राफ़ेल डील में अगले-पिछले राष्ट्रपति संदिग्ध! फ्रांस में शुरू हुई सौदे में भ्रष्टाचार की न्यायिक जाँच!


इस खोजी रिपोर्ट के अनुसार अनिल अम्बानी की एक टेलिकॉम कंपनी फ्रांस में रजिस्टर्ड है और 2007 से 2012 के बीच उसकी जांच की गयी थी जिसमें कुल 153 करोड़ यूरो की चोरी पकड़ी थी जिस पर अम्बानी ने सत्तर लाख यूरो देने का प्रस्ताव दिया था, पर उस वक़्त वहां सरकार ने नहीं माना और 2015 तक मामला खिंचता रहा। बाद में जब राफेल डील हुई तो इसका सेटलमेंट किया गया और फ्रेंच सरकार ने सत्तर लाख यूरो लेकर मामला निपटा दिया।


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लड़ाकू विमान राफ़ेल के सौदे से जुड़े विवाद को भारत का सत्ता पक्ष चाहे ठंडे बस्ते में डालने में क़ामयाब लग रहा हो, लेकिन फ्रांस में इसका जिन्न फिर बोतल से बाहर आ गया है। मामला इस क़दर गंभीर है कि इस सौदे में भ्रष्टाचार के आरोपों की न्यायिक जाँच के लिए एक जज की नियुक्ति कर दी गयी है। भारत ने फ्रांस के 36 राफ़ेल विमानों के लिए 59 हज़ार करोड़ का ये सौदा किया था। कांग्रेस नेता राहुल गाँधी लगातार इस सौदे में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कह रहे थे कि विमान के लिए तीन गुना दाम दिया गया है।

फ्रांसीसी वेबसाइट मेडियापार्ट ने इस सौदे में हुए भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। आरोप है कि भारत की ओर से ख़ुद प्रधानमंत्री मोदी ने रुचि लेकर इस सौदे में अनिल अंबानी की कंपनी को जोड़ा था। पहले इस सौदे में सार्वजनिक क्षेत्र की एचएएल थी, लेकिन उसे बाहर कर दिया गया था। वेबसाइट के मुताबिक इस डील में भ्रष्टाचार के सबूतों के बावजूद सार्वजनिक अभियोजन सेवाओं (पीएनएफ) की वित्तीय अपराध शाखा के पूर्व प्रमुख, इलियाने हाउलेट ने जाँच रोक दी थी। जबकि उनके सहयोगियों ने इस पर आपत्ति भी की थी।

बहरहाल, अब अब पीएनएफ के नए प्रमुख जीन-फ्रेंकोइस बोहर्ट ने जांच के समर्थन का फैसला किया है। रिपोर्ट में बताया गया कि आपराधिक जाँच तीन लोगों की भूमिका पर ख़ासतौर पर केंद्रित रहेगी। इसमें पूर्व सौदे पर हस्ताक्षर करने वाले राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद, मौजूदा राष्ट्रपति और तत्कालीन वित्तमंत्री इमैनुएल मैक्रॉन और उस समय रक्षा विभाग संभावलने वाले मौजूदा विदेश मंत्री जीन-यवेस ले ड्रियन शामिल हैं।

इसके पहले फ्रेंच अखबार लेमोंदे ने बताया था कि फ्रेंच सरकार ने भारत के उद्योगपति अनिल अम्बानी का 143.7 करोड़ यूरो यानि लगभग ग्यारह हज़ार करोड़ रुपया टैक्स माफ़ इसी शर्त पर किया था कि भारत सरकार 36 राफेल को 128 राफेल के कुल दाम में खरीदेगी और साथ में इस पर टैक्स जुड़ेगा। इसीलिए राफेल की कीमत तीन गुना बढ़ गयी।

इस खोजी रिपोर्ट के अनुसार अनिल अम्बानी की एक टेलिकॉम कंपनी फ्रांस में रजिस्टर्ड है और 2007 से 2012 के बीच उसकी जांच की गयी थी जिसमें कुल 153 करोड़ यूरो की चोरी पकड़ी थी जिस पर अम्बानी ने सत्तर लाख यूरो देने का प्रस्ताव दिया था, पर उस वक़्त वहां सरकार ने नहीं माना और 2015 तक मामला खिंचता रहा। बाद में जब राफेल डील हुई तो इसका सेटलमेंट किया गया और फ्रेंच सरकार ने सत्तर लाख यूरो लेकर मामला निपटा दिया।

अनिल अंबानी भारत में डसॉल्ट एविएशन के 36 फ्रांसीसी लड़ाकू विमानों की बिक्री के मुख्य लाभार्थियों में से एक हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेहद करीबी हैं। फ्रांस में भ्रष्टाचार विरोधी एनजीओ शेरपा ने 26 अक्टूबर, 2018 को राष्ट्रीय वित्तीय कार्यालय (पीएनएफ) के साथ इस लेनदेन के मामले में भ्रष्टाचार की जांच शुरू करने का अनुरोध करने के लिए एक शिकायत दर्ज करायी थी।

 

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