कृषि मंत्री ने पराली और एमएसपी पर की घोषणा, किसानों ने कहा- हम आकाशवाणी से सहमत नहीं, आमने-सामने करें बात!

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन कृषि कानून वापस लेने की घोषणा के बाद भी किसान आंदोलन में जुटे हुए हैं। किसानों की तीन कृषि कानून के अलावा भी कई मांगे हैं, जो वह सरकार से  मनवाने का प्रयास कर रहे हैं। इन मांगों के आगे अब धीरे-धीरे सरकार झुकती भी नजर आ रही है। चुनाव नजदीक है तो यह होना लाजमी था। बता दें कि किसानों की तीन मुख्य मांगे हैं एक तो एमएसपी पर अलग से कानून बनाने और सरकार की लिखित गारंटी, वहीं, दूसरी किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की, और तीसरी लखीमपुर मामले में मृतक किसानों को इंसाफ मिले और केंद्रीय राज्य मंत्री को बर्खास्त किया जाए। इन सभी मांगों पर अड़े किसानों को देखते हुए शनिवार को केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने 3 बड़ी घोषणाएं की हैं।

  1. MSP की मांग को पूरा करने को लेकर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार की ओर से किसानों की समस्याओं के निवारण के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि इस कमेटी के गठन से किसानों की एमएसपी संबंधित मांग भी पूरी हो गई है।
  2. वहीं, तोमर ने ऐलान किया कि देश में अब पराली जलाना अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि यह किसान संगठनों की बड़ी मांगों में से एक मांग थी कि पराली जलाने को अपराध की श्रेणी से बाहर रखा जाए, इसलिए किसानों की यह मांग केंद्र सरकार ने मान ली है।
  3. केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि शीतकालीन सत्र के पहले दिन 29 नवंबर को ही तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के विधेयक को सूचीबद्ध किया जाएगा।

राज्य सरकारों को किसानों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने का अधिकार..

कृषि मंत्री ने कहा कि आंदोलन के दौरान राज्य सरकारों को किसानों के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने और उन्हें मुआवजा देने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें मामले की गंभीरता को देखते हुए अपने-अपने राज्य की नीति के अनुसार इस संबंध में निर्णय ले सकती हैं।

किसान सरकार की आकाशवाणी से सहमत नहीं होंगे..

कृषि मंत्री की घोषणा के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने आज सिंघू सीमा पर हुई बैठक में 29 नवंबर को होने वाली संसद तक ट्रैक्टर मार्च को रद्द कर दिया है। हालांकि, किसान नेताओं ने यह भी कहा है कि 29 नवंबर को संसद मार्च का कार्यक्रम स्थगित किया गया है, खत्म नहीं। इसी के साथ उन्होंने सरकार को 4 दिसंबर तक का समय दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि सरकार को वार्ता की मेज पर लौटना होगा। हम सरकार की आज की गई घोषणा से सहमत नहीं हैं। हम आकाशवाणी से सहमत नहीं होंगे। आमने-सामने बैठकर बात करें।

किसान चाहते हैं कि उनकी सभी मांगे पूरी हो..

किसानों ने कहा, आज सरकार की तरफ से कुछ बयान आए हैं, जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जाती हमारा संघर्ष जारी रहेगा। हम इंतजार कर रहे हैं। 29 को कूच नही करेगा। आपको बता दे कि किसानों की मांगों में एमएसपी का मुद्दा , शहीद किसानों को मुआवजा, देशभर में किसानों के ऊपर दर्ज केस की वापसी, लखीमपुर खीरी के दोषी को कड़ी सजा और केंद्रीय गृह मंत्री की बर्खास्तगी,विद्युत विद्या को खत्म करना और पराली को दंड की श्रेणी से हटना शामिल है। इन मांगों में से आज सरकार ने पराली और एमएसपी को लेकर घोषणा की है लेकिन किसानों पर दर्ज मुकदमों का ठीकरा राज्य सरकारों पर फोड़ दिया है, जिसे लेकर किसानों को कहना है कि पीएम मोदी राज्य सरकारों को निर्देश दें कि मुकदमे वापिस हों। किसान चाहते हैं कि उनकी सभी मांगे पूरी हो और सम्मानपूर्वक फैसला हो।


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