LAC पर भारतीय क्षेत्र में जारी है चीनी सैन्य कैंपों का निर्माण- रिपोर्ट


सैन्य दिग्गजों (Military veterans ) ने बफर ज़ोन बनाने पर सहमति जताने में सरकार की रिआयत पर यह कहते हुए सवाल उठाया है कि भारत की दावा की गई लाइनों (India claimed lines) के भीतर ऐसे बफर ज़ोन का मतलब भारतीय सेना के लिए क्षेत्र का नुकसान है। आपको बता दें की कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चीन को जमीन सौंपने का आरोप लगाया है।


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भारत-तिब्बत सीमा पुलिस {Indo-Tibetan Border Police (ITBP)} के सूत्रों ने कहा है कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) देपसांग मैदानों में कब्ज़े वाले इलाके (Occupied territory) में निर्माण गतिविधि जारी रखे हुए है और घर्षण बिंदु (friction point) पर अतिरिक्त सैन्य शिविरों (military camps) का निर्माण कर रही है।

चीन बना रहा है अतिरिक्त सैन्य शिविर..

ITBP के एक अधिकारी ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा की देपसांग मैदानों की नवीनतम जमीनी रिपोर्ट से पता चलता है कि PLA ने कब्जे वाले क्षेत्र (occupied zone) में निर्माण कार्य तेज कर दिया है और अपने सैनिकों के लिए ठोस आश्रय (concrete shelters) और अतिरिक्त सैन्य शिविर बना रहा है। अधिकारी ने कहा कि PLA ने अब तक भारत की दावा की गई लाइनों ( India claimed lines ), देपसांग मैदान और हॉट स्प्रिंग्स के भीतर शेष घर्षण बिंदुओं (remaining friction points) से अलग होने से इनकार कर दिया है।

भारतीय सेना की पांच पारंपरिक गश्त बिंदुओंं तक पहुंच नही..

बता दें कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP)- 3,488 किलो मीटर चीन सीमा (China frontier) के साथ रक्षा (defence) की पहली लाइन है, जो अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से होकर गुजरती है। इसके पीछे सेना रहती है। कहा जाता है की भारत की दावा की गई लाइनों (India-claimed lines) के अंदर 18 किमी तक चीनी सेना रणनीतिक रूप (strategically) से महत्वपूर्ण देपसांग मैदानों पर फैली हुई है। भारत और चीन के बीच पिछले साल मई से ही सीमा पर तनाव जारी है। सीमा गतिरोध (border standoff) शुरू होने के बाद से इसने भारतीय सेना (Indian Army’s) की पांच पारंपरिक गश्त बिंदुओं (traditional patrolling points)- पीपीएस 10, 11, 11 ए, 12 और 13 तक पहुंच को काट दिया है।

हॉट स्प्रिंग्स और देपसांग मैदानों में सीमा गतिरोध जारी है, भले ही चीन के कुछ किलोमीटर पीछे हटने के साथ एक विसैन्यीकृत (demilitarised) बफर ज़ोन बनाकर गलवान घाटी, पैंगोंग झील और गोगरा से आंशिक विघटन (partial disengagement) हुआ हो। वहीं भारत-दावा लाइनों के अंदर अभी बाकी है।

 नरेंद्र मोदी पर चीन को जमीन सौंपने का आरोप..

सैन्य दिग्गजों (Military veterans ) ने बफर ज़ोन बनाने पर सहमति जताने में सरकार की रिआयत पर यह कहते हुए सवाल उठाया है कि भारत की दावा की गई लाइनों (India claimed lines) के भीतर ऐसे बफर ज़ोन का मतलब भारतीय सेना के लिए क्षेत्र का नुकसान है। आपको बता दें की कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर चीन को जमीन सौंपने का आरोप लगाया है।

चीन की सीमा के साथ दावा क्षेत्र के भीतर परियोजनाएं : रक्षा मंत्रालय

रक्षा मंत्रालय (defence ministr) के सूत्रों ने कहा कि भारत ने चीन की सीमा के साथ अपने दावा क्षेत्र के भीतर कई बुनियादी ढांचा विकास परियोजनाएं (infrastructure development projects) भी शुरू की हैं और परिचालन महत्व (operational significance) की करीब 70 सड़कों का निर्माण कर रहा है। मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि चीन भी सड़कों, पुलों, रेलवे नेटवर्क और हवाई अड्डों का निर्माण करके अपनी सीमा अवसंरचना को बढ़ा रहा है।

 

द टेलीग्राफ़ में छपी रिपोर्ट पर आधारित

 

 


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