बंगाल में बीजेपी का खेला: मोदी की रैली में जाओ, हज़ार रुपये पाओ!


यह दिलचस्प बात है कि दिल्ली के हर चैनल और अख़बार के नुमाइंदे इन दिनों बंगाल में तैनात हैं, लेकिन खुली आँखों से दिखायी देने वाली ऐसी ख़बरें कहीं दिखायी नहीं देतीं। बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी ही नहीं, सबसे अमीर पार्टी भी है। शायद ही उसके कार्यकर्ता कहीं लोगों से चंदा माँगते देखे गये हों।


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प.बंगाल में सरकार बनाने के प्रधानमंत्री का दावे के पीछे उनका आत्मविश्वास हो सकता है, लेकिन उनकी रैलियों में लोगों को लाने के लिए बाक़ायदा पैसे दिये जा रहे हैं। बीते दिनों 1 अप्रैल को ज्वायनगर में हुई उनकी रैली में शामिल होने के लिए बाक़ायदा ग्रामीणों को एक हज़ार रुपये के कूपन दिये गये। यानी रैली में जाइये और लौटकर कूपन दिखाकर पार्टी से एक हज़ार रुपये ले लीजिए। दक्षिण परगना ज़िले के रायदिगी क्षेत्र के तमाम लोगों को ये कूपन बाँटे गये जहाँ 6 अप्रैल को वोट पड़े।

यह खुलासा द टेलीग्राफ अख़बार ने किया है। रिपोर्ट के मुताबिक रायदिघी के बीजेपी उम्मीदवार शांतनु बापुली ने पहले तो दावा किया कि ये कूपन डोनेशन यानी दान हैं, लेकिन जब कहा गया कि क्या ममता बनर्जी ने प.बंगाल को सोनार बंगाल बना दिया है कि वहाँ के ग़रीब किसान भी एक हज़ार का चंदा बीजेपी को दे सकते हैं, तो उन्होंने बात पलटी। नया तर्क ये दिया कि ये रैली में जनता को ले जाने वाली गाड़ियों के मालिकों को दिया था कि वे बाद में पार्टी से भुगतान ले लें। यानी इतना तो उन्होंने मान लिया कि ये कूपन दिखाकर पार्टी से भुगतान लिया जा सकता है। वैसे भी, इस कूपन पर कहीं भी डोनेशन नहीं लिखा हुआ है।

अख़बार के मुताबिक इस क्षेत्र के तमाम ग्रामीणों को तोहफे के रूप में ये कूपन बाँटे गये हैं। कहा गया है कि पार्टी को वोट देने के एवज़ में यह पहली किस्त भर है। आगे और भी बहुत कुछ मिलेगा।

ज़ाहिर है, सीपीएम और तृणमूल के नेता बीजेपी पर आक्रामक हैं और वोट ख़रीदने का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन राजनीति भी जारी है, सो टीएमसी का दावा है कि सीपीएम के लोग ही ये कूपन बंटवाने में मदद कर रहे हैं क्योंकि बीजेपी के पास ऐसा कर पाने का कोई तंत्र नहीं है।

यह दिलचस्प बात है कि दिल्ली के हर चैनल और अख़बार के नुमाइंदे इन दिनों बंगाल में तैनात हैं, लेकिन खुली आँखों से दिखायी देने वाली ऐसी ख़बरें कहीं दिखायी नहीं देतीं। बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी ही नहीं, सबसे अमीर पार्टी भी हो तो अचरज नहीं। शायद ही उसके कार्यकर्ता कहीं लोगों से चंदा माँगते देखे गये हों। पार्टी की सभाओं और आयोजनों में जमकर ख़र्च होता है। लेकिन कई रैलियाँ फ्लाप भी हुई हैं। पीएम मोदी के साथ ऐसा न हो, इसके लिए लगता है हर दाँव आज़माया गया। ये कूपन उसी की गवाही हैं।


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