वित्तमंत्री सीतारमण के पति बोले- नाकामी का ठीकरा फोड़ने को नेहरू चाहिए, अभद्र भाषा और लिंचिंग है न्यू इंडिया!


परकला प्रभाकर ने कहा, “बीजेपी के न्यू इंडिया में जलियांवाला बाग के अंदर रंगारंग लाइट शो चलता है, मुस्लिम चूड़ीवाले को बेरहमी से पीटा जाता है।, हिंदू देवताओं के नाम पर ढाबा मालिकों को पीटा जाता है।, किसी को पीट-पीटकर जय श्री राम के नारे लगवाए जाते हैं। वहीं राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर बेकाबू भीड़ नारे लगाती है कि मुल्ले कटे जाएंगे…जय श्री राम चिल्लाएंगे और हिंदुस्तान में रहना होगा….जय श्री राम कहना होगा।, यति महाराज नरसिंहानंद बीजेपी और अन्य पार्टियों की महिला नेत्रियों को रखैल कहते हैं। यति जैसे लोग ही बीजेपी के पोस्टर बॉय बने हुए हैं।”


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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति और जाने-माने अर्थशास्त्री और विचारक परकला प्रभाकर ने देश में घटित हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए बीजेपी की सत्ता में नए भारत की हकीकत बताई है। हालांकि उन्होंने पीएम मोदी का नाम तो नही लिया लेकिन यह जरूर कहा की वह पंडित नेहरू से जलते हैं क्योंकि उनका राजनीतिक अस्तित्व नेहरू से बौना है। यह बातें उन्होंने अपने यू ट्यूब चैनल पर साप्ताहिक मिडवीक मैटर्स नाम के वीडियो एपिसोड में कहीं है। सिर्फ यही नहीं परकला प्रभाकर ने महिला नेताओं को लेकर दिये गये यति नरसिंहानंद के घटिया विवादित बयान का भी ज़िक्र किया और नरसिंहानंद को भाजपा के नए भारत का पोस्टर बॉय बताया। उन्होंने नेहरू के लिए वाजपेयी की सोच का विवरण करते हुए पुराने भारत और नए भारत से तुलना भी की।

नाकामी का दोष नेहरू पर लगाने के लिए BJP को नेहरू की जरुरत…

वित्त मंत्री के पति परकला प्रभाकर ने देश के मौजूदा हालात और केंद्रीय नेतृत्व की कार्यशैली को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बीजेपी के न्यू इंडिया को बयां करते हुए हाल की घटनाओं को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है। साथ ही उन्होंने बताया की बीजेपी को नेहरू की जरूरत क्यों है? प्रभाकर ने कहा कि बीजेपी को नेहरू की जरूरत है, ताकि वह अपनी असफलताओं का दोष नेहरू पर लगा सकें।

बीजेपी के न्यू इंडिया में होते है जुल्म..

परकला प्रभाकर ने कहा, “बीजेपी के न्यू इंडिया में जलियांवाला बाग के अंदर रंगारंग लाइट शो चलता है, मुस्लिम चूड़ीवाले को बेरहमी से पीटा जाता है।, हिंदू देवताओं के नाम पर ढाबा मालिकों को पीटा जाता है।, किसी को पीट-पीटकर जय श्री राम के नारे लगवाए जाते हैं। वहीं राष्ट्रीय राजधानी की सड़कों पर बेकाबू भीड़ नारे लगाती है कि मुल्ले कटे जाएंगे…जय श्री राम चिल्लाएंगे और हिंदुस्तान में रहना होगा….जय श्री राम कहना होगा।, यति महाराज नरसिंहानंद बीजेपी और अन्य पार्टियों की महिला नेत्रियों को रखैल कहते हैं। यति जैसे लोग ही बीजेपी के पोस्टर बॉय बने हुए हैं।” प्रभाकर आगे कहते हैं कि “IAS अधिकारी पुलिसकर्मियों को किसानों के सर फोड़ने का आदेश देता है। वहीं मुख्यमंत्री इसका बचाव करते हुए कहते हैं कि उनकी भाषा गलत थी लेकिन सख्ती जरूरी है। एक आदिवासी आदमी को ट्रक में बांध कर घसीटा जाता है जिससेे उसकी मौत हो जाती है।”

वाजपेयी ने राज्यसभा में नेहरू के बारे में क्या कहा था?

