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विनोद दुआ के ख़िलाफ़ बीजेपी ने दर्ज कराई FIR, दंगों को लेकर सरकार पर उठाये थे सवाल

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मशहूर टीवी पत्रकार विनोद दुआ के ख़िलाफ़ क्राइम ब्रांच में एफआईआर दर्ज करायी गयी है। बीजेपी के प्रवक्ता नवीन कुमार की ओर से दर्ज करायी गयी इस एफआईआर के मुताबिक विनोद दुआ समाज का ताना-बाना बिगाड़ रहे हैं और फ़ेक न्यूज़ फैलाते हैं। विनोद दुआ ने इसकी सूचना खुद फेसबुक पर दी है।

नवीन कुमार, बीजेपी में शामिल होने के पहले खुद टीवी पत्रकार थे और ज़ी न्यूज़ में काम करते थे। उन्होंने यूट्यूब पर आने वाले विनोद दुआ शो के एपीसोड 245 को एफआईआर का आधार बनाया है जिसमें दिल्ली दंगों में पुलिस और सरकार की भूमिका पर तीखे सवाल उठाये गये थे।

 

वैसे, विनोद दुआ का कहना है कि उनसे क्राइम ब्रांच ने इस सिलसिले में अब तक संपर्क नहीं किया है, लेकिन नवीन कुमार इसका काफी प्रचार कर रहे हैं। इस मसले पर उन्होंने फेसबुक लाइव भी किया जो वॉल पर सबसे ऊपर पिन है।

 

बहरहाल, इस ख़बर से पत्रकारों के बीच काफी रोष है। विनोद दुआ कुछ इने-गिने टीवी पत्रकारों में हैं जो सरकार से सीधे सवाल पूछते हैं। स्वराज एक्सप्रेस चैनल पर उनका विनोद दुआ लाइव भी काफी लोकप्रिय है। जब ज्यादातर लोगों ने सरकार के खिलाफ बोलना कुफ्र मान लिया है तो विनोद दुआ हर मंच पर सवाल उठाने का पत्रकारीय दायित्व निभाते नज़र आते हैं। हाल के दिनों में बीजेपी के छुटभैये नेताओं की ओर से विरोधी दल के नेताओं के खिलाफ किसी मुद्दे के बहाने एफआईआर दर्ज कराने का चलन देखा जा रहा है, लेकिन अब पत्रकार भी निशाने पर आ गये हैं। जबकि हकीक़त ये है कि वे सबसे ज़्यादा प्रसन्न उन टीवी पत्रकारों से रहते हैं जिन्होंने टीवी पत्रकारिता का मतलब ही सांप्रदायिक उन्माद फैलाना बना दिया है।

बहरहाल, सबकी नज़र अब इस बात पर है कि क्राइम ब्रांच कार्रवाई क्या करती है। पद्मश्री से सम्मानित विनोद दुआ,भारत की टीवी पत्रकारिता के शुरुआती चेहरों में हैं।

 


 

3 COMMENTS

  1. कमाल है! जो सरेआम गोली मरो का नारा लगाते है वो सामाजिक सौहार्द का कलमा पढ़ रहे हैं। लेकिन जो उन पर सवाल उठाते हैं वो सामाजिक सौहार्द बिगाड़ रहे हैं। ऐसे लोगों की सनक सिर्फ इसलिए जारी हैं क्योंकि उन्हें चाटुकारिता में नंबर वन की उपाधि पानी है और उससे मिलने वाला प्रसाद ग्रहण करना है।

  2. जेएनयू प्रकरण पर एक जी न्यूज़ पत्रकार ने कैसे जी न्यूज़ को ” छी
    न्यूड ” कहा था यह कम से कम इन पत्रकार महोदय को नहीं बोलना चाहिए था ।

  3. पत्रकारिता भी बड़े कठिन दौर से गुजर रही है। पत्रकारों का एक वर्ग पत्रकारिता को विशुद्ध व्यापार मानकर चल रहा है । जिस खबर से इनकी आय बढ़ जाय ,उसको प्रसारित करने में ऐसे पत्रकारों को कोई परेशानी नहीं है। जिस प्रकार आर्ट फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कम कमाई करती है उसी प्रकार यदि ये सच्चाई के बल पर ही पत्रकारिता करें तो इनके उद्देश्यों कि पूर्ति नहीं होगी। फिर जब इसके साथ ये समझोता कर पैसा कमाने ही लग गए है तो फिर एक कदम आगे बढ़कर पैसे लेकर झूठी खबरों को फैलाने में भी इन्हे परहेज नहीं है। अब चूंकि भारत की राजनीति में भी झूट और फरेब का अपना स्थान है तो ये उनके कामों को कर के भी पैसा बनाने में लगे है।इसलिए चोतरफा फायदे की वजह से ये बड़े शक्तिशाली हो गए है।इसके विपरीत सच्ची पत्रकारिता वाले पत्रकार कमजोर होते जा रहे है। यदि ये सारे पत्रकार एक संगठित रूप में काम नहीं करेंगे तो भारत में पत्रकारिता सदा के लिए नहीं तो कम से कम पच्चीस तीस सालों तक विलुप्त अवश्य हो जाएगी। और तब तानाशाही, अराजकता, विलासिता और अत्याचार का ही साम्राज्य फलेगा, फूलेगा।

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