Home ख़बर पश्चिम बंगाल: निजीकरण के खिलाफ ‘लॉन्ग मार्च’ को मिल रहा भारी जनसमर्थन

पश्चिम बंगाल: निजीकरण के खिलाफ ‘लॉन्ग मार्च’ को मिल रहा भारी जनसमर्थन

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निजीकरण विरुद्ध चित्तरंजन से कोलकाता में राजभवन तक ट्रेड यूनियनों के लॉन्ग मार्च का आज 7 वां दिन है। बीते कल, मार्च ने 137 किलोमीटर की यात्रा तय कर लिया था। पश्चिम बर्धमान के चित्तरंजन से शुरू हुआ यह लॉन्ग मार्च 11 दिसंबर को कोलकाता पहुंच जाएगा। उसके बाद राजभवन में राज्यपाल को मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ एक ज्ञापन सौंपा जायेगा।

आईएनटीयूसी, सीटू, एआईटीयूसी, सीएमएस, एचएमएस, एआईवाईऍफ़, एनऍफ़आईआर,सीयूसीसी समेत दर्जन भर श्रमिक संगठन ने केंद्र के विरुद्ध इस मार्च का आयोजन किया है।

कोलकाता में केन्द्रीय ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों का महाजुटान होगा। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य है निजीकरण,शिक्षा, महंगाई, एनआरसी, बेरोजगारी, एफडीआई का विरोध करना है।

चित्तरंजन रेल इंजन कारखाना का निजीकरण एवं बंद हिंदुस्तान केबल्स कारखाना मुद्दा भी इसमें शामिल है।

30 नवंबर को चित्तरंजन रेल इंजन कारखाना के महाप्रबंधक के कार्यालय के बाहर से शुरू हुआ यह विरोध मार्च बिना रुके पूरे जोश के साथ अपने गंतव्य की ओर अग्रसर है।

इस मार्च में लेफ्ट और कांग्रेस से जुड़े ट्रेड यूनियन मुख्य रूप से शामिल हैं।

इस विरोध मार्च का सबसे सुंदर पक्ष यह है कि इसे आम लोगों का भरपूर समर्थन मिल रहा है।

यात्रा दौरान सड़क किनारे छोटे-छोटे बच्चे -बच्चियां यात्रियों को अपनी स्कूल की पानी बोतल से पानी पिला रहे हैं।

इस लॉन्ग मार्च की कुछ और तस्वीरें देखिये :

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