जेएनयू हिंसा : दिल्ली पुलिस ने दिल्ली पुलिस को किया बरी, अधिकारियों को ‘क्लिन चिट’

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आपको याद होगी शायद, साल की शुरुआत में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में घटित 5 जनवरी की वह घटना। जब सैकड़ों नकाबपोश लोग हाथ में लाठी, डंडा व रॉड लिये परिसर में घूम-घूम कर हिंसा को अंजाम दे रहे थे। जिसमें 36 छात्र, शिक्षक और कर्मचारी बुरी तरह घायल हो गए थे।

इस घटना को अंजाम देने में दिल्ली पुलिस के अधिकारी भी शक के घेरे में आ गये थे। जिसके बाद दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों के निरीक्षण में एक फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी बनाई गई थी। इस कमिटी का काम मुख्यरूप से ‘हिंसा की घटनाओं’ और ‘इन घटनाओं को रोकने में स्थानी पुलिस की लापरवाही’ के आरोपों की जाँच करना था। आज इंडियन एक्सप्रेस ने ख़बर छापी है कि इस कमिटी इस मामले में दिल्ली पुलिस को ‘क्लिन चिट’ दे दी है।

घटना के दिनों से ही जेएनयू परिसर में हुई इस हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। कहा जाता रहा है कि परिसर में जिस समय हिंसा हो रही थी, उस वक़्त दिल्ली पुलिस परिसर के बाहर खड़ी थी। लेकिन वह विश्वविद्यालय के अंदर दाखिल नहीं हुई। जबकि इसी पुलिस ने इस घटना से महज़ एक हफ़्ता पहले जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के परिसर में बगैर किसी अनुमति के न सिर्फ परिसर में घुस कर, बल्कि लाइब्रेरी के अंदर जाकर पढ़ रहे छात्रों पर भी ताबड़तोड़ लाठीचार्ज किया था। तब कथित तौर पर दिल्ली पुलिस के द्वारा फायरिंग भी की गई थी जिसमे एक छात्र घायल हो गया था।

हालांकि, जेएनयू परिसर में हुई हिंसा को लेकर पुलिस ने अपने बचाव में कहा कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों की अनुमति पुलिस के पास नहीं थी, इसलिए वह परिसर में दाखिल नहीं हुई। पुलिस पर लगे आरोपों की जांच के लिए पश्चिम क्षेत्र की ज्वाइंट कमिश्नर शालिनी सिंह की अगुवाई में एक कमिटी बनाई गई। इस कमिटी में चार इंस्पेक्टर और दो एसीपी शामिल हैं। अपनी जांच में कमिटी ने पांच जनवरी को जेएनयू परिसर में तैनात पुलिस अधिकारियों से पूछताछ की।

एक्सप्रेस की एक ख़बर के मुताबिक, कमिटी का कहना है कि 5 जनवरी को परिसर में दिनभर स्थिति तनावपूर्ण रही और पुलिस की दख़ल से ही स्थिति सामान्य हो पाई। कमिटी के इस रिपोर्ट के अनुसार,  परिसर से शाम 3.45 बजे से 4.15 तक पीसीआर को कुल 8 कॉल की गई। जिनमें अधिकतर कॉल परियार छात्रावास में छात्रों को पीटे जाने से जुड़ी थी। इसके अलावा 14 पीसीआर कॉल्स आपसी झगड़े और परिसर में बाहरी लोगों के जुटने के बारे में थी।

गौरतलब है कि जेएनयू के छात्र फ़ी बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। इसी दौरान सेमेस्टर एग्जाम को भी बॉयकॉट किया गया। लेकिन 5 जनवरी को अचानक परिसर में कुछ बाहरी नकाबपोश लोग घुस गए। नकाबपोश गुंडे परिसर में उपद्रव मचाने लगे तथा हिंसा भी की। परिसर में दाखिल हुए करीब 100 नकाबपोशों ने जमकर हिंसा और उपद्रव किया। नकाबपोश अपने साथ डंडे एंव रॉड भी लेकर आए थे। परिसर में करीब चार घंटे तक उत्पात होता रहा। पुलिस को बार-बार सूचित करने के बाद भी छत्र, शिक्षक और कर्मचारियों को कोई मदद नहीं मिली। इस हिंसा में करीब 36 छात्र, अध्यापक और कर्मचारी घायल हुए।

इस मामले में दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। बाद में यह मामला क्राइम ब्रांच को जाँच के लिए दिया गया , लेकिन अभी तक इस मामले में किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है। हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस ने जेएनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष एवं अन्य से भी पूछताछ की गई। इस मामले में बीजेपी से जुड़े छात्र संगठन एबीवीपी के तमाम कारयकर्ताओं को हमलावर बतौर पहचाना गया था।


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