‘बलि’ दे रहे हैं प्रभु, ताकि रेल-निजीकरण का यज्ञ पूरा हो सके !



मुज़फ़्फ़रनगर हादसे का हफ़्ता भर भी नहीं गुज़रा कि आज तड़के औरैया में क़ैफ़ियात एक्स्प्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। मानव रहित फाटक पर फँसे एक डंपर से टकराने के बाद ट्रेन के 12 डिब्बे पटरी से उतर गए। अभी तक की जानकारी के मुताबिक इस हादसे में 74 लोग घायल हुए हैं, जिसमें से 4 की हालत गंभीर बनी हुई है।

ग़ौरतलब है कि क्रासिंग मानव रहित थी। इसके पहले मुज़फ्फ़रनगर में तालमेल का ऐसा अभाव सामने आया कि उस पटरी पर ट्रेन भेज दी गई जहाँ मरम्मत का काम चल रहा था। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ट्विटर निवेदन पर किसी को दूध तो किसी को पानी भेजकर वाहवाही लूटते रहे, लेकिन बीते उनके रहते रेलवे की जैसी दुर्दशा हुई है, वह चिंतित करती है। रेल किराए में बेतहाशा वृद्धि और सुविधाओं में भारी कटौती, यह रेलवे की पहचान बन गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने सन 2014 के आखिर  में अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में एक डीजल लोकोमोटिव कार्यशाला में आयोजित कार्यक्रम  में कहा कि उन्होंने अपने बचपन का एक हिस्सा रेलों में गुजारा है, इसलिए उनका रेलवे से भावनात्मक संबंध है

जब यह स्टेटमेंट सुना था तो एकबारगी लगा था कि अब शायद रेलवे की हालत सुधर जाएगी, लेकिन पिछले तीन सालों पर हम नजर डालें तो घोर निराशा ही हाथ लगती है, रेलवे सरकार का रिपोर्ट कार्ड जाँचने का एक सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है,

रेलवे आज भी मांग और आपूर्ति पर खरा नहीं उतरा है। यात्री कन्फर्म बर्थ की बांट जोह रहे हैं। आम यात्री ट्रेन में खड़े होकर सफर करने, आरक्षित व अनारक्षित टिकट की जद्दो-जहद कर रहा है, जान हथेली पर रखकर यात्रा करने की भी मजबूरी है

रेलवे की नई योजना ना के बराबर ही है। पुरानी योजनाओं में बुलेट व सेमी हाई स्पीड ट्रेन को लेकर सिर्फ बड़ी बड़ी बातें की गयी हैं, लेकिन अन्य ट्रेन की तरह बुलेट ट्रेन योजना भी पटरी से उतर गयी हैं। ट्रेन में खान-पान को लेकर भी यात्री संतुष्ट नहीं हैं। स्टेशनों पर विश्रामगृह में कमी अभी भी यात्रियों को परेशान करती है। सीधे तौर पर यात्रा दर में वृद्घि नहीं कर फ्यूल एडजस्टमेंट कॉम्पोनेंट, सर्विस टैक्स, कृषि व स्वच्छता टैक्स लगाकर वृद्घि कर दी गयी हैं वहीं प्रीमियम ट्रेनों के में फ्लैक्सी फेयर लागू होने व नई ट्रेनों में 15-20 प्रतिशत अधिक किराया बढ़ जाने से हवाई किराया सस्ता पढ़ने लगा है

यही नहीं, बेहद चतुराई के साथ 93 सालो में पहली बार रेल बजट को आम बजट में शामिल कर लिया गया है और सरकार की कोशिश अब यह रहती हैं कि मूल्य वृद्धि के सारे फैसले बजट से पहले या बाद में ही किये जायें जिससे आम जनता का ध्यान रेल बजट पर नही जाए

रेलवे की व्यवस्था कितनी अधिक बदहाल हुई है इसका अंदाजा एक वेबसाइट के हालिया सर्वेक्षण से लगता है..

इसके मुताबिक लेट होने में भारतीय रेल ने पिछले दशकों के भी सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले है वेबसाइट के मुताबिक, 400 किमी से अधिक की यात्रा करने वालीं एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेनों के आंकड़े देखें तो 15 घंटे से अधिक लेट होने वाली ट्रेनों की संख्या पहली तिमाही में 2014 में 382, 2015 में 479 और 2016 में 165 थी, जबकि यही संख्या 2017 में बढ़कर 1,337 हो गई.

यानी पिछले साल की तुलना में इस साल के पहले तीन महीने में 15 घंटे से ज्यादा लेट होने वाली ट्रेनों की संख्या में 810 फीसदी की वृद्धि हो गई। पिछले साल इसी अवधि में 10 से 15 घंटे तक लेट होने वाली ट्रेनों की संख्या 430 थी जो इस साल बढ़कर 1,382 हो गई

लिहाजा इन सारे मामलो में रेल यात्री तीन साल पूरा होने पर भी ठगा महसूस कर रहे हैं

रेलवे देश में सबसे अधिक सरकारी रोज़गार देती है। टाइम्स आफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया हैं कि रेलवे की श्रमशक्ति में 2015 से लेकर 2018 तक कोई बदलाव नहीं है। यानी सरकार ने मैनपावर बढ़ाने का कोई लक्ष्य नहीं रखा है। अखबार में छपी तालिका के अनुसार 2015-18 के बीच हर साल रेलवे की कार्यक्षमता यानी मैनपावर 13,26,437 से लेकर 13,31,433 ही रहेगा। इस रिपोर्ट के अनुसार मोदी सरकार ने रेलवे की भर्ती में भारी कटौती की है लगभग दो लाख  पदों पर कोई भर्ती नही की गयी जिसका सीधा असर रेलव में यात्रियों की सुरक्षा को देखने मे आता है।

राज्यसभा में पेश इंडिया स्पेंड की रिपोर्ट के अनुसार इस साल रेल दुर्घटनाओं में मृत्यु का आंकड़ा 10 सालो में सबसे अधिक है मुजफ्फरनगर के खतौली में हुआ हादसा केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद 8 वां बड़ा ट्रेन हादसा था. अब औरैया भी जुड़ गया। इसी अगस्त में सवाई माधोपुर में रेलवे स्टेशन पर 5 व्यक्ति रेल से कटकर मर गए लेकिन यह हादसा मीडिया में नजर ही नही आया

साफ नजर आ रहा है कि मोदी सरकार रेलवे की अनदेखी इसलिए कर रही है ताकि लोग खुद परेशान होकर सरकारी मंशा के अनुरूप पूर्ण निजीकरण को राजी हो जाए जिसकी शुरुआत हो चुकी है और जिसे संसद से मंजूरी भी दिलाई जा चुकी है

रेलवे में अराजकता जानबूझकर पैदा की गयी हैं, यह सब एक सोची समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है



लेखक इंदौर (मध्यप्रदेश )से हैं , ओर सोशल मीडिया में सम-सामयिक विषयों पर अपनी क़लम चलाते रहते हैं ।



 


मीडिया विजिल जनता के दम पर चलने वाली वेबसाइट है। आज़ाद पत्रकारिता दमदार हो सके, इसलिए दिल खोलकर मदद कीजिए। अपनी पसंद की राशि पर क्लिक करके मीडिया विजिल ट्रस्ट के अकाउंट में सीधे आर्थिक मदद भेजें।

Related



मीडिया विजिल से जुड़ने के लिए शुक्रिया। जनता के सहयोग से जनता का मीडिया बनाने के अभियान में कृपया हमारी आर्थिक मदद करें।