बेमौसम बारिश से अकेले यूपी में 28 मौतें, साढ़े आठ लाख हेक्टेयर में खड़ी फसल तबाह

आकाश पांडेय
ख़बर Published On :


उत्तर प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत में बारिश और ओलावृष्टि ने भयंकर कहर बरपाया है। उत्तर प्रदेश में 28 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। सरकार ने पीड़ित परिवारों को चार लाख रूपए मुआवजा देने की घोषणा की है। इस बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को भारी नुकसान हुआ है। गेहूं, सरसों की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है।

बीते दो दिनों से समूचे उत्तर भारत में बेमौसम की बारिश हो रही है और ओले गिर रहे हैं। रबी की फसल पर इससे बहुत प्रभाव पड़ा है। खासकर पूर्वांचल और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मैदानी जिलों में किसानों की खड़ी फसल चौपट हो गयी है। पश्चिमी राजस्थान के किसान पहले ही टिड्डियों के हमले से बेहाल थे, अब बारिश ने उनकी कमर ही तोड़ कर रख दी है।

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के रामपुर निवासी भुवनेश्वर नाथ की एक बीघे में बोयी मसूर बरबाद हो गयी है। वे छोटे किसान हैं जिनके पास दो-तीन बीघा ज़मीन है जिससे वे अपने संयुक्त परिवार का खर्चा चलाते हैं। वे मीडियाविजिल से बातचीत में बताते हैं, “इस बार जब फसल पक कर लगभग तैयार हो गई थी तभी बारिश का होना बहुत खराब रहा। बहुतों की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गयी है। जिन लोगों की फसल थोड़ा पहले बोयी गयी थी, उनकी फसल थोड़ी बची है। जिनकी थोड़ी बाद की है उनकी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है।”

नाथ के दो लड़के प्राइवेट नौकरी करते हैं। एक बीघे मसूर की फसल बर्बाद होने से उन्हें लगभग 30 हजार का नुकसान हुआ है। वे बताते हैं, “ऐसा नहीं है कि ये पहली फसल खराब हुई है। इससे पहले की भी लगातार तीन सीज़न की फसलें कभी बारिश तो कभी सूखे की वजह से खराब हो गयी थीं। पिछली बार भयंकर बारिश के कारण पूरा खेत पानी में डूब गया था। उससे पहले सूखे की वजह से पूरी फसल खराब हो गई थी।”

इलाहाबाद के इंद्रपाल और गाज़ीपुर के हरिशंकर की भी फसल इस बेमौसम बारिश में बरबाद हो गयी है। मीडियाविजिल को इंद्रपाल बताते हैं, “मेरी सरसों की पूरी फसल खराब हो गयी। गेहूं भी खराब हो रहा है। पिछले दो सीज़न से लगातार फसल खराब हो रही है। घर का खर्चा चलाना मुश्किल हो रहा है।”

अकेले उत्तर प्रदेश में 28 किसान इस बारिश में मारे गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिलाधिकारियों को फसलों और मवेशियों के हुए नुकसान का जायजालेकर तुरंत राहत पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

गाजीपुर के हरिशंकर ने फोन पर बताया, “हमें इस सीजन से बहुत उम्मीद थी। पानी का पैसा, खाद का, बीज का पैसा सब डूब गया। ऐसे ही अगर सब चलता रहा तो जल्द ही किसानी छोड़नी पड़ जाएगी।”

अनधिकारिक दावों के मुताबिक अकेले उत्तर प्रदेश में बीते एक हफ्ते के दौरान आए तूफान और ओलावृष्टि में सौ से ज्यादा किसान मारे गए हैं, हालांकि सूचना निदेशक ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवल 28 के मारे जाने की बात कही है। मीडियाविजिल ने जिन किसानों से बात की, सभी सरकार के इस रवैये से नाराज़ दिखते हैं।

कुल साढ़े आठ लाख हेक्टेयर में बोयी फसल को यूपी में नुकसान हुआ है। अकेले गुरुवार और शुक्रवार को 14 जिलों में 3 लाख हेक्टेयर से ज्यादा में खड़ी फसल तबाह हो गयी है। इसमें से 33 फीसद से ज्यादा फसल केवल 24000 हेक्टेयर के आसपास के मैदानों में खराब हो गयी जिसकी चपेट में 42000 से ज्यादा किसान आए हैं, टाइम्स आफ इंडिया की एक रिपोर्ट ने यह आंकड़ा गिनाया है। इन किसानों को सरकार ने एकमुश्त 18.52 करोड़ के मुआवजे के योग्य माना है।


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