वीडियो एपिसोड में प्रभाकर इंडियन काउंसिल फॉर हिस्टोरिकल रिसर्च ने आजादी का अमृत महोत्सव के पोस्टर से जवाहरलाल नेहरू की तस्वीर हटाने का जिक्र करते हुए बताते हैं की आईसीएचआर ने ऐसा क्यों किया? उन्होंने बताया कि बीजेपी के पहले प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राज्यसभा में नेहरू के बारे में क्या कहा था? प्रभाकर बताते हैं की वाजपेयी ने कहा था कि, “वह व्यक्तित्व, वह जीवंतता, सबको साथ लेकर चलने की भावना, वह सज्जनता, वह महानता शायद ही निकट भविष्य में देखने को न मिले।”

नेहरू को लेकर आज की बीजेपी की क्या सोच है इसके बारे में शायद ही बताने की जरूरत है। अक्सर कई न्यूज़ चैनलो पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच डिबेट के दौरान बीजेपी के जाने माने नेताओं के नेहरू विरोधी विचार और अपशब्द नेहरू के प्रति नई बीजेपी की सोच को समझने के लिए काफी है। प्रभाकर ने पुरानी बीजेपी में नेहरू के प्रति सोच को और वाजपेयी की राज्यसभा में कही हुुई बातेंं आगे बढ़ते हुए बताया की वाजपेयी कहते हैं , “मतभेदों के बावजूद, हमारे दिल में नेहरू के महान आदर्शों, उनकी प्रामाणिकता, उनकी देशभक्ति, उनके अटूट साहस और अदम्य धैर्य के लिए सम्मान के अलावा कुछ नहीं है। नेहरू ने जिस भारतीय लोकतंत्र की स्थापना की, उसे सफल बनााया। आज उसके भविष्य को लेकर भी आशंका जताई जा रही है।”  प्रभाकर ने यह भी कहा कि, ” नेहरू के निधन पर अटल बिहारी वाजपेयी कहते हैं, ‘सूरज ढल चुका है। हमें सितारों की छाया में अपना रास्ता खोजना होगा।”

जवाहर लाल नेहरु

वाजपेयी ने कभी भी नेहरू को छोटा साबित नहीं किया..

प्रभाकर बताते है की भाजपा के पहले प्रधानमंत्री वाजपेयी कभी भी नेहरू को छोटा साबित नहीं करना चाहते थे। उनका कहना है कि नेहरू के जीवनकाल में और उनकी मृत्यु के बाद भी उनके कई आलोचक थे। दक्षिणपंथी से लेकर वामपंथी विचारधारा वाले लोगों ने उनकी आलोचना की। राजाजी से लेकर जयप्रकाश नारायण, बलराज मधोक से लेकर राम मनोहर लोहिया, एसए डांगे और पीसी जोशी तक, ये निश्चित रूप से नेहरू की कुछ नीतियों के खिलाफ थे, लेकिन उनमें से किसी ने भी भारतीय इतिहास में नेहरू के स्थान और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान से इनकार नहीं किया। .

नेहरू की उपस्थिति बीजेपी का राजनीतिक दिखाती है..

प्रभाकर ने पुराने और नए भारत में नेहरू की छवि के बारे में बताते हुए कहा, पुराने भारत का नेहरू से मतभेद था लेकिन कभी उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश नहीं की गई। स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को अस्वीकार नहीं किया गया था। लेकिन नई भाजपा के नए भारत में ऐसा होता है। प्रभाकर ने अपने वीडियो में यह बताया की किस तरह से नए भारत और नई बीजेपी की नेहरू की जरुरत है। उन्होंने कहा, विरोधाभास यह है कि इस नए भारत की परियोजना के शिल्पकारों को नेहरू की आवश्यकता है भी और नहीं भी। नेहरू की उपस्थिति उन्हें याद दिलाती है कि राष्ट्र के स्वतंत्रता संग्राम में उनका कोई योगदान नहीं है। नेहरू की उपस्थिति उन्हें उनके बौने राजनीतिक कद की याद दिलाती है, जिसके लिए उन्हें लगता है कि नेहरू जिम्मेदार हैं। प्रभाकर के अनुसार, इसलिए भाजपा नेताओं को लगता है कि नेहरू को खारिज कर दिया जाना चाहिए।

 

 

बीजेपी हिंदुत्व का छलावा है..

प्रभाकर कहते हैं कि इसलिए भाजपा नेताओं को लगता है उन्हें बौना साबित किया जाना चाहिए, सरदार पटेल को नेहरू के समकक्ष के रूप में पेश किया जाना चाहिए। लेकिन उन्हें नेहरू की भी जरूरत है, ताकि वे अपनी असफलताओं का दोष नेहरू पर मढ़ सकें। ताकि वे अपनी विफलताओं और देश की मौजूदा परिस्थितियों के लिए नेहरू को जिम्मेदार ठहरा सके। वित्त मंत्री के पति वीडियो के अंत में कहते हैं कि एक तरफ नेहरू को बौना साबित करने की कोशिश और दूसरी तरफ अभद्र भाषा, तोड़फोड़, लिंचिंग नई बीजेपी का नया भारत है। झूठी शांति, समन्वय आदि का लबादा पहने यह भाजपा हिंदुत्व का छलावरण है। जिसकी चपेट में कई साधारण और सीधे-सादे हिन्दू भी आते हैं जो उनसे आगे या आर पार नहीं देख पाते हैं।

 


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