गौरी लंकेश के बाद कथित हत्यारों के निशाने पर पूर्व जज कोलसे पाटिल

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पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या मामले में पिछले साल अक्टूबर में गिरफ्तार शरद कालसकर ने नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे की हत्याओं में भी शामिल होने की बात स्वीकार करने के साथ खुलासा किया है कि उसका अगला निशाना बाॅम्बे उच्च न्यायालय के पूर्व जज जस्टिस बीजी कोलसे पाटिल थे.

इस खुलासे के बाद डॉ.नरेंद्र दाभोलकर के साथ काम कर चुके जस्टिस पाटिल ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा कि इसमें कोई हैरानी नहीं है. यह हमारे लिए नया नहीं है, यह बात सभी जानते थे. उन्होंने कहा कि पुनालेकर ने उन्हें एक लाइव टीवी कार्यक्रम में धमकी दी थी और अक्सर पत्र भेज कर धमकी देते रहते थे, मैंने सब पत्र पुलिस को सौंप दिए हैं. न्यायमूर्ति पाटिल ने कहा कि इन धमकियों के बावजूद, उन्हें कोई सुरक्षा नहीं दी गई थी. यहां तक कि कालसकर द्वारा मेरे नाम का खुलासे होने के बाद भी किसी ने मुझे सुरक्षा देने के बारे में नहीं सोचा.जबकि नागपुर और फिर पुणे बार एसोसिएशन और अहमदनगर बार एसोसिएशन ने इसके खिलाफ आंदोलन किया.”

जस्टिस पाटिल ने कहा कि पिछले 3-4 महीने से उन्हें राज्य की विशेष सुरक्षा इकाई से एक सिपाही को उनकी सुरक्षा के लिए उनके घर पर तैनात किया गया है किन्तु वह सिर्फ घर तक ही है बाहर जाने के लिए उन्हें कोई सुरक्षा नहीं दी गई है.

खबरों के अनुसार, कालसकर का कहना है कि दाभोलकर पर गोली चलाने वाले दो लोगों में से एक वह खुद था. दाभोलकर की अगस्त 2013 में पुणे में हत्या हुई थी. कालसकर ने 14 पेजों के कबूलनामे में इन हत्याओं में शामिल होने का ब्योरा दिया है.
कालसकर का कहना है कि उसने दाभोलकर पर दो बार गोलियां चलाईं, जिसमें से एक गोली उनके सिर में लगी जबकि दूसरी आंख में लगी. उसने यह भी कहा कि हत्या से कई महीनों पहले दक्षिणपंथी समूह के सदस्यों ने उससे संपर्क किया था और बंदूकों का इस्तेमाल करने और बम बनाने का प्रशिक्षण दिया था. कालसकर के मुताबिक, इस हत्या के मुख्य आरोपी वीरेंद्र सिंह तावड़े  ने कहा था कि हमें कुछ बुरे लोगों को खत्म करना है.

कालसकर के कबूलनामे के मुताबिक, दाभोलकर के हत्यारों ने वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के लिए सितंबर 2017 में योजना बनाने में भी भूमिका निभाई थी और इसके लिए कई बार मीटिंग कर रणनीति तैयार की गई. दाभोलकर की हत्या में अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

दक्षिणपंथी हिंदू चरमपंथी समूह सनातन संस्था का नाम भी दाभोलकर, पानसरे, एमएम कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्याओं से जुड़ा हुआ है. लंकेश की हत्या में दर्ज की गई चार्जशीट में इन हत्याओं को सनातन संस्था द्वारा किया गया संगठित अपराध बताया गया है. इस मामले में सनातन संस्था से संबद्ध जनाजागृति समिति के पुणे के पूर्व संयोजक अमोल काले को मुख्य आरोपी बताया गया है. कालसकर के कबूलनामे के मुताबिक, दाभोलकर की हत्या के बाद तावड़े ने ही उसे काले से मिलाया था.


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