संसद में लोहिया को लेकर बोला गया झूठ, पढ़िए 370 पर उनका भाषण



अनुच्छेद 370 को हटाने के नाम पर संसद के अंदर और बाहर, स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों को लेकर जैसे झूठ बोले गए, वह हैरान करने वाला है। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे हटाने को सरदार पटेल और आंबेडकर का सपना पूरा करना बता दिया। जबकि सरदार पटेल कश्मीर को सिरदर्द बताते हुए शुरूआत में इससे दूर रहना चाहते थे। बाद में अनुच्छेद 370 बनाने में उनकी प्रमुख भूमिका रही। वहीं आंबेडकर तो सीधे-सीधे जम्मू-कश्मीर को विभाजित कर हिंदू और बौद्ध बहुल इलाकों को भारत और मुस्लिम बहुल इलाके को पाकिस्तान को देने के हिमायती थे।

मोदी ने अपने वैचारिक प्रणेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी को ठीक याद किया लेकिन ये बताना भूल गए कि जिस संविधान सभा ने अनुच्छेद 370 को अनुमोदित किया, उसके वे सदस्य थे। उन्होंने केंद्र सरकार से इस्तीफा भी 370 की वजह से नहीं नहीं, नेहरू-लियाक़त पैक्ट (दिल्ली पैक्ट) के ख़िलाफ़ दिया था।

बहरहाल, सबसे ज़्यादा मज़ाक हुआ डॉ.राममनोहर लोहिया के नाम पर। संसद में बहस के दौरान अमित शाह ने इसे उनकी इच्छा बता डाली। दुनिया के एकमात्र मुलायमवादी नेता अमर सिंह ने भी बताया कि यह डॉ.लोहिया की माँग थी। हैरानी की बात ये है कि प्रो.रामगोपाल वर्मा जैसे पढ़े-लिखे माने जाने वाले समाजवादी पार्टी के सांसद वहीं मौजूद थे, लेकिन उन्होंने कोई विरोध नहीं किया। उधऱ राजनीति में अप्रासंगिक हो चले कांग्रेस के पूर्व महासचिव जनार्दन द्विवेदी को भी अच्छा मौका मिला। उन्हें अचानक याद आया कि डॉ.लोहिया उनके मेंटर थे जो अनुच्छेद 370 के हटाने के पक्ष में थे। गैरकांग्रेसवाद के प्रणेता डा.लोहिया उनके मेंटर है, यह कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने कभी ज़ाहिर नहीं होने दिया।

हद तो ये है कि डॉ.लोहिया इसी संसद में अनुच्छेद 370 पर हुई बहस में अपने विचार रख चुके थे। उन्होंने 370 हटाने की जगह भारत-पाक महासंघ बनाने की वकालत की थी। तारीख थी 11 सितंबर 1964। प्रकाशवीर शास्त्री ने अनुच्छेद 370 हटाने के लिए संशोधन प्रस्ताव पेश किया था। डॉ.लोहिया ने जो कहा वह हम नीचे, संसद में बहस की स्कैन कॉपी के रूप में रख रहे हैं ताकि कोई भ्रम नहीं रहे। डॉ.लोहिया का पूरा भाषण पढ़ सकते हैं।

 

 

 

 



 


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