दिल्ली में ब्लैकआउट की चेतावनी! कई राज्यों में किल्लत, क्यों गहरा रहा ब्लैकआउट का संकट?

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भारत में बिजली संकट बढ़ता ही जा रहा है। झारखटन,बिहार में तो पहले से ही लोग किल्लत का सामना रहे है और अब दिल्ली में भी ब्लैकआउट की चेतावनी जारी कर दी गई है। वहीं, उत्तर प्रदेश में आठ संयंत्र (plant) अस्थायी रूप से ठप हो गए हैं। पंजाब और आंध्र प्रदेश ने भी बिजली संयंत्रों (power plants) में कोयले की कमी व्यक्त की है। बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी से आई किल्लातें राज्यों में बड़ा संकट ला रही हैं। ऐसे में केंद्र के सामने राज्यों की मांगों को पूरा करना एक चुनौती की तरह है।

केंद्र ने जल्द कदम नहीं उठाए तो राजधानी में बिजली संकट: केजरीवाल

इस बिजली संकट पर केंद्र सरकार ने कहा है कि बिजली मंत्रालय के नेतृत्व में सप्ताह में दो बार कोयले के भंडार की समीक्षा की जा रही है। वहीं, दूसरी तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि अगर केंद्र ने जल्द से जल्द जरूरी कदम नहीं उठाए तो राजधानी को बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है। केजरीवाल ने केंद्र को पत्र लिखा है कि 135 संयंत्रों में से आधे से ज्यादा में सिर्फ तीन दिन का कोयला बचा है। ये संयंत्र देश की आधे से अधिक बिजली की आपूर्ति करते हैं।

अर्थव्यवस्था पटरी पर लाने के लिए चले फैक्ट्रियां और कंपनियां जिससे बढ़ी परेशानी..

बिजली संकट के गहराने की वजह को बताते हुए ऊर्जा मंत्रालय ने कहा कि कोरोना के कारण कमज़ोर हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बड़ी संख्या में फैक्ट्रियां और कंपनियां चलाई गईं। इससे बिजली की मांग और खपत बढ़ती रही। आज के समय में देश में बिजली की दैनिक खपत बढ़कर चार अरब यूनिट हो गई है। इसमें से 65 से 70 फीसदी मांग कोयले से चलने वाले संयंत्रों से पूरी की जा रही है।

  • 2019- अगस्त-सितंबर महीने में देश में 106.6 बिलियन यूनिट की खपत थी।
  • 2021 – बढ़कर 124.2 बिलियन यूनिट हो गई।

60 डॉलर से 160 डॉलरइ पहुंचे दाम..

ऊर्जा मंत्रालय की ओर से बताया गया कि बाहर से आयातित कोयले की कीमत जो मार्च में 60 डॉलर प्रति टन थी। वो सितंबर-अक्टूबर में बढ़कर 160 डॉलर प्रति टन हो गई। कीमतों में अचानक वृद्धि के कारण बाहर से कोयले के आयात में कमी आई और घरेलू कोयले पर निर्भरता बढ़ती गई। वहीं, कोरोना से जूझ रही अर्थव्यवस्था,सितंबर महीने में कोयले की खदान वाले क्षेत्रों में भारी बारिश, बाहर से आने वाले कोयले की कीमतों में इज़ाफा, मानसून की शुरुआत में पर्याप्त मात्रा में कोयले का स्टॉक नहीं हो पाया। इस सभी चार कारणों की वजह से ही कोयले के उत्पादन पर असर पड़ा। और संयंत्रों में बिजली उत्पादन में कमी आई।


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