मंदी और बेरोजगारी के बीच कुबेरों को राहत, कॉरपोरेट टैक्‍स में चौथाई कटौती

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को उद्योगपतियों को कॉरपोरेट टैक्स में भारी छूट देने की घोषणा करते हुए कहा कि 400 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स को धीरे-धीरे घटाकर 25% किया जाएगा और भारतीय धन निर्माता उद्यमियों को हर तरह का समर्थन दिया जाएगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में भारतीय उद्योगपतियों को हर तरह का समर्थन देने की घोषणा की थी. यह उसी की गूंज है. मोदी ने लाल किले से कहा था – “हमें धन सृजन करने वालों को कभी संदेह की नजर से नहीं देखना चाहिए”.

गौरतलब है कि, बीते 23 जुलाई को राज्य सभा में विनियोग और वित्त विधेयक पर चर्चा के दौरान एक सवाल के जवाब में सीतारमण ने कहा, ‘हमने कॉरपोरेट रेट को घटाकर 25 फीसदी कर दिया है जिसका फायदा 99.3 फीसदी कंपनियों को मिलेगा. इसलिए अब बमुश्किल कुछ ही कंपनियां बची हैं. हम उन्हें भी जल्दी इस दायरे में लाएंगे.’

सीतारमण ने 5 जुलाई को अपने बजट भाषण में 400 करोड़ रुपए तक का कारोबार करने वाली कंपनियों पर 25 प्रतिशत की दर से कॉरपोरेट कर लगाने का प्रस्ताव दिया था. पहले यह 30 प्रतिशत था. अपने 5 जुलाई के बजट भाषण में वित्त मंत्री ने करीब 99 फीसदी कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स रेट घटाकर 25 फीसदी कर दिया था, लेकिन बड़ी कंपनियों को इस छूट से बाहर रखा गया था.

पिछले साल तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 250 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट आयकर की दर को 25 प्रतिशत कर दिया.

वित्त वर्ष 2016 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कॉरपोरेट टैक्स को 30% से घटाकर 25%  करने के लिए चार साल के रोडमैप का ऐलान किया था.

जेटली ने वित्त वर्ष 2017 में 5 करोड़ रुपए तक की बिक्री वाली छोटी कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स की दर घटाकर 29% कर दी. साथ ही उसी साल नई मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स की दर घटाकर 25%  करने का ऐलान किया. वित्त वर्ष 2018 के बजट में 50 करोड़ रुपए तक सालाना टर्न ओवर वाली कंपनियों को 25% कॉरपोरेट  टैक्स के दायरे में लाया गया. जेटली ने वित्त वर्ष 2019 में टैक्स दर कटौती का लाभ 250 करोड़ रुपए टर्नओवर वाले कारोबारों तक को देने का एलान किया.

कॉरपोरेट टैक्स दर कटौती के लाभ के दायरे में अब 99% कंपनियां आ गई थी, जो 1 फीसदी बड़ी कंपनियां बची हुई थी अब वे भी इस दायरे में  आ जायेंगी .