बिहार: टीईटी अभ्यर्थियों के समर्थन में पहुंचे माले विधायक, कहा- विधानसभा को घेरेंगे!

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बर्बर पुलिस दमन का सामना कर गर्दनीबाग धरनास्थल पर बैठे टीईटी अभ्यथिर्यों से मिलने आज माले विधायक व इनौस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज मंजिल धरनास्थल पर पहुंचे और उनके आंदोलन का समर्थन किया। उनके साथ इनौस के राज्य सचिव सुधीर कुमार, इरफान हैदर, आइसा के राज्य सह सचिव आकाश कश्यप, आलोक यादव, पवन यादव, कार्तिक पासवान, आरा आइसा जिला अध्यक्ष पप्पू कुमार, राकेश कुमार, संजय साजन, समीर कुमार आदि नेता भी गर्दनीबाग धरनास्थल पहुंचे और पुलिस दमन के शिकार टीईटी अभ्यर्थियों का हालचाल लिया।

विधायक मनोज मंजिल ने कहा कि धरने की परमिशन होने के बावजूद टीईटी अभ्यथियों पर जिस बर्बरता से लाठीचार्ज हुआ है, वह सरकार की तानाशाही दिखलाता है। भाजपा-जदयू की सरकार युवाओं को रोजगार देने की बजाए उनका दमन कर रही है। महिला अभ्यर्थियों तक को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया। यह बहुत शर्मनाक है।

मनोज मंजिल ने कहा कि आने वाले विधानसभा सत्र में इस मसले को महागठबंधन एकजुट होकर मजबूती से उठायेगा। साथ ही, शिक्षा व रोजगार के सवाल पर विधानसभा का घेराव भी किया जाएगा, जिसमें टीईटी अभ्यर्थियों की मांगों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

उन्होंने बिहार सरकार से कहा है कि जब हाईकोर्ट ने बहाली का आदेश दे दिया है, तब फिर सरकार को टीईटी अभ्यर्थियों को बहाल करने में क्या परेशानी हो रही है? हमारी मांग है कि इन सभी 94 हजार अभ्यर्थियों की बहाली प्रक्रिया को सरकार अविलंब पूरा करे। किसी भी प्रकार की आनाकानी हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।

उन्होंने यह भी मांग की है कि टीईटी अभ्यर्थियों पर बर्बरता से हमला करने वाले दोषी पुलिस अधिकारियों की शिनाख्त कर उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

माले राज्य सचिव कुणाल ने टीईटी अभ्यर्थियों पर बर्बर लाठीचार्ज के बाद आज पटना में कार्यपालक सहायकों परहुए लाठीचार्ज की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि ऐसा लगता है कि बिहार में पुलिस राज कायम हो चुका है. आंदोलनकारियों की मांगों पर कार्रवाई करने की बजाए भाजपा-जदयू की सरकार दमन की भाषा बोल रही है. उन्होंने बिहार के युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि इस निकम्मी सरकार को किसी भी प्रकार की मोहलत नहीं लेने दें. विगत 16 वर्षों से इन्हीं का राज बिहार में चल रहा है, लेकिन युवाओं की सबसे ज्यादा उपेक्षा इस सरकार ने की है.

भाकपा माले राज्य सचिव से मिले टीईटी अभ्यर्थी

TET अभ्यर्थियों का एक शिष्टमंडल आज भाकपा माले राज्य सचिव कुणाल से मिला। उन्होंने माले राज्य सचिव को अपनी पीड़ा सुनाई। महिला अभ्यर्थियों की बर्बरता से पुरुष पुलिसकर्मियों ने पिटाई की। खाने का सामान फेंक दिया। 9 लोगों को अरेस्ट कर लिया। विकलांग अभ्यर्थियों तक को नहीं छोड़ा। परमिशन रहने के बावजूद यह दमन अभियान चलाया गया।

भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे टीईटी अभ्यर्थियों पर भाजपा-जदयू सरकार द्वारा बर्बर लाठीचार्ज की घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देकर स्कूलों में योगदान की गारंटी करवाने की बजाए सरकार लाठी-गोली की भाषा बोल रही है। हम सबको याद है कि विगत विधानसभा चुनाव में जब एनडीए गठबंधन को अपनी हार सुनिश्चित दिखलाई पड़ने लगी थी, तो उसने 19 लाख रोजगार देने का वादा किया था। लेकिन सत्ता में आते ही उसने अपने उस वादे को भुला दिया और पहले की ही तरह दमन का रूख अख्तियार किए हुए है।

माले राज्य सचिव ने कहा कि यह संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है कि 94 हजार छात्र 2017 में ही टीईटी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अपने नियोजन की बाट जोह रहे हैं। 2019 में उनसे आवेदन भी लिए गए गए लेकिन नियोजन नहीं हो रहा है। तीन साल बीत जाने के बाद भी जब सरकार ने कोई यथोचित कदम नहीं उठाया, तब उन्होंने आंदोलन का रास्ता पकड़ा है। होना तो यह चाहिए था कि सरकार तत्काल उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करती, उनके नियोजन का उपाय निकालती, लेकिन सत्ता के घमंड में चूर भाजपा-जदयू की सरकार लाठी चलवा रही है।

उन्होंने टीईटी अभ्यर्थियों की मांगों का पूरी तरह से समर्थन किया और कहा कि आने वाले विधानसभा के सत्र में इस मुद्दे को हमारी पार्टी मजबूती से सदन के भीतर उठाएगी।


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