दिल्ली: बाबू जगजीवन राम अस्पताल भी हुआ सील, डॉक्टर्स समेत, 44 लोग कोरोना संक्रमित

आदर्श तिवारी
ख़बर Published On :


दिल्ली का एक और कोरोना हॉस्पिटल सील हुआ, जगजीवन राम अस्पताल स्टाफ कोरोना संक्रमित

हिंदू राव अस्पताल में एक नर्स के कोरोना संक्रमित होने के बाद दिल्ली के ही सरकारी अस्पताल बाबू जगजीवन राम हॉस्पिटल में 44 लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हो चुकी है। दिल्ली में स्वास्थ्य कर्मियों के कोरोना संक्रमित होने की घटनाएँ बढ़ती ही जा रही हैं, इस अस्पताल में पहले 14 लोग कोरोना से संक्रमित पाए गए थे, उसके बाद उन संक्रमित लोगों के संपर्क में आये लोगों की जाँच किये जाने पर कुल संक्रमित लोगों की संख्या 44 हो गयी। जिसमें से 11 डॉक्टरों के साथ ही अन्य मेडिकल स्टाफ़ शामिल हैं। गुरुवार तक इस अस्पताल में 7 डॉक्टरों और 7 अन्य लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। उसके बाद हुई जाँच में यह संख्या 31 हुई और अब कुल 40 की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गयी है। जिन लोगों में संक्रमण बड़े स्तर पर है उन सब को सरकारी अस्पतालों के साथ ही प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती करा दिया गया है। बाकी सामान्य संक्रमण वाले लोगों को आइसोलेशन वार्ड में भेज दिया गया है। इसी के साथ, दिल्ली में कोरोना का इलाज कर रहा, एक और अहम अस्पताल, सेनिटाइज़ होने तक सील हो गया है और कोरोना से लड़ाई और मुश्किल हो गई है।

जहाँगीरपुरी में कोरोना के अधिक मामले  

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने बाबू जगजीवन राम अस्पताल में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने की पुष्टि कर दी है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के संक्रमित होने के बाद अस्पताल को सील कर दिया गया है और वहां के हर कोने को सैनिटाईज किया जा रहा है। बाबू जगजीवन राम अस्पताल दिल्ली के  जहाँगीरपुरी क्षेत्र में आता है। अस्पताल के एक अधिकारी का कहना है कि “हमारे यहाँ संक्रमण के बड़े स्तर पर फ़ैलने की एक वजह जहाँगीरपुरी भी है। वहां से कई लोग इलाज के लिए यहाँ आते हैं।” जहाँगीरपुरी में कोरोना वायरस के संक्रमण के फ़ैलने की दर अधिक होने के साथ ही, यहाँ के कई इलाकों को हॉटस्पॉट में शामिल किया जा चुका है। अभी कुछ दिन पहले ही यहाँ 40 से अधिक लोग एक साथ कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे।

एम्स की महिला नर्स और उसके दो बच्चों की भी रिपोर्ट पॉजिटिव

आपको बता दें कि दिल्ली के ही एम्स अस्पताल में भी एक महिला नर्स कोरोना पॉजिटिव जा चुकी है। साथ ही उसके दोनों बच्चों की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इस महिला की ड्यूटी कैंसर वार्ड में थी। रिपोर्ट आने के बाद सभी का उपचार किया जा रहा है। स्वास्थ्य कर्मचारियों के लगातार कोरोना वायरस की चपेट में आने से सारा मेडिकल सिस्टम ही धराशायी हो जायेगा। सरकार और प्रशासन को इस मामले में उचित क़दम उठाने चाहिए। भारत में अब तक कोरोना वायरस के 26400 से अधिक केस सामने आ चुके हैं। जिसमें करीब 2625 मरीजों की संख्या दिल्ली से है। महाराष्ट्र में सबसे अधिक (7628) कोरोना के मामले सामने आये हैं।

क्या ये संक्रमण, पीपीई किट्स की कमी का नतीजा?

हमने इस बारे में दिल्ली समेत, देश भर में कई अस्पतालों में लगातार इस बीमारी के प्रकोप से फ्रंटलाइन वॉरियर्स के तौर पर जूझ रहे मेडिकल स्टाफ से बात की। ज़्यादातर ने दबी ज़ुबान से ये स्वीकार किया है कि देश में कई जगह इस संक्रमण के, अस्पताल के स्टाफ में बड़ी संख्या में फैलने की वजह – पीपीई किट्स और सुरक्षा उपकरणों की कमी है। ऐसे में, संभावित ख़तरे के बावजूद लगातार बहादुरी से ये मेडिकल वॉरियर्स, इस लड़ाई में कूद गए हैं, लड़ रहे हैं – लेकिन संक्रमण से बच नहीं पा रहे हैं और दिन पर दिन संक्रमित मेडिकल स्टाफ की संख्या, देश भर में बढ़ती जा रही है।


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