दिल्ली दुर्ग के हर बुर्ज़ पर किसानों का क़ब्ज़ा, घिर गयी मोदी सरकार

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 कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ नौ दिन से डटे आंदोलनकारी किसानो ने  दिल्ली को चारो तरफ़ से घेर लिया है। पुलिस-प्रशासन के तमाम इंतज़ाम बेमानी साबित हो रहे हैं। गुरुवार को चौथे दौर की वार्ता के नाकाम होने के बाद किसानों ने अपना दबाव और बढ़ा दिया है। कई राज्यों से किसानों के जत्थे लगातार दिल्ली पहुँच रहे हैं। दिल्ली की लगभग सभी सीमाएँ सील कर दी गयी हैं। सिंघु, चिल्ला, टिकरी, गाज़ीपुर बॉर्डर बंद होने के बाद एनसीआर के लोगों के लिए दिल्ली आने जाने के बेहद कम रास्ते बचे हैं।

सरकार ने वार्ता में तमाम प्रेजेंटेशन देकर कृषि क़ानून के फायदे गिनाने की कोशिश की, लेकिन तमाम बारीक़ियों पर तैयारी करके गये किसानों ने उनकी एक न सुनी। उनका साफ़ कहना है कि बिना कृषि क़ानून रद्द कराये वे दिल्ली छोड़कर जाने वाले नहीं हैं। प्रधानमंत्री मोदी और दूसरे नेताओं ने जिस तरह से किसानों के गुमराह होने का बयान दिया है, इससे वे और भड़के हुए हैं। उन्हें सरकार की नीयत पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है। बीजेपी समर्थकों की ओर से खालिस्तानी बताने के अभियान ने पंजाब के किसानो को ख़ासतौर पर ख़फ़ा किया है। अब पूरे देश के किसान जिस तरह आंदोलन में हिस्सा लेने दिल्ली पहुँच रहे हैं, उसने एक अभूतपूर्व दृश्य पैदा कर दिया है। किसान मोदी सरकार को कॉरपोरेट के हित में नीतियाँ बनाने का आरोप लगा रहे हैं।

नतीजा ये है कि दिल्ली जाने वाले हर रास्ते पर किसानों का क़ब्ज़ा है। सिंघु सीमा, उत्तरी दिल्ली को सोनीपत और जीटी करनाल हाइवे से जोड़ती है, जिसका इस्तेमाल हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जाने के लिए होता है। टिकरी बॉर्डर, पश्चिमी दिल्ली के मुंडका को हरियाणा के रोहतक से जोड़ता है। चिल्ला और ग़ाज़ीपुर सीमा राजधानी दिल्ली को नोएडा और ग़ाज़िायाबाद से जोड़ती है। पर सभी सीमाएँ किसानों के क़ब्ज़े में हैं।

दिल्ली पुलिस के एपीआरओ अनिल मित्तल ने दिल्ली के कई एंट्री प्वाइंट को बंद करने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लंपुर, औचांडी, साफ़ियाबाद, पियाओ मनियारी और साबोली सीमा को भी बंद कर दिया गया है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक़ ट्रैफिक को एनएच-8, भपोरा, अप्सारा सीमा और पेरिफेरल एक्सप्रेसवे पर डाइवर्ट कर दिया गया है।

किसान और केन्द्र की तीसरी बातचीत तक सिर्फ सिंघु और टिकरी सीमा को ही बंद किया गया था। लेकिन बैठक के बेनतीजा होने पर अगले दिन ही किसान दिल्ली के अलग-अलग एंट्री प्वाइंट पर पहुंच गये। किसानों का दिल्ली प्रवेश रोकने के लिए पुलिस ने नोएडा-लिंक रोड को भी ब्लॉक कर दिया। इनके अलावा झारोदा और झटिकरा सीमा भारी यातायात के लिए बंद है। बदुसराय सीमा से सिर्फ हल्के वाहनों की आवाजाही हो रही है।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक़ मुकरबा और जीटी करनाल हाइवे का ट्रैफिक  को भी डाइवर्ट किया गया है। किसान अलग-अलग एंट्री प्वाइंट से दिल्ली में प्रवेश की कोशिश कर रहे हैं। जबकि सिंघु और टिकरी सीमा पर हज़ारों की संख्या में किसान धरने पर डटे हुये हैं। शुक्रवार को हरियाणा के पलवल और मध्य प्रदेश से भी किसानों के सिंघु सीमा पहुँचने की ख़बर है।

पलवल के डिप्टी कमिश्नर नरेश नरवाल ने बताया कि मध्य प्रदेश से करीब 100 किसान पलवल पहुंच गये हैं और वे दिल्ली कूच कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अन्य 100 किसान पलवल से दिल्ली के लिए पैदल ही निकले हैं और उन्हें रोका नहीं जा रहा है। ट्रैफिक और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त है। जबकि फरीदाबाद पुलिस का कहना है कि किसानों को रोकने और लॉ एंड ऑर्डर सुनिश्चित करने के लिए 500 जवानों की तैनाती की गई है। सूत्रों के मुताबिक़ मध्य प्रदेश के किसानों को सिकरी और बदरपुर बॉर्डर पर रोकने की योजना है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सरकार की ओर से किसानों पर बल प्रयोग न किये जाने के निर्देश हैं।

ज़ाहिर है, मोदी सरकार पूरी तरह घिर गयी है।किसानों की माँग मानने का मतलब उदारीकरण की नीतियों को उलटने जैसा होगा जिसके लिए कॉरपोरेट जगत बिलकुल भी तैयार नहीं है। किसान भी इस बात को समझते हैं, इसलिए 5 दिसंबर को पूरे देश में मोदी सरकार ही नहीं अंबानी-अडानी समेत तमाम कॉरपोरेट कंपनियों का पुतला फूँकने का उन्होंने ऐलान किया है।


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