अपना ई-वेस्ट संभालकर रखिए, इसमें सोना है !


ई-वेस्ट में बहुत सारी कीमती चीजें हैं। जल्द ही वक्त आने वाला है, जब इसकी अच्छी कीमत मिलेगी।


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कबीर संजय

इंसान एक तरफ तो धरती से सोना-चांदी खोद रहा है। दूसरी तरफ उसे कचरे में डाल रहा है। जी हां, एक अनुमान के मुताबिक दुनिया के कुल स्वर्ण भंडार का सात फीसदी हिस्सा इस समय ई-कचरे में मौजूद है।

यूएन-वर्ल्ड इकोनामिक फोरम की ई-वेस्ट पर जारी रिपोर्ट कई चौंकाने वाले और रोचक खुलासे करती है। ई-वेस्ट यानी ई कचरा। यानी बेकार हुए कंप्यूटर, लैपटाप, पेन ड्राइव, मोबाइल फोन व अन्य उपकरणों के सर्किट। इसमें सोने, चांदी, कोबाल्ट, प्लेटिनम, दुर्लभ धातु निओडाइनियम, उच्च गुणवत्ता वाले एल्यूमिनियम और टिन का इस्तेमाल किया गया होता है। एक अनुमान के मुताबिक एक टन स्वर्ण अयस्क से ज्यादा सोना एक टन ई-कचरे में मौजूद है। 

इसके बावजूद इस ई-वेस्ट का महत्व अभी पूरी दुनिया में ही नहीं समझा जा सका है। एक तरफ तो सोने-चांदी जैसी धातु के खनन में दुनिया अपनी ऊर्जा खर्च कर रही है। दूसरी तरफ उसे कचरे में डाला जा रहा है। जबकि, यह माना जाता है कि ई-वेस्ट से दोबारा कीमती धातु प्राप्त करना उसका खनन करने की तुलना में बेहद कम खर्चीला है। लेकिन, आमतौर पर पूरी दुनिया में ही यह काम निचले स्तर पर हो रहा है। भारत जैसे देश में बेहद आदिम तरीके से बेकार मोबाइल को गलाकर धातु निकालने की कोशिश होती है, जिससे कि धातुएं नष्ट भी होती हैं और स्वास्थ्य और पर्यावरण को भी नुकसान होता है। 

चीन ने इसके महत्व को कुछ हद तक समझा है। वहां पर एक रीसाइकलर ने ई-वेस्ट को रीसाइकिल करके इतने कोबाल्ट का उत्पादन कर लिया जितना कोबाल्ट खनन करके नहीं उत्पादित किया जा सका है। अब सुझाया यह जा रहा है कि सभी इलेक्ट्रानिक उपकरण कंपनियों को इस तरह के ऑफर निकालने चाहिए, जिससे उपभोक्ता खराब पड़े उपकरणों को वापस करे। इसके लिए उन्हें अच्छी कीमत की पेशकश की जानी चाहिए। 

तो, अपना ई-वेस्ट संभालकर रख लीजिए। इसमें बहुत सारी कीमती चीजें हैं। जल्द ही वक्त आने वाला है, जब इसकी अच्छी कीमत मिलेगी। 

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।


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