मक्‍का मस्जिद ब्‍लास्‍ट: हैदराबाद की NIA अदालत से स्‍वामी असीमानंद के बयान की फाइल गायब



हैदराबाद की मक्‍का मस्जिद में 2007 में हुए बम धमाकों के मुकदमे में एक अहम दस्‍तावेज़ गायब हो गया है। हिंदू दक्षिणपंथी प्रचारक स्‍वामी असीमानंद का बयान हैदराबाद की एक निचली अदालत के पास था जो अब नहीं मिल रहा है। यह बात तब सामने आई जब इस मामले में मुख्‍य जांच अधिकारी और सीबीआइ के एसपी टी राजा बालाजी ने मंगलवार को असीमानंद के साक्ष्‍य दर्ज करने का काम शुरू किया। इस मामले के एनआइए को दिए जाने से पहले मुकदमे की पहली चार्जशीट बालाजी ने ही तैयार की थी।

मक्‍का मस्जिद में नमाज़ के दौरान 18 मई 2007 को एक धमाका हुआ था जिसमें 9 लोग मारे गए थे और 58 घायल हुए थे। बाद में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की जिसमें कुछ और लोग मारे गए। इस मुकदमे में अदालत ने 160 से ज्‍यादा गवाहों के बयानात दर्ज किए जिनमें धमाके के पीडि़तों से लेकर आरएसएस के प्रचारक और अन्‍य थे।

असीमानंद को 2017 में ज़मानत दे दी गई थी लेकिन शर्त थी कि वे हैदराबाद और सिकंदराबाद से बाहर नहीं जाएंगे। मंगलवार को एनआइए के मुकदमों के लिए गठित विशेष अदालत के जज के रविंदर रेड्डी ने अदालत के कर्मचारियों को बहुत लताड़ लगायी जब इस मामले से जुड़े कई अहम दस्‍तावेज़ नदारद पाए गए। मुकदमे की कार्यवाही को ढेड़ घंटा रोकना पड़ा, जिस दौरान अफसरों ने कुछ काग़ज़ात खोज निकाले और कोर्ट के समक्ष प्रस्‍तुत किए।

इस बीच बालाजी को पता चला कि स्‍वामी असीमानंद के सीबीआइ के समक्ष दिए कथित बयान की प्रति ही गायब थी। यह दो पन्‍ने का एक बयान है जिसमें असीमानंद ने कथित षडयंत्र का विवरण दिया था। एनआइए की चार्जशीट में इस दस्‍तावेज़ को ”मेमो ऑफ डिसक्‍लोज़र” संख्‍या 88 का नाम दिया गया था। इसमें आरएसएस के आला नेताओं के नाम दर्ज हैं।


खबर साभार टाइम्‍स ऑफ इंडिया


मीडिया विजिल जनता के दम पर चलने वाली वेबसाइट है। आज़ाद पत्रकारिता दमदार हो सके, इसलिए दिल खोलकर मदद कीजिए। अपनी पसंद की राशि पर क्लिक करके मीडिया विजिल ट्रस्ट के अकाउंट में सीधे आर्थिक मदद भेजें।

Related



मीडिया विजिल से जुड़ने के लिए शुक्रिया। जनता के सहयोग से जनता का मीडिया बनाने के अभियान में कृपया हमारी आर्थिक मदद करें।