किसानों के मुद्दे पर 9 अगस्त को राष्ट्रव्यापी आंदोलन

मीडिया विजिल मीडिया विजिल
ख़बर Published On :


अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC) किसान विरोधी अध्यादेशों को वापस लेने के मांग को लेकर 9 अगस्त को राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगी। AIKSCC का कहना है कि किसान विरोधी अध्यादेशों का मकसद “जमाखोरी चालू करो, मंडी खत्म करो और खेती कंपनियों को सौंपो” है। 9 अगस्त के राष्ट्रव्यापी आंदोलन की तैयारी के क्रम में AIKSCC के ऑनलाइन फेसबुक कार्यक्रम के तीसरे दिन “किसान विरोधी अध्यादेशों को वापस लो” विषय पर चर्चा की गयी। जिसे अब तक विभिन्न फेसबुक पेजों पर 65000 किसानों और समर्थकों द्वारा देखा गया।

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के वर्किंग ग्रुप के सदस्य एवम जय किसान आंदोलन के संस्थापक योगेन्द्र यादव ने कहा है कि केंद्र सरकार ने कोरोना काल में तीन किसान विरोधी अध्यादेश लाए हैं जिनका असली नाम “जमाखोरी चालू करो कानून, मंडी खत्म करो कानून और खेती कंपनियों को सौंपा” कानून होना चाहिए, क्योंकि इन अध्यादेशों का यही असली मकसद है। व्यापारी कृषि उत्पाद खरीद कर जमाखोरी करके अपनी मनमर्जी से रेट तय करके बेचता है। जिससे किसान और उपभोक्ता दोनों को नुकसान होता है।

योगेंद्र यादव ने कहा कि एपीएमसी की कमियों के कारण किसानों का शोषण होता है। उसे दूर किया जा सकता था। लेकिन कंपनियों को फायदा पंहुचाने के लिए खरीद का अधिकार निजी हाथों में दिया जा रहा है। जिसमें किसान अपनी उपज बेचने का अधिकार खो देगा। ठेका खेती कानून में कहने को किसान खेत का मालिक होगा लेकिन खेती करने और उत्पाद बेचने का अधिकार कंपनी का होगा। उन्होने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा खेती किसानी की बुनियादी व्यवस्था बदलने की साजिश की जा रही है। हमें पंजाब और हरियाणा के किसानों के आंदोलन जैसा आंदोलन 9 अगस्त को देशव्यापी स्तर अपनी ताकत दिखानी होगी।

Scrap Anti Farmers Ordinances | किसान विरोधी अध्यादेश रद्द करो

कॉरपोरेट भगाओ, किसानी बचाओScrap Anti Farmers Ordinances | किसान विरोधी अध्यादेश रद्द करो देखें लाइव :

Posted by All India Kisan Sanghrash Coordination Committee on Friday, July 31, 2020

 

अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री, वर्किंग ग्रुप सदस्य एवं पूर्व विधायक राजाराम सिंह ने कहा कि कृषि उपज वाणिज्य एवं व्यापार संवर्धन कहने को तो किसान हितैषी है, लेकिन ऐसा है नहीं। एमएसपी से सरकार बचना चाहती है, व्यापारियों के जरिए किसानों को बंधक बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खेती से बेदखल हुए किसान क्या करेंगे? उन्होंने कहा कि देश की धरती से सिर्फ किसान ही जुड़ा है व्यापारी या कंपनियां  नहीं। देश के करोड़ों लोगों को भोजन की गारंटी भी किसान ही देता है। राज्य सरकारें जो बोनस देती थी उसे केंद्र सरकार ने बंद कर दिया है।

अखिल भारतीय किसान सभा के बीजू कृष्णन ने कहा कि इस वर्ष 11 प्रतिशत अधिक गेहूं की बुआई के बावजूद कोरोना के चलते 55 लाख टन गेंहू मंडियों में कम आया, समर्थन मूल्य पर गेहूं नहीं खरीदा गया। उन्होंने कहा कि तीन किसान विरोधी अध्यादेश मेहनतकश किसानों पर हमला है तथा किसानो को बंधुआ बनाने की शुरुआत है।

बीजू कृष्णन ने बताया कि केरल सरकार ने एमएसपी से 800 रुपये अधिक पर 2695 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर धान की खरीद की है। लेकिन अन्य सरकारें एमएसपी पर भी धान खरीदने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने बताया कि केरल सरकार ने 87 लाख नागरिकों और 25 लाख बच्चों को अनाज के अलावा दो किस्म का खाने का तेल, आटा, तेल, शक्कर, नमक, मूंग, अरहर, उरद, चना दाल, सूजी, चाय, मसाले, सांभर पॉवडर के पैकेट दिये गए। 55 लाख लोगों को 1300 रुपये प्रति माह की पेंशन 6 महीने दी जा रही है लेकिन अन्य सरकारें कोरोना काल मे भी केवल खानापूर्ति कर रही हैं।

आशा संगठन के प्रमुख एवम वर्किंग ग्रुप सदस्य हैदराबाद के किरण विस्सा ने कहा कि सरकार द्वारा कहा गया है कि किसानों को आजादी मिल गई है लेकिन यह आजादी कॉरपोरेट को किसानों को लूटने की मिली है। संसद और विधान सभाओं को बिना विश्वास में लिए अध्यादेशों को लागू करने का काम किया गया है। उनका मकसद मंडी को दरकिनार करना, ध्वस्त करना है। व्यापारियों को मजबूती देने के  लिए किसान  को कमजोर कर दिया गया है ।उन्होंने कहा कि राज्यों के अधिकार छीनने का  काम केंद्र सरकार ने किया है लेकिन किसान भी चुप बैठने वाले नहीं है।

