भोपाल: ICU में लगी आग से चार बच्चों की मौत, मौत के आंकड़े छुपाने का आरोप, आग बुझाने के उपकरण फेल!

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सोमवार की रात करीब नौ बजे भोपाल के हमीदिया अस्पताल कैंपस के कमला नेहरू अस्पताल में आग लग गई। कमला नेहरू अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में आग लग लगी थी। मौके पर दमकल की करीब 8-10 गाड़ियां पहुंची और आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक यहां भर्ती चार बच्चों की मौत हो गई। वहीं, परिजनों ने अस्पताल द्वारा बताए मौत के आंकड़ों पर सवाल खड़े लिए है।

शॉर्ट सर्किट से दो वेंटिलेटर में लगी आग..

अस्पताल के ICU वॉर्ड के तीसरी मंजिल में 40 बच्चे भर्ती थे, 40 बच्चों में से 36 बच्चों को वहां से निकाला गया, लेकिन 4 बच्चों की जान नहीं बच पाई, 36 बच्चों में से भी कई की हालत गंभीर है। इस बीच कमला नेहरू अस्पताल के बाहर बच्चों के माता-पिता अपने बच्चो के लिए कई घंटों तक इंतजार करते रहें। सभी बच्चे अस्पताल के आईसीयू वार्ड की तीसरी मंजिल में  भर्ती थे, रात करीब नौ बजे शॉर्ट सर्किट से दो वेंटिलेटर में आग लग गई और फिर विस्फोट हो गया। सभी मासूम बच्चों को ऑक्सीजन पर डाला गया था।

आखिर किसकी लापरवाही से इतना बड़ा हादसा हुआ?

बच्चों के ICU वार्ड में एक दिन से एक महीने तक की उम्र वाले बच्चें थे। इन बच्चों की हालत पहले से ही बेहद नाजुक थी। इस नवजात बच्चों की जिंदगी अभी सही से शुरू भी नहीं हुई थी की वह इस दुर्घटना का शिकार हो गए। सवाल ये है कि जो बच्चे बोल कर अपनी तकलीफ भी बयां नहीं कर पाते थे उनके मामले में आखिर किसकी लापरवाही से इतना बड़ा हादसा हुआ? आखिर जब आग लगी तो उसे बुझाने के लिए क्या इंतजाम थे? अगर इंतजाम थे तो शुरुआत में अस्पताल प्रशान ने आग पर काबू क्यों नहीं किया? और अगर इंतजाम नही थे तो क्यों नही थे? ये सभी सवाल बेहद अहम है क्योंकि हमीदिया अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करने वाली यह पहली घटना नहीं है।

पिछले महीने भी लगी थी आग..

पिछले महीने भी हमीदिया अस्पताल में बन रही नई इमारत में आग लग गई थी और दमकल के देर से पहुंचने से नुकसान हुआ था। पिछली घटना में अगर जवाबदेही होती तो शायद अस्पताल प्रशान उससे सबक लेता और उसी समय आग पर काबू पाने की व्यवस्था करता और आज 4 नवजात बच्चों की जान नहीं जाती। इस मामले पर राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन इस पूरे मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव मोहम्मद सुलेमान की निगरानी में होगी।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहन ने इस घटना को लेकर ट्वीट करते हुए कहा- भोपाल के कमला नेहरू अस्पताल के चाइल्ड वार्ड में आग की घटना दुखद है। बचाव कार्य तेजी से हुआ। घटना की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। जांच एसीएस लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मोहम्मद सुलेमान करेंगे।

अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि अस्पताल के चाइल्ड वार्ड में आग की घटना बेहद दुखद है। बचाव कार्य तेजी से हुआ, आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश पहले से गंभीर रूप से बीमार होने पर भर्ती तीन बच्चों को नहीं बचाया जा सका।

मौत के आंकड़े छुपा रहा अस्पताल प्रबंधन…

इस हादसे को लेकर परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन मौत के आंकड़े कम बता रहा है। आरोप है कि मरने वाले बच्चों की संख्या तकरीबन 8 है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटना के एक प्रत्यक्षदर्शी, अस्पताल के कर्मचारी ने बताया कि आग रात करीब 8:15 बजे लगी, पहले हमने खुद आग पर काबू पाने की कोशिश की। फिर आग बुझाने के उपकरणों को प्रयोग किया, लेकिन वह विफल थे। 15 मिनट बाद फायर ब्रिगेड को फोन किया। 15 मिनट बाद दमकल पहुंची। कई परिवारों ने खुद शीशा तोड़ा और बच्चों को बाहर निकाला जिसके बाद परिजनों को गेट सील कर बाहर निकाल दिया गया और बच्चों को वार्ड नंबर 5 व नंबर 2 में शिफ्ट कर दिया गया। अगर अस्पताल के फायर इस्टिंगुइशर चल जाते तो शायद बच्चों की जान बच जाती।

जांच की जाएगी कि अग्निशमन यंत्र काम कर रहे थे या नहीं: CM

इस मामले पर मुख्यमंत्री चौहान ने कहा है कि इस बात की जांच की जाएगी कि उस समय हाइड्रेंट और अग्निशमन यंत्र काम कर रहे थे या नहीं।  जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।  दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।  वहीं कई मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि 7 बच्चों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए लाया गया है।  जबकि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक चार बच्चों की ही मौत हुई है। बता दे हादसे में एक दर्जन से अधिक नवजात झुलस गए हैं। इनमें से कुछ की हालत गंभीर है।  परिजनों ने भी आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया है। परिजनों का दावा है कि रात 2.30 बजे से मंगलवार सुबह तक अस्पताल प्रबंधन ने कई लोगों को बच्चों की मौत की जानकारी दी।

 


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