हिंसा पर खेद जता रहे योगेंद्र यादव समेत 37 किसान नेताओं पर FIR, 200 गिरफ़्तार

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26 जनवरी को किसानों की गणतंत्र दिवस परेड में हुई हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने  200 लोगों को गिरफ्‍तार किया है और 37 किसान नेताओं के ख़िलाफ़ डकैती से लेकर दंगा भड़काने तक का मुकदमा दर्ज हुआ है। इनमें तमाम वे नेता है जो सरकार से वार्ता करने विज्ञान भवन जाते थे। उधर, संयुक्त किसान मोर्चा ने हिंसा की निंदा करते हुए कहा है कि जिन्होंने हिंसा की वे सरदार नहीं ग़द्दार हैं।

हैरानी की बात यह है कि इस मुकदमे में योगेंद्र यादव जैसे नेताओं का भी नाम है जो लगातार शांति की अपील करते रहे। 26 जनवरी को वे शाहजहाँपुर बॉर्डर पर थे जहाँ बेहद शांतिपूर्ण रैली संपन्न हुई थी। चैनलों पर आकर उन्होंने हिंसा की निंदा भी की थी। संयुक्त किसान मोर्चा ने हिंसा की निंदा की है और उसके नेता कल भी रूट तोड़ने वालों को रोकने का प्रयास कर रहे थे। योगेंद्र यादव के अलावा डॉक्टर दर्शन पाल,  सतनाम पन्नू, जोगिंदर सिंह, बलवीर सिंह राजेवाल, राकेश टिकैत, सरवन सिंह, हरपाल सांगा, भोग सिंह मनसा, जोगिंदर सिंह, वीएम सिंह, मुकेश चंद्र, ऋषि पाल अंबावत, प्रेम सिंह गहलोत, कृपाल सिंह नाटूवाला, जोगिंदर सिंह, सुरजीत सिंह फूल, प्रेम सिंह गहलोत, सुखपाल सिंह डाफर, बूटा सिंह, बलदेव सिंह सिरसा, जगबीर सिंह सहित कुल 26 नेताओं के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करायी गयी है।

ज़ाहिर है, सरकार ने अब हिंसा की आड़ में आंदोलन को दबाने का इंतज़ाम कर लिया है। कल जिस आसानी से किसान लालकिले तक पहुँचे और उन्हें बिना किसी प्रतिवाद के अंदर आने दिया गया, उससे ही साफ़ है कि सरकार लाल किले पर हमले जैसी तस्वीरों का इतंज़ार कर रही थी, वरना किसानों की ट्रैक्टर परेड नौ जगह से निकली और कई जगह लोगों ने उस पर फूल बरसाये जिस पर आज कोई चर्चा नहीं हो रही है।

पुलिस के मुताबिक हिंसा और तोड़फोड़ में 300 से अधिक पुलिसवाले घायल हुए हैं। उधर, एक किसान की जान भी कल आईटीओ पर हुए हंगामे में गयी। किसानों का आरोप है कि पुलिस की गोली से जान गयी जबकि पुलिस का कहना है कि ट्रैक्टर हादसे में मौत हुई।

संयुक्‍त किसान मोर्चा ने कहा है कि जिन्होने हिंसा की वे सरदार नहीं गद्दार हैं। बीजेपी सांसद सनी देओल के सहयोगी रहे दीप सिद्धू ने झंडा फहाराया जिसे लाल किले पर जिसे रोका नहीं गया।   

संयुक्‍त किसान मोर्चा की ओर से जारी बयान में कहा गया है मंगलवार को ट्रैक्‍टर रैली के दौरान किसान आंदोलन को बदनाम करने की गहरी साज़िश रची गई थी शांतिपूर्ण आंदोलन के ख़िलाफ़ किसान मज़दूर संघर्ष समिति(पन्नू ग्रुप) के साथ मिलकर गंदी साज़िश रची गई।जिस किसान समूह ने रिंग रोड पर बैरिकेड तोड़े, वे संयुक्त किसान मोर्चा का हिस्सा नहीं है


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