किसान आंदोलन के 130वें दिन देश भर में हुआ FCI दफ़्तरों का घेराव!


संयुक्त किसान मोर्चा और प्रदर्शनकारी किसान भी इस संकट के बारे में गहराई से जानते हैं कि भारत ने अपने उपभोक्ताओं और उत्पादकों को इस संदर्भ में विश्व व्यापार संगठन के कठोर ढांचे के भीतर अपनी प्रतिबद्धताओं और कृषि पर अपने समझौते के द्वारा उतारा है। सरकार द्वारा बातचीत में रखे गए प्रस्ताव में भोजन के अधिकार, संप्रभुता, खाद्य और पोषण सुरक्षा के ठोस तर्क व प्रस्ताव नहीं है। भारत के खाद्य भंडार कार्यक्रम को विश्व व्यापार संगठन में एक स्थायी समाधान के बिना खींचा गया है। विश्व व्यापार संगठन के समझौते ने कृषि मॉडल को एक ऐसे शासन के रूप में बनाया गया है जो आम नागरिकों के हित के खिलाफ है और जो कृषि-व्यवसाय कॉरपोरेट द्वारा मुनाफाखोरी को जगह देता है।


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कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ जारी आंदोलन के 130वें दिन आज सयुंक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर देश के कई हिस्सों में एफसीआई के दफ्तरों का घेराव किया गया व उपभोक्ता मंत्री के नाम ज्ञापन दिया गया।

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा और ऑंगले में एफसीआई दफ्तर के बाहर धरना प्रदर्शन कर ज्ञापन सौपा दिया। हरियाणा के ढांड मंडी कैथल, गुड़गांव, सोनीपत, अम्बाला, करनाल, बदोवाल समेत FCI के दफ्तरों पर किसानों ने रोष प्रदर्शन किया। नोएडा स्थित FCI के दफ्तर पर भी किसानों ने प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश के अतरौली, अलीगढ़ समेत कई जगहों पर आज ज्ञापन दिया गया। वहीं बिहार के सीतामढ़ी में बड़ी संख्या मे किसान एकजुट हुए व FCI दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया।

राजस्थान के श्रीगंगानगर, गोलूवाला समेत कई जगहों पर किसानों ने खरीद संबधी मांग का ज्ञापन उपभोक्ता मंत्री के नाम सौंपा और धरना प्रदर्शन किया। पंजाब में भवानीगढ़, सुनाम, बरनाला, गुरदासपुर, मानसा, अमृतसर समेत 40 से ज्यादा FCI के दफ्तरों को किसानों ने घेरा व वर्तमान गेहूं की खरीद पर नए नियमो का विरोध किया।

हालांकि पंजाब के किसान अभी किये गए कुछ बदलावों से जूझ रहे हैं, जो केंद्र सरकार राज्य में चल रहे गेहूं खरीद सीजन में कर रहे है। यह पंजाब के किसानों के हितों के खिलाफ है, वहीं देश के अन्य हिस्सों में किसान एफसीआई की पर्याप्त बजटीय आवंटन के बिना खराब वित्तीय हालात के प्रभावों से पीड़ित है। संयुक्त किसान मोर्चा और प्रदर्शनकारी किसान भी इस संकट के बारे में गहराई से जानते हैं कि भारत ने अपने उपभोक्ताओं और उत्पादकों को इस संदर्भ में विश्व व्यापार संगठन के कठोर ढांचे के भीतर अपनी प्रतिबद्धताओं और कृषि पर अपने समझौते के द्वारा उतारा है। सरकार द्वारा बातचीत में रखे गए प्रस्ताव में भोजन के अधिकार, संप्रभुता, खाद्य और पोषण सुरक्षा के ठोस तर्क व प्रस्ताव नहीं है। भारत के खाद्य भंडार कार्यक्रम को विश्व व्यापार संगठन में एक स्थायी समाधान के बिना खींचा गया है। विश्व व्यापार संगठन के समझौते ने कृषि मॉडल को एक ऐसे शासन के रूप में बनाया गया है जो आम नागरिकों के हित के खिलाफ है और जो कृषि-व्यवसाय कॉरपोरेट द्वारा मुनाफाखोरी को जगह देता है।

एसकेएम स्पष्ट रूप से समझता है सुधार के नाम से तीन खेती कानून भारत के पीडीएस प्रणाली को समाप्त करने के इरादे से लाये गए है। यही कारण है कि प्रदर्शनकारी किसान तीनों कानूनों को रद्द करने और सभी किसानों को कानूनी अधिकार के रूप में एमएसपी को सांविधिक गारंटी देने की मांग कर रहे हैं।

आज दोपहर संयुक्त किसान मोर्चा, गाजीपुर बार्डर द्वारा जारी एक फोल्डर का इलाहाबाद उच्च न्यायालय, इलाहाबाद में विमोचन किया गया और हजारों प्रतियां उपस्थित विधि मित्रों के बीच वितरित की गयीं। फोल्डर का शीर्षक है – “इन तीन कानून में काला क्या है, प्रधानमंत्री मोदी को बताओ।”

आंध्रा प्रदेश व तेलंगाना के किसानों ने मिट्टी सत्याग्रह यात्रा में भागीदारी निभाते हुए अपने क्षेत्र की मिट्टी दिल्ली बोर्डर्स पर भेजी है जहां पर शहीद किसान स्मारक बनाएं जाएंगे। लगभग 150 गावों से इक्कठी की मिट्टी को लेकर किसान 6 अप्रैल को गाज़ीपुर बॉर्डर और सिंघु बॉर्डर पर पहुचेंगे।

छत्तीसगढ़ में 03 अप्रैल को सोनाखान से मिट्टी यात्रा की शुरूआत की गई और राज्य के अलग अलग कोने से मिट्टी एकत्रित की गई। मिट्टी लेकर छत्तीसगढ़ के किसान 06 अप्रैल को सिंघु बॉर्डर पहुचेंगे।

किसान नेता राकेश टिकैत और युधवीर सिंह के नेतृत्व में संयुक्त किसान मोर्चा के रोड शो का वहाँ के किसानों व उन आम नागरिकों द्वारा बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया जा रहा है, जो किसानों के संघर्ष को अपना पूरा समर्थन दे रहे हैं।

– डॉ दर्शन पाल
सयुंक्त किसान मोर्चा


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