बीजेपी ने वरुण गांधी और मेनका गांधी को कार्यकारिणी से हटाया, किसानों के हक़ के लिए उठाई थी आवाज़!

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वरुण गांधी और उनकी मां मेनका गांधी को भारतीय जनता पार्टी की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी से हटा दिया गया है। लखीमपुर खीरी में तीन अक्तूबर को हुई हिंसा के बाद से भाजपा सांसद वरुण गांधी लगातार किसानों के समर्थन में ट्वीट कर रहे हैं। आज भी उन्होंने लखीमपुर की घटना की वीडियो ट्वीट की थी जिसके बाद यह कदम उठाया गया है शायद बीजेपी ने उनको इसी की सज़ा दी है।

दोषियों को सज़ा दिलाने की की थी मांग..

बता दें की वरुण गांधी इस संबंध में योगी सरकार को खत भी लिख चुके हैं और पीड़ित परिवारों के लिए इंसाफ की मांग कर चुके हैं। गुरुवार को बीजेपी सांसद ने लखीमपुर घटना को लेकर एक और वीडियो ट्वीट कर किसानों को निशाना बनाए जाने को लेकर नाराजगी जताई और दोषियों को सज़ा दिलाने की मांग की है।

उन्हीं ट्वीट में लिखा, वीडियो बिल्कुल साफ है। हत्या के जरिए प्रदर्शनकारियों को चुप नहीं कराया जा सकता। गिराए गए किसानों के निर्दोष खून के लिए जवाबदेही होनी चाहिए और अहंकार और क्रूरता का संदेश हर किसान के दिमाग में आने से पहले न्याय दिया जाना चाहिए।

5 अक्तूबर को भी जताया था दुख..

इससे पहले वरुण ने 5 अक्तूबर को इस घटना का वायरल विडियो जो बहुत साफ नही था लेकिन दावा था की लखीमपुर घटना का है उसे शेयर कर ट्वीट किया था कि, ”लखीमपुर खीरी में किसानों को गाड़ियों से जानबूझकर कुचलने का यह वीडियो किसी की भी आत्मा को झखझोर देगा। पुलिस इस वीडियो का संज्ञान लेकर इन गाड़ियों के मालिकों, इनमें बैठे लोगों, और इस प्रकरण में संलिप्त अन्य व्यक्तियों को चिन्हित कर तत्काल गिरफ्तार करे।”

घटना के बाद लिखा था सीएम योगी को खत..

घटना के दूसरे दिन ही वरुण ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे खत की कॉपी शेयर करते हुए ट्वीट किया था, ”लखीमपुर खीरी की हृदय-विदारक घटना में शहीद हुए किसानों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। इस प्रकरण में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी से सख्त कार्यवाही करने का निवेदन करता हूं।”

इन सारे ट्वीट्स और किसानों के हक में आवाज़ उठाने के बाद वरुण गांधी और उनकी मां को बीजेपी की राष्‍ट्रीय कार्यकारिणी से हटा दिया गया है। बताते चले की घटना 3 अक्टूबर को हुई थी 3 से 7 अक्टूबर तक ( खबर लिखे जाने तक) किसी भी अपराधी की गिरफ्तारी नहीं हुई है मामले में नामजद मंत्री के बेटे पर एफआईआर तो हुई है लेकिन पूछताछ और गिरफ्तारी नहीं। इसके उलट बीजेपी अपने ही नेताओं को किसानों के लिए इंसाफ मांगने पर सज़ा दे रही है।