‘लव जिहाद’ से वोट दुहने को झटका: हाईकोर्ट ने अंतर्धार्मिक विवाह को बताया मौलिक अधिकार!


कोर्ट के इस रुख से यूपी की योगी सरकार को तगड़ा झटका लगा है जो लव जिहाद के मुद्दे पर क़ानून बनाने की तैयारी कर रही है। इधर कानपुर में कथित लव जिहदा से जुड़े 14 मामलों की जाँच के  बाद पुलिस ने कहा है कि  उसे ज़बरदस्ती धर्मांतरण या फिर विदेशी फंडिंग का कोई सुबूत नहीं मिला जैसा कि आरोप लगाया गया था। 


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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में कहा है कि दूसरे धर्म के किसी व्यक्ति के साथ शादी करना नागरिक का मौलिक अधिकार है। यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का मूल तत्व है। कोर्ट ने कहा है कि क़ानून हर व्यक्ति को पसंद के शख्स के साथ, चाहे वह समान लिंग का ही क्यों न हो, रहने का इजाज़त देता है तो फिर व्यक्ति, परिवार, समाज या राज्य को रिश्ते पर आपत्ति करने का कोई अधिकार नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि दो लोग जो अपनी स्वतंत्र इच्छा से साथ रह रहे हैं, उस पर आपत्ति करने का किसी को अधिकार नहीं है। कोर्ट ने हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकल पीठ द्वारा प्रियांशी उर्फ समरीन और नूरजहां बेगम उर्फ अंजली मिश्रा के केस में दिए गए फैसलों से असहमति जताते हुए कहा कि इन दोनों मामलों में दो वयस्क लोगों द्वारा अपनी मर्जी से अपना साथी चुनने और उसके साथ रहने की स्वतंत्रता के अधिकार पर विचार नहीं किया गया है। कोर्ट ने कहा कि यह फैसले सही कानून नहीं हैं।

कुशीनगर के विष्णु पुरी निवासी सलामत अंसारी और प्रियंका खरवार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला न्यायमूर्ति पंकज नकवी और न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की पीठ ने दिया। याची का कहना था कि वह दोनों बालिग हैं और 19 अक्टूबर 2019 को उन्होंने मुस्लिम रीति रिवाज से निकाह किया है। इसके बाद प्रियंका ने इस्लाम को स्वीकार कर लिया है और एक साल से वह दोनों पति-पत्नी की तरह रह रहे हैं। प्रियंका के पिता ने इस रिश्ते का विरोध करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है, जिसके खिलाफ उन्होंने याचिका दाखिल की थी।

याचिका का विरोध करते हुए प्रदेश सरकार की ओर से कहा गया कि सिर्फ शादी के लिए धर्म परिवर्तन करना प्रतिबंधित है और ऐसे विवाह की कानून में मान्यता नहीं है। कोर्ट का कहना था कि हम इनको हिंदू- मुस्लिम की नजर से नहीं देखते। यह दो बालिग लोग हैं, जो अपनी मर्जी और पसंद से पिछले एक वर्ष से साथ रह रहे हैं और व्यक्तिगत रिश्तों में हस्तक्षेप करना व्यक्ति की निजता के अधिकार में गंभीर अतिक्रमण है, जिसका कि उसे संविधान के अनुच्छेद 21 में अधिकार प्राप्त है।

ज़ाहिर है, कोर्ट के इस रुख से यूपी की योगी सरकार को तगड़ा झटका लगा है जो लव जिहाद के मुद्दे पर क़ानून बनाने की तैयारी कर रही है। इधर कानपुर में कथित लव जिहदा से जुड़े 14 मामलों की जाँच के  बाद पुलिस ने कहा है कि  उसे ज़बरदस्ती धर्मांतरण या फिर विदेशी फंडिंग का कोई सुबूत नहीं मिला जैसा कि आरोप लगाया गया था।


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