किसान आंदोलन में पूरी तरह कूदी काँग्रेस, महापंचायत में बोले राहुल-कृषि क़ानूनों को रद्द कराके रहेंगे!


साफ़ हो गया है कि 79 दिन से अराजनीतिक आंदोलन का दावा कर रहे किसान नेताओं से इतर कांग्रेस पार्टी ने भी इस मुद्दे को अपने स्तर पर उठाने का फ़ैसला कर लिया है। क़िसानों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है जो कांग्रेस कि किसान पंचायतों में हो रही भागीदारी को देखते हुए भी महसूस हो रहा है। किसानों के इसी शोक को अब कांग्रेस अपनी शक्ति बनाने में जुट गयी है। ऐसा लगता है कि किसानों के ‘हल’ में कांग्रेस को अपनी समस्याओं का हल मिल गया है।


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लोकसभा में बजट भाषण का बहिष्कार करके कृषि क़ानूनों की पर्त-दर पर्त उतारने के दूसरे दिन आज राहुल गाँधी राजस्थान के हनुमानगढ़ में थे। यहाँ आयोजित किसान पंचायत में उन्होंने फिर संसद में दिया गया नारा दोहराया-मोदी सरकार, हम दो-हमारे दो की सरकार। हम दो यानी मोदी और अमित शाह और हमारे दो यानी अंबानी और अडानी। दो दिन पहले यानी दस फ़रवरी को कुछ इसी अंदाज़ में प्रियंका गाँधी ने सहारनपुर के चिलकाना में हुंकार भरी थी। उन्होंने कृषि क़ानूनों को राक्षस बताते हुए कहा था कि अगर मोदी सरकार नहीं मानती तो केंद्र में सरकार बनते ही कांग्रेस कृषि क़ानूनों को रद्द करेगी। ऐसे में सवाल कि कया किसानों के हल में काँग्रेस को अपनी समस्याओं का हल मिल गया है।

इस पर चर्चा करे से पहले आपको बताते है कि राहुल गांधी ने आज हनुमानगढ़ में क्या कहा।

राहुल ने कहा कि मोदी सरकार ने सबसे पहले नोटबंदी के ज़रिये गरीबों के घर से पैसा निकाला। हिंदुस्तान की रीढ़ की हड्डी को तोड़ा गया था। तीन चार लोगों का लाखों करोड़ का कर्जा माफ किया और जनता का पैसा बैंकों में पहुँचा। फिर जीएसटी लायी गयी जिससे छोटे और मध्यम दुकानदारों की बर्बादी हुई। पीएम मोदी अपने मित्रों के लिए रास्ता साफ़ करना चाहते हैं। लाखों छोटे व्यापारी बरबाद हो गये।

राहुल ने कहा कि ऐसा ही रवैया कोरोना के समय देखने को मिला जब हिंदुस्तान के मज़दूर घर की ओर जा रहे थे। उन्होंने हाथ जोड़कर बस और रेल का टिकट मांगे पर पीएम ने व्यवस्था नहीं की। लोग भूखे मर गये। लेकिन उसी समय एक लाख पचास हजार करोड़ रुपये का कर्जा उद्योगपतियों का इस सरकार ने माफ कर दिया।

राहुल गाँधी ने कहा कि अब चौथा कदम-तीन नये कानून के ज़रिये उठाया गया है। इसका लक्ष्य हिंदुस्तान के चालीस फ़ीसदी लोगों का धंधा उनसे छीन लेना है। इस देश में रोज़गार देश के दो-तीन बड़े उद्योगपति नहीं देते। रोज़गार किसान देते हैं। छोटा व्यापारी देता है। मध्यम दर्जे के उद्योग देते हैं। बेरोज़गारी फैलती जा रही है, पर मोदी जी रोज़ बहाना बनाते रहते हैं। संसद में कहते हैं कि किसानों से बात करना चाहते हैं। क्या बात करना चाहते हैं। इस कानून को रद्द कीजिए, किसान बात करेगा।

राहुल ने कहा कि यह किसानों का मुद्दा नहीं, देश का मुद्दा है। मंडी, एमएसपी का सिस्टम किसानों की रक्षा करता है। इस ढाँचे को नरेंद्र मोदी तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी किसानों, मज़दूरों के साथ खड़े होकर इस क़ानून को रद्द करायेगी।

राहुल गाँधी ने मोदी सरकार की चीन नीति पर भी सवाल उठाये। उन्होंने कहा कि चीन हिंदुस्तान की ज़मीन के अंदर आ गया। चीन की सेना ने भारतीय ज़मीन छीन ली। हमारे जवानों को शहीद किया और कल संसद में रक्षामंत्री ने कहा कि समझौता हो गया। समझौता हुआ कि नरेंद्र मोदी की सरकार ने हिंदुस्तान की पवित्र जमीन चीन को पकड़ा दी। पैंगोंग लेक में हिंदुस्तान का पोस्ट फिंगर 4 पर होता था, अब वह फिंगर 3 पर पोस्ट लगायेंगे। यानी फिंगर 3 और 4 के बीच की जमीन मोदी ने चीन को हमेशा के लिए दे दी।

राहुल ने कहा कि चीन के सामने खड़े नहीं होंगे और किसानों को पीटेंगे, ये नरेंद्र मोदी की सच्चाई है। बस एक गलतफहमी है कि वे भारत के किसान और मजदूर की शक्ति नहीं जानते। अब मोदी को ये लोग अपनी शक्ति दिखायेंगे।

ज़ाहिर है, राहुल गाँँधी काफ़ी तेवर में थे। किसान महापंचायत में उमड़ी भीड़ को देखकर भी जोश बढ़ा हुआ था। इससे यह भी साफ़ हो गया है कि 79 दिन से अराजनीतिक आंदोलन का दावा कर रहे किसान नेताओं से इतर कांग्रेस पार्टी ने भी इस मुद्दे को अपने स्तर पर उठाने का फ़ैसला कर लिया है। क़िसानों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है जो कांग्रेस कि किसान पंचायतों में हो रही भागीदारी को देखते हुए भी महसूस हो रहा है। किसानों के इसी शोक को अब कांग्रेस अपनी शक्ति बनाने में जुट गयी है। ऐसा लगता है कि किसानों के ‘हल’ में कांग्रेस को अपनी समस्याओं का हल मिल गया है


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