किसानों ने सरकार का प्रस्ताव ठुकराया, कहा- कृषि कानून रद्द हों, MSP गारंटी का कानून बने!

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‘संयुक्त किसान मोर्चा’ की आम सभा ने मोदी सरकार द्वारा बुधवार को रखे गए प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। इसके साथ किसान संगठनों ने साफ कर दिया कि उन्हें कृषि क़ानूनों को रद्द करने और एमएसपी की क़ानूनी गारंटी से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। आम सभा में तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को पूरी तरह रद्द करने और सभी किसानों के लिए सभी फसलों पर लाभदायक एमएसपी के लिए एक कानून बनाने की बात, इस आंदोलन की मुख्य मांगो के रूप में, दोहराई गयी।

दरअसल किसानों के साथ 10वें दौर की बातचीत में केंद्र सरकार ने किसानों के सामने प्रस्ताव रखा था कि वह एक विशेष समिति गठित करने को तैयार है जो तीनों नए कानूनों के साथ-साथ किसानों की अन्य मांगों पर विचार करेगी। सरकार ने यह भी प्रस्ताव रखा कि जब तक समिति समीक्षा पूरा नहीं कर लेती, सरकार तीनों नए कानूनों को साल-डेढ़ साल तक स्थगित रख सकती है। सरकार के इस प्रस्ताव पर किसान संगठन ने कहा था कि वो अपनी बैठक करने के बाद इस पर फैसला करेंगे।

आम सभा की बैठक के बाद ‘सयुंक्त किसान मोर्चा’ ने कहा कि वो  इस आंदोलन में अब तक शहीद हुए 147 किसानों को श्रद्धाजंलि अर्पित करता है। इस जनांदोलन को लड़ते लड़ते ये साथी हमसे बिछड़े है। इनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।

‘संयुक्त किसान मोर्चा’ ने कहा कि पुलिस प्रशासन के साथ हुई बैठक में पुलिस ने दिल्ली में प्रवेश न करने की बात कही, वहीं किसानों ने दिल्ली की रिंग रोड पर परेड करने की बात दृढ़ता और ज़ोर से रखी।

शांतिपूर्ण चल रहा यह आंदोलन अब देशव्यापी हो चुका है। कर्नाटक में अनेक स्थानों पर वाहन रैलियों के माध्यम से किसान गणतंत्र दिवस के लिए एकजुट हो रहे हैं। केरल में कई जगहों पर किसान ट्रेक्टर मार्च निकाल रहे हैं।

उत्तराखन्ड के बिलासपुर व रामपुर समेत अन्य जगहों पर किसान ट्रैक्टर मार्च कर दिल्ली की किसान परेड की तैयारी कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में किसान 23 जनवरी को राजभवन का घेराव करेंगे और एक जत्था दिल्ली की तरफ भी रवाना होगा।

नवनिर्माण किसान संगठन की ‘किसान दिल्ली चलो यात्रा’, जो कि ओडिशा से चली थी, को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा बार बार परेशान किया जा रहा है। उनके रूट बदलने से लेकर बैठके न करने के निर्देश दिए जा रहे है। हम प्रशासन के इस बर्ताव का विरोध करते है।

कोलकाता में 3 दिन का विशाल महापड़ाव 20 जनवरी से 22 जनवरी तक होगा। कल हुए विशाल कार्यक्रम में हज़ारों लोगों ने भाग लिया। आने वाले समय में और भी तेज होने की संभावना है।

मजदूर किसान शक्ति संगठन के नेतृत्व में किसान, मजदूर व आम लोग शाहजहांपुर बॉर्डर पहुंच रहे हैं। कठपुतली और गीतों के माध्यम से नव उदारवादी नीतियों का विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।


‘सयुंक्त किसान मोर्चा’ की ओर से डॉ दर्शन पाल द्वारा जारी


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