पीयूष गोयल के बयान से और भड़के, टोल प्लाज़ा पर क़ब्ज़ा कर – हाईवे पर बढ़ते किसान

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देशव्यापी किसान आंदोलन ने अपने एलान के मुताबिक 12 दिसबंर से अपने आंदोलन को और तेज़ करने की शुरूआत कर दी है। दिल्ली-जयपुर हाईवे पर केंद्र सरकार की सारी तैयारियों के बीच, किसानों ने पंजाब से यूपी तक टोल प्लाज़ा पर क़ब्ज़ा करना और हाईवे बंद करना शुरू कर दिया है। लेकिन इस बीच, केंद्रीय रेल और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के बयान से किसान और भड़क गए हैं। पीयूष गोयल ने एक मीडिया संस्थान से बातचीत में कहा कि किसान आंदोलन वामपंथियों और माओवादियों के हाथ में चला गया है।

पीयूष गोयल के इस आंदोलन से किसान आंदोलनकारियों में खासा आक्रोश देखा जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत ने इस पर पलटवार करते हुए कहा है, “अगर वाकई ऐसा होता तो हम लोगों को क्या अब तक ये पता नहीं होता? इस आंदोलन की छवि खराब करने से बेहतर है कि केंद्र सरकार की एजेंसियां ऐसे लोगों को पकड़कर गिरफ्तार करें। लेकिन हमको अब तक ऐसा कुछ पता नहीं चला है।” इस बयान को लेकर, किसान नेताओं का कहना है कि ये बातचीत विफल होने और किसानों के उनकी मांगों पर न झुकने के बाद केंद्र सरकार का नया पैंतरा है।

इस बारे में हमने वामपंथी किसान संगठनों के नेताओं से भी बात की और उन्होंने सरकार पर एक नए प्रोपेगेंडा का आरोप लगाया। अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय सचिव पुरुषोत्तम शर्मा ने हमसे बात करते हुए कहा, “पहले भाजपा आईटी से ने किसानों को केवल पंजाब का किसान बताने की कोशिश की। इसके बाद उनको खालिस्तानी साबित करने में भाजपा लग गई। लेकिन ये दोनों ही प्रचार फेल हो गए। अब सिंघू सीमा पर पंजाब-हरयाणा के किसानों द्वारा भीमा कोरेगांव, सीएए-एनआरसी के एक्टिविस्टों की झूठे मुकदमों से रिहाई के बाद, सरकार के मंत्री इसे माओवादियों से जोड़ रहे हैं।” पुरुषोत्तम शर्मा ने ये भी सवाल किया कि क्या देश में वामपंथी होना या वामपंथी संगठन होना – अपराध हो गया है? उन्होंने जोड़ा, ‘इस आंदोलन में भाजपा और एनडीए को छोड़कर, देश के सभी राजनैतिक दलों के किसान संगठन शामिल हैं। लेकिन सरकार बातचीत और किसानों की मांगें मानने की जगह, इसकी छवि खराब करने की कोशिश में लगी है। बेहतर हो कि वह हमारी मांगें मान ले।’

इस बीच ख़बर है कि पंजाब में शंभू सीमा और हरयाणा के बस्तारा-उचान के टोल प्लाज़ा समेत कई अन्य टोल प्लाज़ा पर किसानों ने क़ब्ज़ा कर लिया और उन्हें टोल फ्री कर दिया है। राजस्थान और दिल्ली के हाईवे पर भी हरयाणा और राजस्थान के किसान, चक्का जाम करने की तैयारी में हैं। ख़बर है कि झारखंड के गिरीडीह में भी सीपीआई-एमएल के कार्यकर्ताओं ने टोल प्लाज़ा फ्री करा दिया है।

सरकार और सत्ताधारी भाजपा की ओर से किसान आंदोलन को लेकर, अफ़वाहें फैलाने का यह पहला मौका नहीं है। इसके पहले खालिस्तान समर्थक आंदोलन कह कर, भाजपा फंस चुकी है। अब इस पर माओवादी मिलीभगत का आरोप लग रहा है। जबकि राजनैतिक एक्टिविस्टों की रिहाई की मांग, पंजाब में जारी किसान आंदोलन पहले से कर रहा है। इसकी पुष्टि के लिए हमारी स्टोरी आप जल्द ही पढ़ेंगे।

 


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