भाकियू – भानु ने सरकार के साथ अलग से कर ली ‘डील’, चिल्ला सीमा से आंदोलन वापस लिया

मयंक सक्सेना मयंक सक्सेना
ख़बर Published On :


आखिरकार केंद्र सरकार के भोंपू समाचान मीडिया को एक ख़बर नसीब हो गई है, जिससे वे 18 दिन से चल रहे किसान आंदोलन की छवि को मलिन करने की नई कोशिशों पर काम कर सकते हैं। किसानों के अपेक्षाकृत छोटे और आंदोलन की शुरूआत तक इससे अलग रहे, भारतीय किसान यूनियन के ‘भानु’ (भानु प्रताप सिंह) धड़े ने सरकार से ‘डील’ कर ली है। इसके बाद भाकियू-भानु के नेतृत्व में दिल्ली और नोएडा के चिल्ला बॉर्डर पर बैठे किसान, वहां से हट गए हैं और सड़क को खोल दिया गया है। हालांकि कई मीडिया संस्थान इसे कृषि कानून के विरोध में चल रहा ‘यूपी के किसानों का आंदोलन खत्‍म होना’ बता रहे हैं। जबकि सच ये है कि केवल चिल्ला सीमा पर बैठे, भाकियू के एक धड़े के किसान ही आंदोलन से पीछे हटे हैं।

चिल्ला बॉर्डर से अवरोधक हटाते पुलिसकर्मी, सौ.-ANI

इस मामले में ख़बर ये है कि भारतीय किसान यूनियन – भानु के अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह और उनके संगठन के कुछ और पदाधिकारी बीती रात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिले।  किसानों और सरकार के बीच कृषि आयोग के गठन को लेकर सहमति बनी है। इस बैठक में 18 सूत्रीय मांग रखी गई, जिसमें कृषि आयोग के गठन की मांग तो रखी गई लेकिन एमएसपी को लेकर कोई मांग नहीं की गई। यानी कि कृषि बिल को लगभग जस का तस रखने के लिए भारतीय किसान यूनियन – भानु तैयार हो गई। बताया जा रहा है कि सरकार ने कृषि आयोग के गठन की मांग मान ली है।

ये भी बता दें कि भारतीय किसान यूनियन – भानु ने ही सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को दाखिल याचिका में कृषि क़ानूनों को किसानों के लिए अहितकारी और कॉरपोरेट के लाभ में बताया था। कुछ ही घंटे में कृषि बिल को लेकर, सरकार के बिना कोई बदलाव किए, भाकियू – भानु की धारणा कैसे बदल गई, इस बारे में संगठन के पदाधिकारी ही कोई उत्तर दे सकते हैं। लेकिन फिलहाल मुख्यधारा की मीडिया को मसाला मिल गया है और वह आपको लगातार इस ख़बर को पूरे यूपी के किसानों के आंदोलन वापस लेने की ख़बर की तरह दिखाएगा-छापेगा।

नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर इस आंदोलन में शामिल संगठनों में से एक के नेता ने मीडिया विजिल को बताया है कि भानु प्रताप सिंह और उनके संगठन का कोई भी व्यक्ति, इस आंदोलन की शुरूआत से न तो साथ था और न ही अभी तक की आंदोलन की किसी भी बैठक में ये संगठन शामिल हुआ था।


मीडिया विजिल जनता के दम पर चलने वाली वेबसाइट है। आज़ाद पत्रकारिता दमदार हो सके, इसलिए दिल खोलकर मदद कीजिए। अपनी पसंद की राशि पर क्लिक करके मीडिया विजिल ट्रस्ट के अकाउंट में सीधे आर्थिक मदद भेजें।

Related



मीडिया विजिल से जुड़ने के लिए शुक्रिया। जनता के सहयोग से जनता का मीडिया बनाने के अभियान में कृपया हमारी आर्थिक मदद करें।