किसानों ने ठुकराई कृषि मंत्री की बातचीत की पेशकश, आंदोलन होगा तेज़

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दिल्ली की घेरेबंदी बढ़ा रहे किसान संगठनों से आज कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आंदोलन ख़त्म करके बातचीत करने का आग्रह किया, लेकिन किसानों ने इस अपील को ठुकरा दिया है। कृषि मंत्री की प्रेस कान्फ्रेंस के बाद हुई एक जवाबी प्रेस कान्फ्रेंस में किसान नेताओ ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार ने खुद मान लिया है कि कानून कृषि नहीं व्यापार के लिए बनाया गया है। किसान कृषि कानून रद्द करने से कम कुछ भी स्वीकार नहीं करेंगे।

केंद्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ आज मीडिया से मुखातिब हुए कृषि मंत्री तोमर ने किसान संगठनों की ओर से अगले चरण के आंदोलन के ऐलान पर भी ऐतराज़ जताया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के अगले चरण की घोषणा तो वार्ता टूट जाने के बाद की जाती है, जबकि सरकार किसानों से खुले मन से वार्ता के लिए हर समय तैयार है। किसानों ने 14 दिसंबर को देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है।

कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार की ओर से किसानों को जो लिखित प्रस्ताव दिया गया था वो किसानों की चिंताओं पर हुई बातचीत का ही निचोड़ था। अगर किसानों को लगता है कि उसमें कोई कमी रह गयी है या फिर शब्दावली में कुछ समस्या है तो सरकार उस पर विचार करने को तैयार है। उन्होंने प्रस्ताव की तमाम बातों को फिर दोहराते हुए कहा कि एमएसपी की व्यवस्था पहले की तरह बनी रहेगी। कृषि मंत्री ने आशा जतायी कि जल्दी ही इस मुद्दे का समाधान निकल आयेगा।

लेकिन मंत्रियों ने इस बात का सीधा जवाब नहीं दिया कि कृषि क़ानून रद्द करने की किसानों की माँग पर उसका जवाब क्या है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कोई भी क़ानून पूरी तरह अच्छा या बुरा नहीं होता। जिन प्रावधानों पर किसानों को ऐतराज़ है उस पर सरकार विचार करने को हर पल तैयार है। मोदी सरकार ने लगातार किसानों का हित किया है और आगे भी करती रहेगी।

जवाबी प्रेस कान्फ्रेंस में किसान नेताओं ने कहा कि सरकार ने खुद स्वीकार कर लिया है कि यह  व्यापार के संबंध में बनाया गया कानून है। यह किसानों के लिेए बना क़ानून नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली आ रहे किसानों को रास्ते में बीजेपी सरकारों की ओर से परेशान किया जा रहा है जिसकी हम निंदा करते हैं। आंदोलन अभी और तेज़ होगा। कृषि कानूनों की वापसी से कम किसान कुछ भी मंज़ूर नहीं करेंगे।


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