुरेश चव्हाणके खुद को प्रखर राष्ट्रवाद की एकमात्र आवाज़ बताया करते हैं। चैनल की टीआरपी बढ़ाने हेतु रात दिन देश के हिंदुओं को मुसलमानों के विरूद्ध भड़काने का कार्य करते हैं। कभी तलवार लेकर लहराते हैं तो कभी बंदूक की नोक आसमान की तरफ करके सीधे सादे देशवासियों के मन में भय व्याप्त कर देते हैं। मुट्ठी भर सांप्रदायिक और कट्टरपंथी जिन्हें देश के कानून और संविधान पर भरोसा नहीं वे इस गुंडे की भाषा और हावभाव से प्रभावित होकर इसे अपना हीरो बना बैठे हैं।

सुरेश टीवी पर खड़ा होकर चीख चीख कर कहता है कि प्रशासन और पुलिस उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। हाल ही में माननीय राज्यसभा सांसद Javed Ali Khan ने अपने गृह जनपद संभल में इस बलात्कारी संपादक द्वारा माहौल बिगाड़ने की मंशा पर राज्यसभा में आवाज़ उठाई। जावेद अली खान का साथ जेडीयू के शरद यादव तथा कांग्रेस के कई अन्य सांसदों ने दिया। सुरेश तो वैसे बनता बहादुर है। वह कहता फिरता है कि उसका कोई कुछ नहीं कर सकता परंतु राज्यसभा में आपत्ति दर्ज़ होते ही उसे लखनऊ एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया जाता है। गिरफ्तार होने के बाद वह सबसे कहता है कि मैं जमानत नहीं लूंगा। प्रशासन ने एक राष्ट्रभक्त चैनल के मालिक को पकड़ा है, यह प्रशासन की गलती है। वीर भोग्या वसुंधरा के इस महान लाल ने जमानत न लेने की कसमें खिलाई और खुद खाई। जो लोग इसे देखते हैं उनका खून खूब उबला।

लेकिन हक़ीकत तो कुछ और ही थी। सच्चाई तो यह थी तलवार निकाल कर पोज़ देने वाला सुरेश चव्हाणके जेल जाने के डर से जमानत अर्ज़ी दे चुका था। जमानत में इसने अपने बूढ़े माँ बाप का इस्तेमाल किया। मजिस्ट्रेट के सामने रोया, गिड़गिड़ाया। एक स्वयंभू राष्ट्रवादी जो देश के संविधान और कानून के प्रति लोगों में अविश्वास पैदा करता रहा वही कानून के कठघरे में आकर बौना बन जाता है। सुरेश चव्हाणके तो बाहुबलि है। क्या ज़रूरत थी जमानत लेने की। दो चार दिन जेल चले जाते तो क्या बिगड़ जाता? न जाने कितने कथित राष्ट्रभक्तों की उम्मीदों को सुरेश ने तोड़ डाला। न जाने कितने भारत माता के कथित वीर सुपुत्रों की भुजाएं सुरेश ने अपनी इस हरक़त से काट डाली। सुरेश, जमानत लेने के लिए माँ बाप का सहारा क्यों लिया आपने? क्यों नहीं लिखा जमानत अर्ज़ी में कि -माननीय न्यायाल मैं देश की सरहदों की रक्षा अपने चैनल पर बैठ कर करता हूं, मैं अफज़ल और कन्हैया गैंग को दिन रात गरियाता हूं, मैं सेक्यूलरों को सिकुलर कहता हूं, मुझे जमानत दीजिए क्योंकि मैं सच्चा देशभक्त हूं। मैं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फोटो अपने फेसबुक की कवर फोटो पर लगाता हूं, मुझे नरेंद्र मोदी बहुत पसंद हैं। आखिर क्यों नहीं दी वैसी दलीलें जैसी सुदर्शन चैनल पर बैठ कर दिया करते हो।

सुरेश चव्हाणके आपको जमानत नहीं लेनी चाहिए थी। बहुतों की उम्मीद आपने तोड़ दी। अब कोई कैसे सुदर्शन चैनल और आपकी बात पर यक़ीन करेगा? कैसे , सुरेश कैसे। टीवी देखने वालों के सामने शेर और प्रशासन के सामने बिल्ली। कैसे बन जाते हो सुरेश?


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