स्वास्थ्य बजट को कम से कम दस गुना बढ़ाए नीतीश सरकार-माले

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भाकपा-माले विधायक दल की प्रेस रिलीज

 

 

◆ विधायक कोटे की शेष बची 1 करोड़ की राशि कोविड पर खर्च करने का अधिकार विधायकों को मिले

◆ वर्चुअल बैठक कर दस मांगों का प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा

◆ लाॅकडाउन समस्या का समाधान नहीं, अस्पतालों व स्वास्थ्य व्यवस्था को ठीक करने पर गंभीर हो सरकार

◆ पालीगंज विधानसभा में एक भी अस्पताल में कोविड का इलाज नहीं, डीएम नहीं उठाते फोन

 

 

पटना 4 मई 2021, बिहार के ग्रामीण इलाकों में कोविड संक्रमण के महाविस्फोट, स्वास्थ्य व्यवस्था की बेहद लचर स्थिति और तेजी से बढ़ रहे मौतों की चिंताजनक स्थितियों के बीच आज भाकपा-माले विधायक दल की वर्चुअल बैठक जूम ऐप पर हुई. बैठक में माले राज्य सचिव कुणाल, विधायक दल के प्रभारी राजाराम सिंह तथा विधायक सत्यदेव राम, सुदामा प्रसाद, अरूण सिंह, बीरेन्द्र प्रसाद गुप्ता, गोपाल रविदास, मनोज मंजिल, महानंद सिंह, संदीप सौरभ, अजीत कुशवाहा, रामबलि सिंह यादव और अमरजीत कुशवाहा शामिल हुए.

विधायक दल ने कोविड के दूसरे संक्रमण काल में अपने कामकाज की समीक्षा की और कहा कि जबसे स्थितियां बिगड़ी हैं, माले विधायक लगातार अपने इलाकों में सक्रिय हैं और कोविड मरीजों को सेवा प्रदान कर रहे हैं. स्थिति सुधरने तक लोगों को मदद पहुंचाना ही हमारा प्रमुख लक्ष्य होगा.

माले विधायक दल ने बैठक से 10 सूत्री प्रस्तावों का ज्ञापन भी मुख्यमंत्री को भेजा.

ये प्रस्ताव हैं –

1. कोविड हेल्थ इमरजेंसी पर विधायक मद से 2 करोड़ रु. खर्च करने के फैसले के मामले में सुझाव है कि इसे दो भागों में विभक्त किया जाए. 1 करोड़ रु. राज्य स्तर पर और शेष एक 1 करोड़ की राशि संबंधित विधायक के विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करने का प्रावधान किया जाए.

2. विधायक मद की शेष 1 करोड़ की राशि को भी कोविड मरीजों की सहायता व आवश्यक स्वास्थ्य उपकरणों की व्यवस्था करने हेतु विधायकों को अपने विधानसभा के अंदर खर्च करने का अधिकार प्रदान किया जाए.

3. विगत लाॅकडाउन के दौरान विधायक मद से ली गई 50 लाख रु. की राशि का अब तक कोई हिसाब नहीं मिला है. व्यय को पारदर्शी बनाया जाए और इसकी जानकारी संबंधित जनप्रतिनिधियों को दिया जाए.

4. कोविड महामारी के मद्देनजर विधायक मद की राशि अपर्याप्त है, इसलिए सरकार स्वास्थ्य बजट को तत्काल कम से कम दस गुणा करे और ऑक्सीजन सिलेंडर, वेंटिलेटर, फ्लोमीटर, एंबुलेंस आदि उपकरणों सहित अस्थायी अस्पतालों के निर्माण तथा डाॅक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों पर खर्च करे. व्यापक पैमाने पर डाॅक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों की बहाली, उनका रिजर्व पुल तथा ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा के पेशे से जुड़े लोगों को न्यूनतम प्रशिक्षण देकर कोविड मरीजों की सेवा में गांवों में तत्काल उतारा जाए.

5. तत्काल गांव-गांव में मेडिकल टीमें भेजकर घर-घर में कोविड की जांच, इलाज की व्यवस्था तथा एक सीमित अवधि में सभी के टीकाकरण की गारंटी की जाए. कोविड से बचाव के नियमों अर्थात शारीरिक दूरी का पालन, सेनिटाइजेशन व मास्क की अनिवर्याता को लेकर सघन माइकिंग व जागरूकता अभियान चलाया जाए. कोविड के शिकार लोगों के परिजनों के लिए 10-10 लाख रु. का मुआवजा, 6 माह का राशन व रोजगार की व्यवस्था की जाए.

6. पटना जिले के पालीगंज विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहद खराब हालत ने अब तक कम से कम 100 लोगों की जिंदगियों को खत्म कर दिया है. पीएचसी से लेकर अनुमंडल अस्पताल पालीगंज में कोविड का किसी प्रकार इलाज उपलब्ध नहीं है. पालीगंज अनुमंडल अस्पताल में पहले से उपलब्ध संसाधनों व पूरी व्यवस्था को विक्रम शिफ्ट कर देने के कारण मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है. यह एक आपराधिक कृत्य है. पटना डीएम व मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, पटना से अपील के बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं है. हमारी मांग है कि प्रशासन आम लोगों की जिंदगी से खेलना बंद करे और तत्काल पालीगंज अनुमंडल अस्पताल सहित तमाम पीएचसी में कोविड के इलाज के आरंभ की गारंटी करे.

7. हमारे पास रिपोर्ट है कि इस भयावह महामारी में प्राइवेट अस्पतालों की भूमिका अपेक्षाओं के परे है. हमारी मांग है कि इन अस्पतालों में सरकार अपने खर्च पर कोविड मरीजों के इलाज की व्यवस्था करे और इनपर चैकस निगाह रखे. इसे मरीजों को लूटने का अड्डा न बनने दे.

8. राज्य से प्रखंड स्तर तक प्रशासन, राजनीतिक दलों व सामाजिक संगठनों के बीच बातचीत की नियमित प्रणाली विकसित की जाए ताकि सामने खड़ी इस चुनौती का हम सब मिलजुलकर सामना कर सकें व उसे हरा सकें. लेकिन यह दुर्भाग्यूपर्ण है कि स्वास्थ्यमंत्री से लेकर स्वास्थ्य विभाग के सचिव व पटना सहित कई जिलों के अधिकारी फोन तक नहीं उठाते हैं. ऐसी स्थिति में कोविड के खिलाफ एकजुट संघर्ष की धार कमजोर पड़ती है. आप इसे अपने संज्ञान में लें.

9. सरकार की ओर से लाॅकडाउन लगा दिया गया है. लेकिन विगत साल का अनुभव बेहद कड़वा है. आम लोगों को प्राकृतिक कोविड आपदा के साथ-साथ सुलतानी आपदा लाॅकडाउन की भी मार झेलनी पड़ी थी. अतः हमारी मांग है कि सरकार को लाॅकडाउन में ज्यादा रूचि दिखलाने की बजाए स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को ठीक करने में कहीं अधिक गंभीर होना चाहिए.

10. लाॅकडाउन के मद्देनजर कोविड मरीजों की सेवा में लगे हमारी पार्टी के कार्यकर्ताओं व अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं को अविलंब पास जारी किए जाएं ताकि इस काम में किसी भी प्रकार की बाधा न हो सके.

 

कुमार परवेज
राज्य कार्यालय, भाकपा-माले, बिहार


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