दिल्ली दंगे में जिसका स्कूल जला, पुलिस ने उसे ही जेल में डाला, कोर्ट ने दी ज़मानत

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दिल्ली पुलिस के एक ओर झूठ का खुलासा . दंगों की जांच की जांच के लिए आवाज़ उठाइए .

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के मामले में राजधानी पब्लिक स्कूल के संचालक फ़ैसल फ़ारूक़ को जमानत मिल गई है। विदित हो इस दंगे में यह स्कूल पुरी तरह जला दिया गया था ओर पुलिस ने उलटे इसके मालिक को ही दंगे का आरोपी बना दिया था
दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि पुलिस की चार्जशीट में फ़ैसल के इसलामिक संगठन पॉपुलर फ़्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई), पिंजरा तोड़ और मुसलिम उलेमाओं से संबंध होने के जो सबूत पेश किए गए हैं, वे पूरी तरह मामले से अलग हैं। अदालत ने कहा कि पहली नज़र में यह भी साबित नहीं होता है कि घटना के वक्त फ़ैसल मौक़े पर मौजूद थे।

फ़ैसल व सात अन्य लोगों को 24 फ़रवरी को शिव विहार इलाक़े में उनके स्कूल के बाहर हुए दंगों के मामले में गिरफ़्तार किया गया था। फ़ैसल पीएफ़आई से संबंध होने के आरोप में 8 मार्च से जेल में थे। दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि फ़ैसल के संबंध पीएफ़आई, पिंजरा तोड़, जामिया को-ऑर्डिनेशन कमेटी, हज़रत निज़ामुद्दीन और कुछ अन्य कट्टरपंथी मुसलिम संगठनों और देवबंद से भी हैं।

पुलिस ने यह भी दावा किया था कि फ़ारूक़ के कहने पर ही दंगाइयों ने राजधानी स्कूल के बगल में स्थित डीआरपी कॉन्वेन्ट स्कूल, पार्किंग की दो जगहों और अनिल स्वीट्स में भी सोच-समझकर तोड़फोड़ की थी।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के मुताबिक़, फ़ैसल को जमानत देने वाले जज विनोद यादव ने कहा कि इस मामले के गवाहों के बयानों में अंतर है और मामले में नियुक्त जांच अधिकारी ने ख़ामियों को पूरा करने के लिए पूरक बयान दर्ज कर दिया है।

पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा था कि दिल्ली दंगों से एक दिन पहले (23 फ़रवरी को) फ़ारूक़ ने देवबंद का भी दौरा किया था। इसके अलावा पुलिस ने चार्जशीट में लिखा है कि दंगों की साज़िश रचने का पता इससे भी चलता है कि दंगों वाले दिन (24 फ़रवरी को) मुसलिम परिवारों के कई बच्चों ने स्कूल जल्दी छोड़ दिया था।

पुलिस ने चार्जशीट में कहा था कि फ़ैसल ने एक महिला से बात की थी जिसके संबंध सैफुल इसलाम लॉ फ़ैकल्टी से हैं। अदालत ने इस पर कहा कि वह महिला किसी अख़बार की रिपोर्टर थी। पुलिस ने कहा था कि फ़ारूक़ ने चार अन्य लोगों से भी बात की थी लेकिन अदालत ने पाया कि उनमें से एक वकील थे, एक स्थानीय विधायक थे और तीसरे शख़्स फ़ैसल के चचेरे भाई थे।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘जांच अधिकारी ने इन लोगों में से किसी से भी बात नहीं की और सिर्फ़ आरोपों के अलावा कोई भी ठोस सबूत नहीं है, जिसके दम पर यह साबित किया जा सके कि फ़ैसल ने इन लोगों से दिल्ली दंगों के बारे में बात की थी।’

पिछले महीने दिल्ली दंगों के एक मामले में भी दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई थी और कहा था कि मामले की जाँच एकतरफ़ा है। दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में पुलिस ‘पिंजरा तोड़’ की सदस्यों देवांगना, नताशा के अलावा सफ़ूरा ज़रगर, मीरान हैदर और कुछ अन्य लोगों को भी गिरफ़्तार कर चुकी है। ये सभी लोग दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर सीएए, एनआरसी और एनपीआर के ख़िलाफ़ हुए विरोध-प्रदर्शनों में शामिल रहे थे।

वरिष्ठ पत्रकार पंकज चतुर्वेदी के फ़ेसबुक वॉल से साभार।



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