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इराक़ चुनाव में कम्युनिस्टों ने बजाया जीत का ”साइरन”! मुक्तदा अल-सद्र के गठबंधन को 54 सीट

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इराक़ के संसदीय चुनाव में पूर्व शिया मिलिशिया प्रमुख मुक्तदा अल-सद्र के नेतृत्व वाले कम्युनिस्ट गठबंधन को जीत मिली है। दिसंबर में कथित चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट पर जीत की घोषणा के बाद इराक़ में यह पहला चुनाव था. अल-सद्र के नेतृत्व में 6 दलों वाले गठबंधन अलायन्स ऑफ़ रिवोल्यूशनरी फॉर रिफार्म (साइरन) जिसमें इराकी कम्युनिस्ट पार्टी प्रमुख है ने 54 सीटें जीती हैं और मौजूदा प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी 42 सीटों के साथ तीसरे नंबर पर हैं. स्पष्ट जीत का जश्न मनाने के लिए इराकी लोगों ने बगदाद के तहरीर स्क्वायर में प्रवेश किया, उन्होंने कहा: “ईरान बाहर है, इराक मुक्त है” और “अलविदा माली”।

 

 

इराक के चुनावों में कम्युनिस्ट गठबंधन की जीत ने देश की राजनीति के बारे में धारणाओं को बदलकर रख दिया है और भ्रष्टाचार-अक्षमता के रूप में प्रसिद्ध इराक़ी राजनीतिक प्रतिष्ठान टूट गए हैं। इतिहास रचते हुए इराक के शिया इस्लामी धर्मशास्त्र के सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों में एक पवित्र शहर नजफ़ से कम्युनिस्ट पार्टी की सुहाद अल-खतीब इराक की पहली महिला संसद बनी है। गरीबों की हमदर्द खतीब जो एक शिक्षक और महिला अधिकार कार्यकर्ता हैं, ने कहा “कम्युनिस्ट पार्टी की इराक में ईमानदारी भरा लम्बा इतिहास है, हम अमेरिका और विदेशी पूंजीपतियों के एजेंट नहीं हैं। हम सामाजिक न्याय, नागरिकता चाहते हैं और सांप्रदायिकता के खिलाफ हैं और यही इराक़ियों को भी चाहिए। लोग स्कूल में मेरे पास गए। उन्होंने मुझे देखा और मुझे एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा कि राजनेता कैसे होना चाहिए। मैंने 2014 चुनाव में भाग नहीं लिया था, लेकिन मैं एक ऐसे समूह का हिस्सा थी जो पूरे नजफ के लोगों का दौरा करता था। हम उनसे उनकी समस्याओं को सुनने और नजफ और गरीब इलाकों की झोपड़ियों में उनकी मदद करने के लिए गए थे। मेरे सहयोगी, जो विभिन्न राजनीतिक दलों का समर्थन करते हैं वो मेरा सम्मान करते हैं और मेरा समर्थन करते हैं।”

 

कम्युनिस्ट पार्टी की सुहाद अल-खतीब इराक की पहली महिला संसद बनी हैं

 

 

कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख और गठबंधन के लिए एक संसदीय उम्मीदवार रेड जाहेद फाहमी ने बताया कि “हमारे कार्यक्रम का उद्देश्य हर नागरिक के राज्य का निर्माण है, एक ऐसा राज्य जो सामाजिक न्याय की दिशा में बनाई गई नीतियों के साथ एक स्वतंत्र इराक, एक संप्रभु इराक है जो अपने आंतरिक मामलों में किसी भी विदेशी शक्ति के दखल के खिलाफ है।”

मुक्तदा अल-सद्र और उनके सहयोगियों के लिए अगला कदम सरकार बनाना है, जो 90 दिनों के भीतर किया जाना चाहिए। लंबे समय तक अमरीका के विरोधी रहे सद्र ख़ुद प्रधानमंत्री नहीं बन सकते हैं, क्योंकि वो प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में खड़े नहीं हुए थे, हालांकि इराक़ में नई सरकार के गठन में उनकी अहम भूमिका होगी। साल 2003 में इराक़ में अमरीकी हमलों के दौरान सद्र की पहचान एक निजी सेना के प्रमुख के तौर पर अमरीकी सेना को चुनौती देने वाले के रूप में थी।

 

 

सद्र ने इराक़ में ख़ुद को भ्रष्टाचार विरोधी नेता के तौर पर स्थापित किया। सद्र ईरान के भी मुखर आलोचक रहे हैं। उन्होंने कहा “कम्युनिस्टों और धर्मनिरपेक्ष इराकियों के साथ गठबंधन इराक में किसी भी विदेशी हस्तक्षेप का जोरदार विरोध करता है। हमने गरीबों की मदद करने और इराक में स्कूलों और अस्पतालों का निर्माण करने का वादा किया है, जो आईएस को हराने के लिए युद्ध में मारा गया था और कम तेल की कीमतों से पीड़ित है।”

इराक़ में जो भी नई सरकार बनेगी उसकी बड़ी ज़िम्मेदारी इस्लामिक स्टेट से लड़ाई में हुई बेइंतहा बर्बादी के बाद मुल्क़ को पटरी पर लाना रहेगी।

 

 

 


संदीप राउजी की फेसबुक दीवार से राजेश सुचान की टिपण्णी 

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