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वर्धा : PM को चिट्ठी लिखने वाले हिंदी विश्वविद्यालय के 6 छात्र निष्कासित

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वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय ने 6 छात्रों को निष्कासित कर दिया है. इन सभी छात्रों को धरना-प्रदर्शन में भाग लेने के आरोप में निष्कासित किया गया है. हिंदी विश्वविद्यालय के सौ से अधिक छात्र-छात्राओं ने 9 अक्टूबर को देश की मौजूदा समस्याओं को लेकर पीएम मोदी को एक पत्र लिखा था जिसके जवाब में यह कदम उठाया गया है।  

विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीएम मोदी को पत्र लिखने छात्रों को रोका था जिसके खिलाफ छात्र-छात्राओं ने प्रतिरोध सभा की थी. इसी सभा के बाद छह छात्रों को निष्काषित किये जाने का आदेश जारी हो गया.

महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के प्रशासन ने बीते 7 अक्टूबर को नोटिस जारी कर परिसर में धरना-प्रदर्शन पर प्रतिबन्ध लगा दिया था. नोटिस विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार द्वारा जारी किया गया था। नोटिस में केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन एवं हड़ताल पर बैठना निषिद्ध किया गया था।

दूसरे पैरा के मुताबिक प्राधिकारी के संज्ञान में यह आया है कि ‘कतिपय’ विद्यार्थियों/शोधार्थियों द्वारा अनेक कार्यक्रम प्रशासन की बिना अनुमति के कार्यक्रम आयोजित कराए जाते हैं. विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्र/छात्राओं को धमकी देते हुए फरमान सुनाया जाता है कि बिना अनुमति किसी भी कार्यक्रम का आयोजन न करें, यदि ऐसा किया गया तो सम्बन्धितों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय बीते कुछ वर्षों से लगातार सुर्ख़ियों में है. यहां छात्र लगातार प्रशासन की मनमानी, प्रवेश प्रक्रिया में गड़बड़ी, जातीय भेदभाव की शिकायत करते हैं. हाल ही में एक छात्रा ने प्रशासन की मनमानी से तंग आकर आत्महत्या की कोशिश की थी.

महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले की श्वेता भेंडारकर ने एमए जनसंचार में प्रवेश के लिए 2750 रुपये फीस जमा की थी। उन्हें हॉस्टल भी अलॉट हो गया था। श्वेता प्रवेश लेने के कुछ दिन बाद क्लास करने आयीं तो सुबह की पहली रेडियो की क्लास के बाद उन्हें दूसरी क्लास में नहीं बैठने दिया गया। श्वेता से कह दिया जाता है कि तुम्हारा प्रवेश कैंसल कर दिया गया है। श्वेता ने कारण पूछा तो पता चला एमए की प्रवेश परीक्षा दुबारा कंडक्ट कराई गई थी। उसमें वह मौजूद नहीं थीं इसलिए उनका नाम काट दिया गया।

उन्हें कोई कुलसचिव के पास भेजता है, कोई एचओडी के पास तो कोई कुलपति के पास। श्वेता दिनभर ऑफिस-ऑफिस का चक्कर लगाती रहीं। कुलपति रजनीश शुक्ल के पास श्वेता गयीं तो कुलपति उल्टा-सीधा बोलने लगे और डांटकर ऑफिस से भगा दिए.

इसके बाद श्वेता ने कुलपति को एक पत्र लिखा जिसे नीचे पढ़ा जा सकता है:

सेवा में,
कुलपति जी
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय
जनसंचार विभाग,
वर्धा

विषय- प्रवेश शुल्क प्राप्त न होने के कारण शिकायत पत्र.

महोदय,

मैं श्वेता भेंडारकर नागभीड़ जिला चंद्रपुर की रहवासी हूँ. आपके विश्वविद्यालय में मैंने एम ए जनसंचार में (12/07/2019) को प्रवेश ले लिया था. परंतु मुझे कोई भी पूर्वसूचना न देते हुए मेरा प्रवेश रद्द कर दिया गया. प्रवेश शुल्क 2700 रुपये अभी तक मुझे वापस नहीं किया गया.

मेरे पिताजी किसान हैं. हमेशा पैसों की तंगी रहती है. इस कारण मेरे सभी आवश्यक काम रुक गए हैं. विश्वविद्यालय के ऐसे गैरजिम्मेदाराना व अयोग्य लोगों के काम करने की प्रक्रिया से मानसिक रूप से बहुत ही परेशान हो चुकी हूं. इसलिए आत्महत्या करना ही एकमात्र रास्ता है.

जल्द से जल्द मेरा प्रवेश शुल्क एक दिन के अंदर वापस किया जाय. मानसिक रूप से परेशान होकर यदि मैं आत्महत्या करती हूँ तो इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलपति जिम्मेदार होंगे.

आपकी कृपाभिलाषी
श्वेता भेडारकर


(मूल पत्र मराठी से हिंदी अनुवाद गौरव गुलमोहर ने किया है)