निष्पक्ष जांच में बाधा होने पर मामले को कठुआ से बाहर भेज दिया जाएगा: सुप्रीम कोर्ट



कठुआ मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट  ने कहा कि हमारी पहली प्राथमिकता मामले के “फेयर ट्रायल की है” यह न्यायिक एयर संवैधानिक चिंता है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो. अगर जम्मू-कश्मीर में ऐसा संभव नहीं है और मामले को थोड़े से हस्तक्षेप की संभावना पर केस को कहीं और शिफ्ट कर दिया जाएगा. चीफ जस्टिस ने मामले की निस्पक्ष सुनवाई का आश्वासन दिया.

तरुण अग्रवाल की अगुआई वाली बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) समिति के बाद टिप्पणी की, सुप्रीम कोर्ट में एक गोपनीय रिपोर्ट दायर की जिसमें कहा गया कि वकीलों के विरोध की मांग मामले में सीबीआई जांच “उचित” है। सीजेआई ने कहा कि बार काउंसिल क्या कहता है हमें इससे कोई लेना देना नहीं है, कोर्ट अगर इन टिप्पणियों पर ध्यान देता है, तो मामले से ध्यान भटक सकता है

मामले में न्याय की राह में वकीलों द्वारा कथित रूप से बाधा खड़ी करने के मुद्दे पर विचार करते हुए न्यायालय ने कहा कि अगर वे गलत पाये जाते हैं तो उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जायेगी। पीठ ने कहा कि सुनवाई ना सिर्फ आरोपी बल्कि पीड़ित परिवार के लिए भी निष्पक्ष होनी चाहिए तथा उनकी एवं उनके वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए।

 

 

 


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