कार्यक्रम का संचालन एआईकेएससीसी के वर्किंग ग्रुप के सदस्य डॉ सुनीलम ने किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह किसानों ने सरकार को भूमि अधिग्रहण कानून और आर सी ई पी समझौते आदि मुद्दों पर पीछे धकेला है । संसद में तीन किसान विरोधी बिल पेश होने के पूर्व ही लॉक डाउन खत्म होने के बाद अपनी ताकत दिखलाएंगे। कार्यक्रम में प्रकाशम जिले के किसान नेता रंगाराव भी उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़  में 25 किसान संगठन करेंगे आंदोलन

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और भूमि अधिकार आंदोलन के आह्वान पर 9 अगस्त को छत्तीसगढ़ में किसानों और आदिवासियों के 25 संगठन “ये देश बिकाऊ नहीं है और कॉर्पोरेटो, किसानी छोड़ो” के थीम नारे के साथ आंदोलन के मैदान में होंगे। इसी दिन केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के झंडे तले संगठित और असंगठित क्षेत्र के मजदूर भी देशव्यापी आंदोलन करेंगे। किसान संघर्ष समन्वय समिति और भूमि अधिकार आंदोलन से जुड़े विजय भाई और छत्तीसगढ़ किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते ने यह जानकारी दी।

एक बयान में उन्होंने बताया कि यह आंदोलन मुख्यतः जिन मांगों पर केंद्रित है, उनमें आगामी छह माह तक हर व्यक्ति को हर माह 10 किलो अनाज मुफ्त देने और आयकर के दायरे के बाहर के हर परिवार को हर माह 7500 रुपये नगद सहायता राशि देने, मनरेगा में मजदूरों को 200 दिन काम और 600 रुपये रोजी देने, बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने और शहरी गरीबों के लिए भी रोजगार गारंटी योजना चलाने, श्रम कानूनों, आवश्यक वस्तुओं, कृषि व्यापार और बिजली कानून में हाल ही में अध्यादशों और प्रशासकीय आदेशों के जरिये किये गए संशोधनों को वापस लेने, कोयला, रेल, रक्षा, बैंक और बीमा जैसे सार्वजनिक उद्योगों के निजीकरण पर रोक लगाने, किसानों की फसल का समर्थन मूल्य सी-2 लागत का डेढ़ गुना तय करने, उन्हें कर्जमुक्त करने, किसानों को आधे दाम पर डीजल देने, प्राकृतिक आपदा और लॉक डाऊन के कारण खेती-किसानी को हुए नुकसान की भरपाई करने, वनाधिकार कानून के तहत आदिवासियों को वन भूमि के व्यक्तिगत और सामुदायिक पट्टे देने तथा पेसा और 5वीं अनुसूची के प्रावधानों के तहत प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग का फैसला करने का अधिकार स्थानीय समुदायों को दिए जाने की मांगें शामिल हैं।

अध्यादेशों के जरिये कृषि कानूनों में किये गए परिवर्तनों को किसान विरोधी बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे फसल के दाम घट जाएंगे, खेती की लागत महंगी होगी और बीज और खाद्य सुरक्षा के लिए सरकारी हस्तक्षेप की संभावना भी समाप्त हो जाएगी। ये परिवर्तन पूरी तरह कॉरपोरेट सेक्टर को बढ़ावा देते हैं और उनके द्वारा खाद्यान्न आपूर्ति पर नियंत्रण से जमाखोरी व कालाबाजारी को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि किसानों को “वन नेशन, वन एमएसपी” चाहिए, न कि वन मार्केट!

किसान नेताओं ने कहा कि कोरोना महामारी के मौजूदा दौर में केंद्र की भाजपा सरकार आम जनता विशेषकर मजदूरों, किसानों और आदिवासियों को राहत पहुंचाने में असफल साबित हुई है। वह उनके अधिकारों पर हमले कर रही है और आत्मनिर्भरता के नाम पर देश के प्राकृतिक संसाधनों और धरोहरों को चंद कारपोरेट घरानों को बेच रही है। इसलिए देश के गरीबों को आर्थिक राहत देने और उनके कानूनी और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए ट्रेड यूनियनों के साथ मिलकर किसानों और आदिवासियों के संगठन 9 अगस्त को गांवों और मजदूर बस्तियों में देशव्यापी विरोध आंदोलन आयोजित कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में इस आंदोलन में शामिल होने वाले संगठनों में छत्तीसगढ़ किसान सभा, आदिवासी एकता महासभा, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति, राजनांदगांव जिला किसान संघ, छग प्रगतिशील किसान संगठन, दलित-आदिवासी मंच, क्रांतिकारी किसान सभा, छग किसान-मजदूर महासंघ, छग प्रदेश किसान सभा, जनजाति अधिकार मंच, छग किसान महासभा, छमुमो (मजदूर कार्यकर्ता समिति), किसान महापंचायत, आंचलिक किसान सभा, सरिया, परलकोट किसान संघ, अखिल भारतीय किसान-खेत मजदूर संगठन, वनाधिकार संघर्ष समिति, धमतरी आदि संगठन प्रमुख हैं। 9 अगस्त को ये संगठन फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में सत्याग्रह, धरना, प्रदर्शन, सभाएं आदि आयोजित करेंगे।


 


मीडिया विजिल जनता के दम पर चलने वाली वेबसाइट है। आज़ाद पत्रकारिता दमदार हो सके, इसलिए दिल खोलकर मदद कीजिए। अपनी पसंद की राशि पर क्लिक करके मीडिया विजिल ट्रस्ट के अकाउंट में सीधे आर्थिक मदद भेजें।

मीडिया विजिल से जुड़ने के लिए शुक्रिया। जनता के सहयोग से जनता का मीडिया बनाने के अभियान में कृपया हमारी आर्थिक मदद करें।