कोवैक्सीन घोटाला: ब्राज़ील में प्रदर्शनों की बाढ़, राष्ट्रपति बोल्सनारो के ख़िलाफ़ जाँच के आदेश!


ब्राज़ील की सरकार कोवैक्सीन घोटाले की जाँच से लगातार इंकार कर रही थी, लेकिन अब जस्टिस रोज़ा वेबर ने प्रोसीक्यूटर जनरल ऑफिस (PGR) को राष्ट्रपति बोल्सनारो के ख़िलाफ़ शुक्रवार को जाँच के आदेश दे दिये। बहरहाल, विवाद को देखते हुए इस डील को फिलहाल निलंबित कर दिया गया है, लेकिन अब यह पटरी पर आयेगी, इसकी उम्मीद बेहद कम है। इस मुद्दे ने राजनीतिक मोड़ ले लिया है और वामपंथी और दक्षिणपंथी पार्टियाँ एक साथ बोल्सनारो के ख़िलाफ सड़क पर हैं ताकि लोकतंत्र बच सके।


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ब्राज़ील में भारत से हुई कोवैक्सीन डील बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। 3 जुलाई को 350 शहरों में राष्ट्रपति जेयर बोल्सनारो पर महाभियोग चलाने की माँग को लेकर लाखों लोग सड़क पर उतरे। यह मामला इसलिए भी गंभीर हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति बोल्सनारो के ख़िलाफ़ आपराधिक जाँच के आदेश दे दिये हैं। इन प्रदर्शनो में बार-बार भारत के पीएम मोदी और कोवैक्सीन का ज़िक़्र आ रहा है। यह ‘कोवैक्सीनगेट’ के रूप में मीडिया में सुर्खियाँ पा रहा है।

बोल्सनारो पर आरोप है कि उन्होंने भारत बायोटेक की कोवैक्सीन की दो करोड़ डोज़ के लिए एक ऐसा सौदा किया जो भ्रष्टाचार में लिप्त था। इसके लिए उन्होंने भारत के पीएम मोदी से भी बात की। भारत बायोटेक की एक शेल कंपनी को 45 मिलियन डॉलर एडवांस दिलाने की कोशिश की जबकि उसका नाम भी कांट्रैक्ट में नहीं था। यह सरकारी ख़ज़ाने में डाका डालने जैसी बात थी। हैरानी की बात ये है कि ब्राज़ील की दवा नियंत्रक संस्था ने कोवैक्सीन को गुणवत्ता की कसौटी पर खरा न पाते हुए ख़ारिज कर दिया था और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे मंज़ूरी नहीं दी है, फिर भी बोल्सनारो ने इस सौदे को लेकर अतिरिक्त रुचि दिखायी।

ब्राज़ील की सरकार कोवैक्सीन घोटाले की जाँच से लगातार इंकार कर रही थी, लेकिन अब जस्टिस रोज़ा वेबर ने प्रोसीक्यूटर जनरल ऑफिस (PGR) को राष्ट्रपति बोल्सनारो के ख़िलाफ़ शुक्रवार को जाँच के आदेश दे दिये।

बहरहाल, विवाद को देखते हुए इस डील को फिलहाल निलंबित कर दिया गया है, लेकिन अब यह पटरी पर आयेगी, इसकी उम्मीद बेहद कम है। इस मुद्दे ने राजनीतिक मोड़ ले लिया है और वामपंथी और दक्षिणपंथी पार्टियाँ एक साथ बोल्सनारो के ख़िलाफ सड़क पर हैं ताकि लोकतंत्र बच सके।

ब्राज़ील में हुए प्रदर्शनों में बोल्सनारो को कोरोना से ज़्यादा घातक वायरस बताया जा रहा है जो देश को तानाशाही की ओर ले जा रहे हैं। बोस्लनारो की ओर से लगातार सत्ता न छोड़ने की बात कही जा रही है, यहाँ तक कि सैन्य ताक़त के इस्तेमाल की भी आशंका जतायी जा रही है।

इस मुद्दे पर ब्राज़ील की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले शहर साओ पाउलो में रह रहे भारतीय पत्रकार शोभन सक्सेना लगातार लिख रहे हैं। कुछ दिन पहले उनसे मीडिया विजिल ने विस्तार से बात की थी जिसे आप नीचे की लिंक पर क्लिक करके सुन सकते हैं।

ब्राज़ील में छाया कोवैक्सीन ख़रीद ‘घोटाला’ पर भारतीय मीडिया के मुँह पर ताला!


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