बदायूँ: मंदिर में गैंगरेप और हत्या का आरोपी पुजारी फ़रार, 9 को प्रदर्शन करेगी ऐपवा

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बदायूँ के उघेती गाँव के मंदिर में महिला के साथ रेप और हत्या की जघन्य घटना अब बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन रहा है। इस मामले में जिस तरह पुलिस की लापरवाही सामने आयी है, उसने लोगों को हिला कर रख दिया है। रेप का आरोप मंदिर के पुजारी और उसके साथियों पर है। पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर एफआईआर भी समय पर दर्ज नहीं की।

यह घटना रविवार शाम की है जब महिला पूजा करने गाँव के मंदिर में गयी थी। परिजनों ने बताया कि महिला पूजा करके नहीं लौटी तो घर के लोग परेशान हो गये। रात को मंदिर का पुजारी सत्यनारायण और उसके साथी वेदराम और ड्राइवर जसपाल महिला को लेकर घर आये। महिला के शरीर से खून बह रहा था। बाद में उसकी मौत हो गयी।

मंगलवार को पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर गैंगरेप और हत्या की बात पता चली है। साथ ही गुप्तांग में लोहे की छड़ जैसी चीज़ डालने की बात भी पता चली है। हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने घरवालों की जगह पहले पुजारी की बात पर यकीन किया जो कह रहा था कि महिला कुएँ में गिरने से घायल हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही परिजनों के आरोप के आधार पर एफआईआर दर्ज हुई। आरोप है कि इस मामले में पुलिस ने लीपापोती की कोशिश की। पुजारी सत्यनारायण फ़रार हो गया है। लापरवाही बरतने वाले एक थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया गया है।

विपक्ष इसे योगी सरकार की नाकामी बता रहा है। हाथरस के बाद बदायूँ की इस घटना ने एक बार फिर यूपी के पुलिस प्रशासन की संवेदनशीलता पर  सवाल खड़ा कर दिया है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने घटना की तीखी निंदा करते हुए ट्वीट किया है-

उधर, अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) ने इस मुद्दे पर 9 जनवर को प्रदेशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया है। ऐपवा ने योगी सरकार से इस्तीफा मांगते हुए कहा कि यूपी पुलिस अपराधियों को बचा रही है।

ऐपवा की प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा अधिकारी और प्रदेश सचिव कुसुम वर्मा की ओर से जारी बयान में  कहा गया है कि-

“उत्तर प्रदेश के बंदायू जिले के उघेती गाँव में महिला आंगनबाड़ी कर्मी के साथ मंदिर के महंत और उसके दो सहयोगी ने सामूहिक बलात्कार किया। मेडिकल रिपोर्ट से ज्ञात हुआ है कि महिला के गुप्तांग में लोहे का रॉड डाला गया, उंसके आंतरिक अंगों में भी काफी चोटें आईं है, अनियंत्रित रक्तस्राव के कारण महिला की मौत हो गई है। तीनों अपराधियों में से, मुख्य दोनों अपराधी अभी भी फरार हैं। इस पूरी मामले में पुलिस के बयान और उनकी भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है।

ऐपवा आंगनबाड़ी महिलाकर्मी की मौत पर शोक व्यक्त करती है और दुख की इस घड़ी में उंसके परिवार के साथ संवेदना व्यक्त करती है। ऐपवा मानती है की उंसके परिवार को न्याय तभी मिलेगा जब हत्यारे बलात्कारियों को त्वरित और कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। योगी राज में महिलाओं के साथ बलात्कार और हत्या की घटनाएं आम परिघटना बनती जा रही है। जनता को न्याय दिलाने के बजाय पुलिस सत्ता संरक्षण में अपराधियो का साथ दे रही है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहने का कोई हक नहीं है। ऐपवा उनके इस्तीफे की मांग करती है।”